क्या सिर्फ उत्तर प्रदेश और बंगाल चुनाव ही कोरोना के लिए जिम्मेदार ?

रिपोर्ट: प्रशांत शुक्ला

आज कल कुछ मीडिया संस्थान इस बात की ओर जनता का ध्यान आकर्षित कर रहें हैं कि, उत्तर प्रदेश के ग्राम पंचायत और बंगाल के विधान सभा के चुनावों के फलस्वरूप ही कोरोना ज्यादा फैला और यदि ये चुनाव स्थगित कराए गए होते तो स्थितियां इतनी भयावह नही होती जितनी की असल में हुई हैं। इस बात का कुछ हद तक निसंदेह समर्थन किया जा सकता है,परंतु यह समझना भी ज्यादा जरूरी है कि जो मीडिया संस्थान उत्तरप्रदेश और बंगाल के चुनोवों पर ही ज्यादा जोर देकर ऐसा कह रहे हैं,क्या वो इस माध्यम से सिर्फ केंद्र सरकार को ही इसका जिम्मेदार ठहराना चाह रहे हैं? या फिर कहीं ऐसे मीडिया संस्थान किसी विशेष राजनीतिक पार्टी से प्रभावित होकर तो ऐसा नहीं के रहें हैं?

इसमें तनिक मात्र भी संदेह नहीं होना चाहिए कि, उत्तर प्रदेश और बंगाल के चुनावों के कारण कोरोना के मामलों में इजाफा हुआ है और ना केवल केंद्र सरकार अपितु चुनाव आयोग भी इसमें जिम्मेदार है। अब क्या बाकी राज्यों में शासित सरकारें निर्दोष हैं , उनकी अपने राज्यों में घटित होने वाली किसी भी स्थिति से कोई सरोकार नहीं है। यदि आज की स्थिति की बात की जाए तो, महाराष्ट्र( 56 लाख) कर्नाटक( 24 लाख) केरल (23 लाख) तमिलनाडु (18 लाख) उत्तर प्रदेश (16 लाख) आंध्र प्रदेश (15.80 लाख) दिल्ली (14.20 लाख) बंगाल (12.70 लाख) ….आदि। यह उन राज्यों के अब तक के कोरोना संक्रमितों के आंकड़े हैं जिनकी संख्या 10 लाख से पार है।

क्या हमारे देश के समस्त नागरिक भारत के नही हैं! क्या राज्यों में रहने वाले प्रत्येक नागरिकों की रक्षा करना, उन राज्यों के मुख्य मंत्रियों की जिम्मेदारी नहीं है! किसी भी विषम परिस्थिति में केंद्र सरकारों को उसका दोषारोपण करना बिल्कुल ही गलत है।

कोरोना से हमारे देश के बहुत से बहुत से परिवारों ने अपनो को खोया है,जिस दर्द को शब्दों में भी नही बताया जा सकता है। इसके इतर कुछ राजनीतिक गुट अपनी सियासत चमकाने में लगे हुए हैं, और कुछ मीडिया चैनल उनकी इस घटिया हरकत में उनका पूरा साथ भी दे रहें हैं। बात कर ली जाए दिल्ली की, क्युकी दिल्ली में आप आदमी पार्टी ने इस बार और पिछली बार, दोनो ही विधान सभा के चुनावों में इतिहास रचकर सत्ता अपनाई। दिल्ली के लोगो ने अरविंद केजरीवाल पर अपना भरपूर विश्वास दिखाया , परंतु राजनीति से इतर यदि बात की जाए उनके दिल्ली के संबंध में विकास प्रयासों की तो क्या वो इसीलिए सत्ता पे आसीन हुए थे कि जो भी रुपए दिल्ली के विकास के लिए आए वो दिल्ली वालों को बराबर मात्रा में बांट दिए जाए, और जो लोग अपना विकास करना चाहते हैं वो खुद ही कर लें। यदि कुछ अस्पताल बनवा दिए होते तो आज ये पैसा उन्ही दिल्ली वासियों के ही काम आते।

हम भारत के लोग आखिर यह क्यों भूल जाते हैं कि हमें स्वयं ही जागरूक रहने की आवश्यकता है। इन नेताओं को जिनको हम वोट देते हैं ,क्या सिर्फ इसलिए की कल को देश पर कोई मुसीबत आए और देशवासियों की रक्षा करनी पड़े तो ये नेता एक दूसरे नेताओं पर आरोप मढ़ने लगें,और हम अलग अलग न्यूज चैनलों पर बैठकर, इन्ही नेताओं द्वारा प्रभावित पत्रकारों के मुंह से अपने ही देशवासियों के दुखों का तमाशा देखते रहें। देशवासियों से मिलकर देश बनता है न कि देश से देशवासी। हमें अपने हितों का संग्रक्षण खुद करना है। हम विकास करेंगे तो हमारा देश स्वाभाविक ही विकास करेगा।

मुफ्त के राजनीतिखोरों से दूर रहें। किसी का एहसान न लें क्योंकि कल जब आपको जरूरत पड़ेगी तब आप उनसे अपनी जरूरतों के लिए भी आवाज नही उठा पाओगे ,क्युकी मुफ्त में देकर तो पहले ही उन्होंने आपकी आवाजें बंद कर दी हैं। अपनी राजनीति चमकाने के लिए कुछ राजनीतिज्ञ मुफ्त में तो कुछ इस कदर बांट रहें हैं मानो “टेस्ला”या ” “माइक्रोसॉफ्ट” जैसी किसी कंपनी के मालिक बनने की उपलब्धि हासिल कर ली हो।

इस महामारी में हमारे देश के जितने भी लोगों को उनकी जानें गंवानी पड़ी हैं ,उनका जिम्मेदार प्रत्येक राजनेता है , फिर वो चाहे किसी भी राज्य से संबंधित हो। इन सभी राजनेताओं को व्यक्तिगत रूप से आगे आकर इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

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