कोरोना काल में रोजगार का अकाल

रिपोर्ट- भारती बघेल

सारी पढ़ाई लिखाई स्किल्स हो जाते हैं बेकार , जब नहीं मिलता है रोजगार…रोजगार की कमी तो शुरु से ही थी लेकिन कोरोना काल के चलते स्थिति और भयावह हो गई…इस महामारी में लोगों ने प्राइवेट नौकरियों से भी हाथ धो लिया…लॉकडाउन के चलते कंपनियां बंद कर दी गई जिसके चलते लोगों की रोजी रोटी पर बात आ गई…और अब सवाल ये खड़ा हो गया है कि कहीं ऐसा न हो कि लोग कोरोना से तो बच जाएं लेकिन भुखमरी से मर जाएं…आज के इस आर्टिकल में हम आपको यही बताएंगे कि कोरोना काल में रोजगार का अकाल किस कदर आम आदमी के जीवन में आया है….

कोरोना ने अर्थव्यवस्था पर तगड़ी चोट की है…इस दौरान लाखों लोगों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा…आपको बता दें कि इस दौर में 70 लाख से ज्यादा पीएफ खाते बंद हुए…पिछले 70 सालों में बेरोजगारी एक अहम समस्या बनी हुई है…एक समय था जब भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व में तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था कहा जाता था…इस समय सबसे बूरे हालातों से जूझ रही है…हालांकि बीते कुछ सालों से भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट के कयास लगाए जा रहे थे…लेकिन इस साल जारी किए गए NSO के आंकड़े इस गिरावट की तस्वीर के और भी ज्यादा डरावने होने की तस्दीक करते हैं..NSO के आंकड़े बताते हैं कि 2020 के अप्रैल से जून की तिमाही में भारत की जीडीपी पिछले साल के मुकाबले 23.9 फीसदी सिकुड़ गई है….

अर्थव्यवस्था में आई गिरावट से जुड़े आंकड़े
—भारत की GDP में 23.9 प्रतिशत की कमी आई है…लगभग चार दशकों में देश के लिए कॉन्टेक्शन का ये पहला उदाहरण है…
—-देश के लिए GVA में 22.8 प्रतिशत की गिरावट आई है…
—विनिर्माण में 39.3 प्रतिशत खनन में 23.3 प्रतिशत, होटल्स में 47.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है…
–ग्रॉस फिक्सड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 52.9 प्रतिशत, इलेक्ट्रिसिटी में 7 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में 50.3 प्रतिशत की कमी..
–केवल कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी…

वहीं आपको बता दें कि ये निराशाजनक स्थिति न केवल भारत बल्कि चीन को छोड़कर पूरी विश्व की है…बहराहाल इन आंकड़ों में सबसे बुरी स्थिति भारत की है…और G-20 देशों में भी भारत सबसे निचले पायदान पर है…

गिरावट के प्रमुख कारण और इससे जुड़े क्षेत्र
—कोरोना महामारी के दौरान लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते आपूर्ति और मांग दोनों को बड़ा झटका लगा है…
—गिरावट की सीमा असर देश की उत्पादकता , कारोबार, रोजगार के अवसर निवेश और सेवाओं पर…
—फिच रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 10.5 प्रतिशत कॉन्ट्रेक्शन का लगाया अनुमान…
—बैंको से ऋण लेने वाले उद्योग और व्यवसाय समय पर ऋण चुकाने में सक्षम नहीं होंगे जिससे बैंकों की बैलेंसशीट खराब होगी…
—अर्थव्यवस्था में व्यापार का चक्रीय प्रवाह बुरी तरह से प्रभावित

बेराजगारी की हालत से तो हर कोई वाकिफ है लेकिन अब सवाल ये है कि सरकार इस राह में क्या महतिवपूर्ण कदम उठा रही है..
—वित्त मंत्रालय ने भारतीय अर्थव्यवस्था में आया कॉन्ट्रेक्शन भारत द्वारा लगाए गए सबसे कठोर लॉकडाउन का परिणाम बताया है..
—सरकार को अर्थव्यवस्था में एक तेज V आकार की रिकवरी की उम्मीद है…
—वित्त मंत्रालय ने कहा है कि नवीनतम आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक कृषि क्षेत्र ने देश में आर्थिक गतिविधियों के विकास में तेजी लाई है…
—वित्त मंत्रालय के मुताबिक घरेलू क्षेत्र में, केंद्र सरकार के बढ़ते उपयोग खर्च से GDP वृध्दि के लिए घरेलू मांग बढ़ी..ईयर ओवर ईयर बेसिक पर जीएसटी संग्रह में हुआ सुधार

सरकार चाहें कुछ भी कहें मगर सच्चाई यही है कि भारत में बेरोजगारी अपने चरम पर है… ऐसे में जरुरत है कि सभी लोगों को रोजगार मिले…लॉकडाउन के चलते भुखमरी की समस्या पैदा न हो…और हर आम आदमी को दो वक्त की रोटी मिल सके…

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