उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव पर परिचर्चा

रिपोर्ट: प्रशांत शुक्ला
जैसा कि हम जानते हैं कि,अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने हैं,तो क्या फिर एक बार भारतीय जनता पार्टी अपना विजय रथ कायम रख पाएगी या फिर वैसा ही देखने को मिलेगा जैसा कि प्रत्येक विधान सभा चुनाव में अमूमन तौर पर उत्तर प्रदेश में देखने को मिलता है, कहने का तात्पर्य क्रमवार अलग अलग पार्टियों को सरकार बनाने का मौका। खैर ये तो आने वाला चुनाव का परिणाम ही तय करेगा की उत्तर प्रदेश में ” कौन सी सरकार”। यदि अभी की मौजूदा स्थिति के हिसाब से उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव का आकलन किया जाए तो भारतीय जनता पार्टी की स्थिति ज्यादा बेहतर नही दिखाई देती, कमोबेश वैसी तो बिल्कुल भी नही जैसा कि 2017 के विधान सभा चुनावों में देखने को मिली थी। पिछले विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला था, तीन चौथाई से भी अधिक सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी, और विधायक दल के नेताओं ने सर्व सम्मति से ” योगी आदित्य नाथ” को अपना नेता चुना और मुख्यमंत्री के पद पर आसीन किया। 2022 के विधान सभा चुनाव योगी आदित्यनाथ के लिए एक कड़ी चुनौती है, क्योंकि हालिया दिनों में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश ग्राम परिषद् के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को करारा झटका लगा है, परिणाम योगी आदित्यनाथ की आशाओं के अनुरूप नहीं आए हैं, बल्कि सपा और बसपा जिनको पिछले विधान सभा चुनावों में जनता ने सिरे से नकार दिया था, उन्होंने फिर से वापसी के संकेत दिए हैं ,जो कि भारतीय जनता पार्टी के लिए कड़ा संदेश है।
अब बात की जाये कि आखिर कौन से ऐसे मुद्दे हैं जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश की जनता योगी आदित्यनाथ से विमुख हो रही है।
हमने उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुछ ग्रामीणों से बात की और यह समझने की कोशिश की।
तो इसमें जो हमें सबसे ज्यादा सुनने को मिला उसमें पहला कारण लोगों ने बताया, कर्ज माफी। कहने से तात्पर्य है,भारतीय जनता पार्टी से पहले वाली सरकार मतलब अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने किसानों के सम्पूर्ण कर्ज को माफ कर दिया था जबकि भारतीय जनता पार्टी ने कर्ज माफी के संदर्भ में लघु एवम सीमांत का दायरा लगाकर सभी किसानों के कर्ज को माफ नही किया। यह पहला कारण सुनने को मिला। दूसरा कारण छुट्टे पशु। जैसा की हमें उत्तर प्रदेश में देखने को मिला कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार आते ही गौकशी पर रोक लगा दी गई उस परिणाम ये हुआ कि उससे बहुत से पशु जिन्हे पहले कसाइयों को बेच दिया जाता था अब वो पशु , पालन पोषण ना हो पाने के अभाव में ग्रामीणों द्वारा छोड़ दिए जा रहें हैं और यही छुट्टे पशु अन्य ग्रामीणों के खेतों में घुस जा रहें हैं और फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। तीसरा कारण योगी आदित्यनाथ के तेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी के अन्य विधायक जो की बीजेपी की लहर में जीतकर आए हैं वो अपनी विधान सभा से ही नदारद रहते हैं, हालांकि उन्हें इस संदर्भ में योगी आदित्यनाथ से कोई शिकायत नही है परंतु उनके विधायक ही जब अपने क्षेत्र की सुध बुध नहीं लेने आयेंगे तो उन पर क्या लोग विश्वास करेंगे और यदि देखा जाय तो कमोबेश यही स्थिति केंद्र में भी, बीजेपी के साथ देखने को आती है जहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तो लोगों को शिकायत नही है परंतु उनके सांसदों द्वारा उचित प्रयास नही किए जा रहे हैं।
हालांकि उत्तर प्रदेश का आगामी विधान सभा चुनाव मनोरंजक होगा, इसमें कोई भी संदेह नही है। योगी आदित्यनाथ की इन चुनावों में कठिन परीक्षा होगी।अब देखने की बात यह है कि अब कौन से नए मुद्दों के साथ योगी आदित्यनाथ चुनाव मैदान में आयेंगे क्यांकि राम मंदिर का निर्माण का फैसला भी आ चुका है और निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका हैं तो इस लिहाज से अब लोगों की राम मंदिर के संदर्भ में उत्सुकता कम हो गई है, कहने का तात्पर्य कि यदि अब राम मंदिर निर्माणाधीन है तो बन भी जाएगा, फिर चाहे राम मंदिर का संपूर्ण निर्माण किसी भी पार्टी के कार्यकाल में संपन्न हो।
लिहाजा अब यह चुनाव और भी मनोरंजक और उत्साहवर्धक हो चुका है, योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती, राहुल गांधी और भी अन्य दल किस प्रकार से आने वाले विधान सभा चुनावों में अपना दावा पेश करतें हैं ये तो आने वाला समय ही निर्धारित करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *