कोरोना महामारी पर सिस्टम फेल…. क्यों?

न बैड, न ऑक्सीजन…
दर दर भटके ये तन …
उम्मीद थी अपनों से कि देंगे कंधे,
मगर श्मशान में एक लाइन से फूंके गए हम…

कोरोना महामारी ने पिछले एक वर्ष से सम्पूर्ण विश्व में जिस तरह से तबाही मचाई है उसे शब्दों में बयान करना बेहद मुश्किल है….युरोप, अफ्रीका, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, एशिया कोई महाद्वीप कोई देश ऐसा नहीं है जो कोरोना महामारी जैसी विश्व व्यापी समस्या से अछूता बचा हो….ऐसे विकसित देश, जहाँ की स्वास्थ्य सेवाओं का पूरे विश्व में लोहा माना जाता है वो भी कोरोना महामारी के आगे विफल और नतमस्तक दिखाई दी…जिस प्रकार से यह महामारी अपने पहले से दूसरे और दूसरे से तीसरे चरण में आई, हर ओर सिर्फ त्रासदी ही देखने को मिली…लाखों लोगों ने अपनी जानें गंवा दी…

बात अगर भारत की करें तदो यहां ये महामारी अपने दूसरे दौर में है और प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग अपनी जानें गंवा रहे हैं जो कि दिल को झकझोर देने वाला है….भारतीय स्वास्थ्य ढांचा पूरा चरमरा चुका है, प्रतिदिन हजारों लोग स्वास्थ्य उपकरणों के आभाव में अपनी जानें गंवा रहे हैं….राज्य व केन्द्र दोनों ही स्तर पर सरकारें नाकाम साबित हुई हैं…इतना ही नहीं वैक्सीनेशन की, दवाइयों के आपूर्ति की, बेड की उपलब्धता की हर तरफ से भारत की कमर टूटती नजर आ रही है…हर तरफ लाशों का तांता लगा हुआ है और आंसुओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है….

अब सवाल ये उठता है कि आखिरकार यह भयावह स्थिति भारत में पैदा कैसे हुई? फरवरी 2020 में यह महामारी भारत में पैदा हुई, जो नवम्बर आते – आते कुछ कमजोर हो गई, ऐसा लगने लगा कि भारत में कोरोना पर काबू पा लिया गया है…. कुछ बाध्यताओं के साथ सभी गतिविधियों को अनुमति दे दी गई…और ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्थिति लगभग सामान्य हो चुकी है… परन्तु फिर ऐसा क्या हुआ कि मार्च आते- आते कोरोना महामारी ने फिर जोर पकड़ा और अभी अप्रैल माह समाप्त भी नहीं हुआ है और भारत में लाशों का अंबार लग चुका है….इस महामारी से संक्रमित लोगों की सूची में भारत सबसे ऊपर खड़ा है…

आखिर भारत में इस महामारी के चलते होने वाली इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी का जिम्मेदार कौन है? इस बात का पूर्वानुमान पहले से ही अन्य देशों द्वारा भारत को दे दिया गया था कि जल्द ही भारत में कोरोना महामारी का दूसरा दौर भी आएगा जो पहले दौर से ज्यादा गंभीर और भयावह होगा… तो फिर क्यों भारत की राज्य व केन्द्र सरकारें समय से नहीं चेती… या ऐसा मान लिया जाए कि भारत में सभी सत्ता दल केवल अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने के लिए ही सत्ता पर काबिज हुए हैं….जिन लोगों के वोट पाकर इन सरकारों ने सत्ता हासिल की आज उन्ही लोगों को इन्होंने मरने के लिए छोड़ दिया है….

गत एक वर्ष में जितना पैसा इन सरकारों ने अपने चुनाव प्रचार में खर्च किया उतने ही पैसों से ना जाने कितनी जिन्दगियां बचाइ जा सकती थी…इस कोरोना महामारी के दौर में प्रस्तावित चुनावों को क्या स्थगित नहीं किया जा सकता था? इसमें चुनाव आयोग, राज्य सरकार, केन्द्र सरकार व वह संस्थाएँ जो आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति में बाधाएं उतपन्न कर रहीं हैं, सभी समानरूप से जिम्मेदार हैं…जिस जनता ने वोट देकर सरकार बनाई इस उम्मीद के साथ की वो उसकी भलाई सोचेगी…लेकिन शायद सरकार सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने तक ही सोच पाई…

दोस्तों सरकार क्या करेगी ये तो सरकार जाने लेकिन आप की जान की सलामती आपके हाथ है…इसलिए जब भी घर से निकलिए मास्क पहनकर निकलिए और खुद के साथ-साथ दूसरों को भी सुरक्षित करिए…वहीं स्वास्थ्य से जुड़ी अलग अलग बीमारियों के बारे में जानने के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल नेशनल खबर पर जा सकते हैं..जिसमें स्वास्थ्य से जुड़ी अनेकों बीमारियों पर हम भारत के जानेमाने डॉक्टर्स के साथ चर्चा करके सफल और सस्ता ईलाज सीधे आप तक पहुंचाते हैं…

रिपोर्ट- राहुल शुक्ला

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