आधुनिकतम तकनीकों से स्पाइनल फ्रैक्चर का इलाज

Dr. Rahul Gupta, Sr. Neurosurgeon, Fortis Hospital, Noida

रिपोर्ट- भारती बघेल

रीढ़ में फ्रैक्चर का मुख्य कारण कैल्शियम की कमी से होने वाली बीमारी ओस्टिओपोरोसिस है..रीढ़ के फ्रैक्चर की आमतौर पर लोग अनदेखी करते हैं…लेकिन ऐसा करने से भविष्य में विकलांगता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है…आरंभ में इसका इलाज दवाइयों, इंजेक्शन एवं फिजियोथिरेपी से हो सकता है लेकिन गंभीर अवस्था में सर्जरी करानीपड़ती है…आज एमआईएस तकनीक से सर्जरी करनी पड़ती है…आज एमआईएस तकनीक से सर्जरी होने लगी है जिससे मरीज को तत्काल लाभ मिलता है और कष्ट भी कम होता है…

हमारे देश में ओस्टिओपोरोसिस की व्यापक तौर पर अनदेखी की जाती है…लोग इसके इलाज में लापरवाही बरतते हैं जबकि रीढ़ में फ्रैक्चर का सबसे बड़ा कारण है..इन समस्याओं की अनदेखी काफी मंहगी पड़ सकती है क्योंकि इसके कारण ताउम्र के लिए विकलांगता हो सकती है…

फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के वरिष्ठ न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन डॉ. राहुल गुप्ता ने स्पाइनल फ्रैक्चर के अनेक मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है…स्पाइन फ्रैक्चर को जोड़ने के लिए वह मिनिमली इनवैसिव तकनीकों का इस्तेमाल करते है…जिसके लिए सूक्ष्म चीरें लगाकर सर्जरी की जा सकती है..

यह तकनीक ओस्टियोपोरोसिस के कारण रीढ़ के फ्रैक्चर के इलाज के लिए बहुत ही कारगर है…तथा इससे मरीज को न केवल तत्काल दर्द से राहत मिलती है बल्कि कुछ घंटे बाद ही मरीज चल फिर सकता है…इसमें मरीज को नहीं के बराबर दर्द होता है….

इसमें दो विधियों- वर्टेब्रोप्लास्टी एवं किफेप्लास्टी का उपयोग किया जाता है…वर्टेब्रोप्लास्टी में तीन घंटे के बाद ही मरीज को घर जाने दिया जाता है…किफोप्लास्टी में 20 से 60 मिनट का समय लगता है..और कुछ मामलों में मरीज को रात में अस्पताल में रहना पड़ सकता है…

इन विधियों से सर्जरी कुशल एंव अनुभवी स्पाइन सर्जन से ऐसे हॉस्पीटल में करानी चाहिए जहां आधुनिक सुविधाएं हों…कुशल एवं अनुभवी स्पाइन सर्जन के हाथों सर्जरी होने पर 90 प्रतिशत रोगियों को 24 में दर्द से आराम मिल जाता है…

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