अगर होना है डायबिटीज फ्री, तो जाननी पड़ेगी डॉ. बिस्वरुप रॉय चौधरी की जबरदस्त ट्रिक्स

रिपोर्ट- भारती बघेल

नमस्कार…आज हम बात करेंगे डायबिटीज पर…इस पर विस्तार से चर्चा करने के लिए नेशनल खबर की संवाददाता सुरभि तिवारी डॉ. बिस्वरुप रॉय चौधरी जी के पास पहुंची…तो क्या रही ये पूरी चर्चा…चलिए हम आपको बताते हैं….

—पहला सवाल ही ये आता है कि डीयबिटीज क्या है?
इसका जवाब देते हुए डॉ. बी.आर.सी ने कहा कि डायबिटीज कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है….डायबिटीज का मतलब है कि आपके ब्लड में जितना शुगर होना चाहिए उससे थोड़ा ज्यादा है…पहली बात तो ये समझनी है कि ब्लड में शुगर क्यों होता है? तो इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए…कि जैसे अभी आप मेरी बाते सुन पा रहे हैं…समझ पा रहे हैं…जिंदा हैं बेसिकली…तो जिंदा रहने के लिए जो एनर्जी बॉडी के एक एक शैल को चाहिए होती है..वो एनर्जी शुगर से आती है…ब्लड शुगर को ले लेकर बॉडी के एक- एक शैल तकर पहुंचाता है…और शैल उसे बर्न करके एनर्जी में कनवर्ट करता है…जिसकी वजह से आप जिंदा हैं…इसलिए शुगर का ब्लड में होना बहुत जरुरी है…लेकिन जो ध्यान देने वाली बात है वो ये है कि बॉडी में शुगर एक लेवल तक होना ही अच्छा है अगर ज्यादा हो जाएगा तो उसे बोलेंगे हाई शुगर…क्योंकि एक लिमिट से अगर ज्यादा शुगर होगा तो ब्लड का जो सारा ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम है वो स्लो हो जाएगा…

—अगर आपको सीधी भाषा में समझना है कि डायबिटीज क्या है, तो इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं…जैसे मान लीजिए किसी व्यक्ति का वजन 70 किलो है तो उस व्यक्ति में 5 लीटर खून होगा…तो इस 5 लीटर खून को एक एक लीटर करके 5 बोटल में कर लीजिए…और फिर एक लीटर की बोटल लीजिए और उसमें से एक बूंद निकालकर अगर हम ग्लूकोमीटर में डालें और अगर उसकी रिडिंग आती है 100 इसका मतलब उस व्यक्ति के एक लीटर खून में एक ग्राम शुगर है…वहीं अगर रीडिंग आती है 200 इसका मतलब एक लीटर खून में 2 ग्राम शुगर है…ऐसे ही अगर रीडिंग आती है 300 तो खून में 3 ग्राम शुगर है…अगर 300 रीडिंग एक लीटर में है या ऐसे समझ लो कि अगर 3 ग्राम शुगर है तो डॉक्टर आपको बोलेंगे कि आपको डायबिटीज है…क्योंकि आपके एक लीटर खून में 1 ग्राम शुगर की मात्रा अधिक है…एक ग्राम बोले तो एक चम्मच का एक चौथाई हिस्सा…अगर इतना हिस्सा ब्लड से हटा के डाल दिया जाए तो आप डायबिटीज के पेशेंट नहीं कहलाएंगे…तो देट इज डायबिटीज…

—-अब सवाल आता है कि डायबिटीज से बाहर कैसे निकलें?
तो इसका इलाज भी वही है जो डॉ, बीआरसी हमेशा बताते हैं…वो है डीआईपी डाइट…जिसका जिक्र हमने कई बार नेशनल खबर में किया है तो बस आपको वो डीआईपी डाइट अपना लेनी है आप देखेंगे कि मात्र तीन दिन में ही आप पर असर दिखने लग जाएगा…और आगे फिर दोबारा आपको डायबिटीज न हो इसके लिए आप डीआईपी डाइट पर ही बने रहें…

वहीं पैक्ड फूड और एनीमल प्रोडक्ट को बाय -बाय कह दीजिए…और 10 से 15 मिनट धूप में बैठिए..

—-अब सवाल आता है कि डायबिटीज टाइप-1 और डायबिटीज टाइप -2 के पेशेंट्स को कितना डाइम लगता है?

तो सबसे पहले टाइप-1 के बारे में बात करते हहुए डॉक्टर बी.आर.सी. ने कहा कि डायबिटीज टाइप-1 के पेशेंट ज्यादातर बच्चे होते हैं… अगर वो एक साल के अंदर अंदर डॉ. बी.आर.सी. के पास इलाज के लिए आते हैं दतो उनमें से 40 प्रतिशत बच्चें तो तीन महीने के अंदर ही इंसुलिन मुक्त हो जाते हैं….और जो बाकी बच्चे होते हैं उनको लंबा समय लगता है, काफी बच्चे ऐसे भी होते हैं जिन्हें इंसुलिन लास्ट तक लेना ही पड़ता है…लेकिन डीआईपी डाइट में आने का ये फायदा होता है कि अगर कोई 50 यूनिट को ब्रेक करके दिन मे चार बार इंसुलिन ले रहा है…तो उसको बस एक बार ही इंसुलिन लेनी पड़ेगी…कहने का मतलब है कि अब उस बच्चे को इंसुलिन की एक चौथाई ही जरुरत पड़ेगी बस….

—अब बात करते हैं डायबिटीज टाइप-2 के पेशेंट के बारे में…टाइट-2 के लगभग 90 परसरेंट मेडिसिन वाले मरीज मेडिसिन फ्री हो सकते हैं…और करीब 70 परसेंट इंसुलिन वाले इंसुलिन फ्री हो सकते हैं…पेशेंट्स को सही होने में 3 दिन से तीन महीने के बीच में कुछ भी टाइम लग सकता है…ये डिपेंड करता है कि आपकी बीमारी कितनी पुरानी है…

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