कमर दर्द से पाएं मिनटों में निजात ?

Dr. Rahul Gupta, Sr. Neurosurgeon, Fortis Hospital, Noida

रिपोर्ट- भारती बघेल

कमर दर्द सिर दर्द के बाद शरीर के किसी अंग में होने वाला दूसरा सबसे सामान्य दर्द है…पांच वयस्कों में से चार वयस्कों को उनके जीवन में किसी न किसी समय दर्द का सामना करना पड़ता है..सामान्य रोगों की सूची में सर्दी जुकाम के बाद कमर दर्द का ही नंबर आता है..कमर दर्द या जतो अचानक एंव तीव्र हो सकता है या धीमे धीमे बढ़ सकता है..अगर कमर दर्द एक सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे तो इसके कारण कमर की मांसपेशियों के खिंचाव, तीव्र वेदना एंव जकड़न हो सकती है…थोड़ा सा भी हिलने डुलने और यहां तक की खासने छींकने से कमर दर्द बढ़ सकता है…कई बार कमर दर्द के साथ -साथ हाथों या पैरों में सुन्नपन और सिहरन हो सकती है….

कमर दर्द किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है…यह 35 से 55 वर्ष के वयस्कों के बीच अधिक सामान्य है…कमर दर्द हालांकि कमर के किसी भी हिस्से में हो सकता है…लेकिन यह आमतौर पर रीढ़ में मांसपेशियों, जोड़ों, स्नायुओं,हड्डियों या अन्य क्षेत्रों से शुरु होता है..कमर दर्द का संबंध डिप्रेशन, तनाव एंव एंग्जाइटी जैसे कारणों से भी हो सकता है..

—कमर दर्द की जांच कैसे की जाती है
एक्स रे- एक्स रे शक्तिशाली अदृश्य किरणें होती हैं जिनके जरिए मानव शरीर के भीतर के अंगों खास तौर पर हड्डियों को देखना संभव हो जाता है…

सीटी स्कैन– यह कंप्यूटर से प्रोसेस की हुई एक्स रे होती है जिनके जरिए शरीर के किसी हिस्से की क्रॉस सेक्शनल तस्वीरें उत्पन्न की जाती हैं जिनकी मदद से हड्डियों और कोमल ऊतकों को देखा जाता है…

एमआरआई– यह इमेजिंग तकनीक है जिनमें ऊतकों और नसों सहित शरीर की आंतरिक संरचना को देखने के लिए चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है…

माइलोग्राम– इसमें स्पाइनल कार्ड में रेडियोग्राफिक डाई इंजेक्ट की जाती है जिससे यह देखने में मदद मिलती है कि वर्टेब्रा कहीं स्पाइनल कार्ड में चुभ तो नहीं रहा है…

बोन स्कैन– इसके तहत मरीज में रेडियोधर्मी ट्रेसर इंजेक्ट किया जाता है…इसके बाद मरीज की स्कैनिंग की जाती है जिससे हड्डी में कुछ असामान्यताओं को देखा जा सकता है…

—-उपचार के विकल्प
गैर सर्जिकल विकल्प- कमर दर्द से पीड़ित ज्यादातर लोग फैमिली डॉक्टर या इटरनल या मेडिसीन के विशेषज्ञ से परामर्श कर सकते हैं जो मरीज को परम्परागत तरीके से उपचार करने के बारे में सलाह दे सकते हैं…परम्परागत तरीके से उपचार की मदद से मेडिकल या ऑपरेटिव उपचारों को टाला जा सकता है.. कमर दर्द के लिए परम्परागत उपचार विधियों में इंजेक्शन, व्यायाम और फजियोथिरेपी आदि शामिल है…अगर परम्परागत तरीके से उपचार की मदद से मेडिकल या ऑपरेटिव उपचारों को टाला जा सकता है…अगर परम्परागत उपचार की विधियों से लाभ नहीं होता है तो मरीज को आगे के इलाज के लिए स्पाइन विशेषज्ञ के पास भेजा जाना चाहिए…

व्यायाम– व्यायाम कमर दर्द तथा इससे जुड़ी चिंता/अवसाद एवं लाचारी की भावना को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है…

फिजियोथेरेपी– फिजियोथेरेपी सत्र के तहत फजियोथिरेपिस्ट मरीज को बुनियादी शरीर रचना और शरीर विज्ञान के बारे में शिक्षित करते हैं और मरीज को वैसे व्यायाम करने के बारे में निर्देश देते हैं जिससे प्रभावित अंग में ताकत आती है और शरीर को अनुकूल बनाया जा सकता है…

एपीडयूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन– एपीड्यूरल स्पाइन इंजेक्शन के तहत कूट देने वाली स्पाइनल नसों के आसपास के क्षेत्र में सूजन रोधी दवाई दी जाती है…

सर्जिकल विकल्प डिक्रम्प्रेशन – इस प्रक्रिया में सर्जन कष्ट देने वाले हड्डी के टुकड़े या तकलीफदेह डिस्क सामग्रियों को निकाल देते हैं…

स्पाइनल फ्यूजन- सर्जन आपकी रीढ़ पर से दवाब हटाते हैं और हड्डियों के दो खंडों को जोड़ते हैं…सर्जन फ्यूजन पूरा होने तक स्पाइनल को स्थिर रखने के लिए मेटल रॉड तथा स्क्रू का उपयोग करते हैं…

मिनिमल एक्सेस स्पाइनल टेक्नोलॉजीज
मानक स्पाइन प्रक्रियाओं की तुलना में बहुत ही छोटे चीरे के जरिए एमएएसटी सर्जरी की जाती है…और इस तरह से मांसपेशियों की छति कम होती है…कम रक्त की हानि होती है और कम समय के लिए अस्पताल में रहना पड़ता है…

डिस्क रिप्लेसमेंट
सर्जन रुग्न या क्षतिग्रस्त डिस्क के स्थान पर कृत्रिम डिस्क पुर्नस्थापित करते हैं ताकि रीढ़ की हड्डी में सामान्य गतिशीलता को बनाया रखा जा सके तथा दर्द कम हो सके..

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