क्या बंगाल भी जम्मू कश्मीर के ही नक्शे कदम पर आगे बढ़ रहा है ?

रिपोर्ट: प्रशांत शुक्ला

आज जो हालात पश्चिम बंगाल में देखने को आ रहा है, वह निश्चित तौर पर निंदनीय है। हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनावों के परिणाम ने जैसे ममता बैनर्जी की नींद ही उड़ा दी है क्योंकि ममता बनर्जी ने बंगाल में सरकार तो बना ली परंतु वो खुद अपनी ही सीट हार गई और ये हार ममता जी के गले नही उतर रही है। खैर, भारतीय जनता पार्टी को बंगाल चुनाव में, बंगाल की जनता का भरपूर सहयोग मिला जिसकी बदौलत भारतीय जनता पार्टी ने जो कि पिछले विधान सभा चुनावों में दहाई के आंकड़े के भी नीचे थी, अब वो बंगाल में दूसरे नम्बर की पार्टी है और एक मजबूत विपक्ष के तौर पर खड़ी है।

भारतीय जनता पार्टी ने ममता बैनर्जी को चुनावों की रैलियों में जमकर घेरा था। बीजेपी को प्रत्येक रैलियों में मिल रहा जनसमर्थन कबीले तारीफ था, जो कि ममता जी के गले नही उतर रहा था और शायद इसी का परिणाम अब उस मासूम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जिसने बीजेपी को समर्थन किया था। अगर बात की जाए बीजेपी के वोट शेयर की तो बंगाल में बीजेपी को 38% वोट मिला, जो कि यह दर्शाता है कि जनता के मन में बीजेपी के प्रति कितना विश्वास था। हालांकि बीजेपी ने चुनावों से पहले 200 सीटें आने का दावा किया था। अब यह समझा जाए की आखिर बीजेपी ने किस आधार पर 200 सीटों का दावा किया था। बंगाल में टीएमसी को 47% के लगभग वोट प्राप्त हुए। बीजेपी दूसरे नम्बर पर रही जिसे 37% वोट प्राप्त हुए। सीपीआई 4% के लगभग और कांग्रेस 2% के लगभग। अब आप खुद ही आंकड़ा लगाइए कि कांग्रेस और सीपीआई जिनका की बंगाल में अच्छा खासा बोलबाला है वो दोनो ही मुख्य पार्टियां मिलकर भी दहाई का अंक छोड़िए, मात्र 6% (2+4)के लगभग ही सिमट गई। यदि कांग्रेस और सीपीआई ने मिलकर 10 से 12 प्रतिशत का भी योगदान दिया होता तो बीजेपी बंगाल में सरकार बनाने में सक्षम होती। संभावता यही वो आंकड़े हैं, जो ममता बैनर्जी के दिन प्रतिदिन नींद हराम कर रहे हैं।

यदि हम सभी को अपना वोट स्वतंत्र मन से देने का अधिकार है, तो क्या बंगाल की जनता को नहीं है। आखिर क्यों बंगाल में हो रही हिंसा के लिए मीडिया अपनी आवाज नहीं उठा रही है। हमने बांग्लादेशी हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर आवाजें नही बुलंद की और वहां पर हिंदुओं की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। हमने पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे जुल्मों पर आवाजें नही उठाई, आखिर क्या ऐसी वजह है जो हिंदुओं पर अत्याचार होते जा रहें हैं और कोई मीडिया चैनल इस पर आवाजें नहीं उठा रहा। हमने जम्मू कश्मीर में हिंदुओं पर जुल्म देखे। इन सभी ही घटनाओं से हिंदुओं का मनोबल टूट रहा है और मजबूरन उनसे या तो धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है या फिर वो शरणार्थियों की तरह एक जगह से दूसरी जगह पर जाने को मजबूर हैं।

बंगाल में हिंदुओं के साथ ही रही हिंसा ना केवल निंदनीय है बल्कि असहनीय भी है। ना जाने कितने बंगाली हिंदुओं ने असम में पलायन किया है,स्थिति कमोबेश वैसी ही है जैसी कि 90 के दशक में जम्मू कश्मीर में थी। उस समय भी सत्ता की लालच में सराबोर सत्ताधारियों को लोकतंत्र की गरिमा का खयाल नही आया। कुछ मीडिया संस्थान और उनके संचालक तो इस कदर बाइक हुएं हैं कि उसका उल्लेख नहीं किया जा सकता। बंगाल की आग का धुआं विकराल है और कुछ मीडिया चैनल और उनके पत्रकार उस आग को, अपने ज्ञान के दम पर उस ओर लेकर जा रहें हैं जहां उपद्रवी गुट इंतजार कर रहा है कि चलो हमारे समर्थन में वक्तव्य तो आ गए। मार काट करते हुए उन्हें सिर्फ उसी का ज्ञान होता है बाकी कुछ चुनिंदा उच्च दर्जे पे कार्यरत लोग उनके समर्थन में बैठे ही हुएं हैं

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