कोरोना महामारी चीन की एक साजिश ?

रिपोर्ट- भारती बघेल

यूं बेबस करके किसी से जीतना शोभा की बात नहीं,
जुनून तो फतह का है तेरे अंदर, मगर युध्द का आगाज करने की तेरी औकात नहीं…
डूबते सूरज को देखकर रातों का जश्न मनाने वाले,
तू उगते सूरज को डूबा सके, ऐसी तुझमें बात नहीं….

पूरी दुनिया और खासतौर से भारत में तबाही मचा देने वाले कोरोना वायरस को लेकर एक नया खुलासा हुआ है…और वो ये है कि चीन पिछले पांच साल से कथित तौर पर कोरोना यानी सार्स कोव-2 को बायलॉजिकल वेपन के रुप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा था और ये कोई हवा में बातचीत नहीं है बल्कि उसके वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जो रिटन में डिटेल तैयार की है, उसमें इसका जिक्र है और ये डॉक्यूमेंट अब हाथ लगा है अमेरिकन जांचकर्ताओं के…

चीन की छवि पूरी दुनिया में कैसी है इससे कोई अनजान नहीं है…और इस बीच आए इस विस्फोटक दस्तावेज ने दुनियाभर में कोहराम मचा दिया है..ए.एस.पी.आई (ASPI) के मुताबिक चीन तीसरा विश्वयुध्द जैविक हथियारों के जरिए लड़ने की तैयारी में है…इस दस्तावेज में कथित तौर पर ये खुलासा किया गया है कि चीनी सेना के वैज्ञानिक सार्स कोरोना वायरस के इस्तेमाल करने पर चर्चा कर रहे थे…2015 से ही सार्स कोरोना वायरस को सैन्य क्षमता के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी करने में लगा था….

ये पहली दफा नहीं है जब शक की सुई चीन पर घूमी हो इससे पहले भी कई बार इस कोरोना महामारी को लेकर चीन पर उंगली उठ चुकी है…हांलाकि ये अलग बात है कि वो हमेशा इनकार करता रहा है…वर्तमान में चल रही कोरोना महामारी का केंद्र वुहान का वो बाजार माना जाता है जो प्रयोगशाला से करीब 15 किलोमीटर दूर था..और ये वही प्रयोगशाला थी जहां कोरोना वायरस को लेकर रिसर्च चल रही थी जी हां सही समझे आप वो था इंस्टीयूट ऑफ बायरॉलोजी…

खैर हम वापस इसी दस्तावेज पर आते हैं…ये तीसरा विश्वयुध्द चल रहा है ये हम मान सकते हैं…क्योंकि चीन इसके लिए पिछले पांच साल से तैयारी कर रहा था…आप खुद ही सोचिए सितम्बर, अक्टूबर 2019 तक चीन इसे छिपाता रहा था…आकर के 2020 की जनवरी में माना कि हां ऐसे ऐसे संक्रमण होता है…अपने यहां बुहान तक सीमित रखा और पूरी दुनिया में इसे फैला दिया…यहां तक की WHO की टीम को एक साल तक आने नहीं दिया और जब किसी भी तरह आने देने के लिए राजी हुआ तो लैब में पानी घुसा दिया गया या घुस गया…और WHO की टीम खाली हाथ वहीं से लौट आई…

जहां एक तरफ ब्रिटेन के द सन अखबार ने चीन की घातक सोच के बारे में अनुमान जताये वहीं सरकारी ग्लोबल टाइम्स समाचार पत्र का कहना है कि ये सब चीन की छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है…किसमें कितनी सच्चाई है ये तो आने वाले वक्त में चलेगा नेशनल खबर ऐसी किसी बात का दावा नहीं करता है…उपर्युक्त जानकारी दुनिया भर की मीडिया द्वारा प्रकाशित लेखों का मेलजोल है…रही बात तीसरे विश्वयुध्द की तो युध्द दो देशों की सेनाओं के बीच में लड़ा जाता है अभी तक तो हम यही देखते आ रहे थे…लेकिन हथियारों से युध्द लड़ना यहीं कहीं से भी वीरता की निशानी नहीं है….

न जाने कितने मासूमों की जान चली गई इस कोरोना महामारी में…न जानें कितने घर उजड़ गए कोरोना की इस महामरी में…न जानें कितने घरों के चिराग बुझ गए कोरोना की इस महामारी में…यूं बिना वजह मासूमों की जान लेना युध्द की परिभाषा नहीं हो सकती…

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