क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि ? जानिए इससे जुड़ी पूरी कहानी

Report: National Khabar

शिवरात्रि तो हर महीने में आती है लेकिन महाशिवरात्रि पूरे वर्ष में सिर्फ एक बार आती है। इसे फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि का बड़ा महत्व इसलिए है क्योंकि यह शिव और शक्ति की मिलन की रात है। आध्यात्मिक रूप से देखें तो इसे प्रकृति और पुरुष के मिलन की रात के रूप में भी बताया जाता है।
शिवभक्त इस दिन व्रत रखकर अपने आराध्य शिव का आशीर्वाद पाते हैं। मंदिरों में जलाभिषेक का कार्यक्रम दिन भर चलता है। लेकिन क्या आपको पता है कि महाशिवरात्रि को क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे की घटना आखिर क्या है।


पौराणिक कथाओं की मानें तो, महाशिवरात्रि के दिन आराध्य शिव पहली बार प्रकट हुए थे। शिव का यह रुप प्राकट्य ज्योतिर्लिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में था। ऐसा शिवलिंग जिसका ना तो कोई आदि था और न कोई अंत।


कहा ये भी जाता है कि शिवलिंग का पता लगाने के लिए ब्रह्माजी हंस के रूप में आकर शिवलिंग के सबसे ऊपरी वाले भाग को देखने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
ये भी बताया जाता है कि शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग तक पहुंच ही नहीं सके। दूसरी ओर भगवान विष्णु भी वराह का रूप धारण कर शिवलिंग का आधार ढूंढ रहे थे लेकिन वो भी विफल रहे।
महाशिवरात्रि की पूरी रात शिवभक्त अपने आराध्य का जागरण करते हैं। शिवभक्त इस दिन शिवजी की शादी का उत्सव भी मनाते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही शिवजी के साथ शक्ति का विवाह हुआ था। इसी दिन शिवजी ने वैराग्य का जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर लिया था।
शिव जो वैरागी थे, वह फिर गृहस्थ बन गए। माना जाता है कि शिवरात्रि के 15 दिन बाद होली का त्योहार मनाने के पीछे एक कारण ये भी है।

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