जटिल लेकिन सुरक्षित है ब्रेन सर्जरी …. डॉ. राहुल गुप्ता ने बताई खास बातें

रिपोर्ट- भारती बघेल

ब्रेन सर्जरी के बारे में सोचकर ही हम डर जाते हैं…ब्रेन सर्जरी आमतौर पर सर की चोट, ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन हेमरेज के लिए जाती है…बीमारी की शीघ्र जांच और उपचार के लिए इस तरह की सर्जरी एमआरआई , न्यूरो कैथलैब, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और न्यूरो आईसीयू जैसी सुविधाओं से अच्छी तरह से लैस अस्पताल में ही की जानी चाहिए…आधुनिक गैजेट्स, सर्जरी की नई तकनीकों और मल्टी डिसीप्लिनरी टीम वर्क होने से ऐसे मामलों में जल्द रिकवरी सुनिश्चित होती है…

—एमआरआई और इसके नए प्रोटोकॉल
मस्तिष्क संबंधी अधिकांश बीमारियों के लिए यह सबसे अधिक जानकारीपूर्ण और सुरक्षित जांच है…नए प्रोटोकॉल सूचना की गति और गुणवत्ता को बढ़ाते हैं और इसलिए शीघ्र निदान संभव हो पाता है…

—न्यूरो नेविगेशन
यह चोट या छति का एक कंप्यूटर आधारित इंट्रा ऑपरेटिव लोकलाइजेशन है जो मस्तिष्क की सर्जरी के दौरान सटीकता और सुरक्षा को बढ़ाता है…कार्यात्मक रुप से सक्रिय क्षेत्रों में ऑपरेशन करते समय यह बहुत सहायक होता है…यह मिनीमली इनवैसिव ब्रेन सर्जरी करने में भी मदद करता है….

—फ्लोरेसेंस
इस अनूठी तकनीक का इस्तेमाल ब्रेन सर्जरी में लगभग एक दशक से किया जा रहा है…और यह भारत में चुनिंदा केंद्रों पर ही उपलब्ध है…यह सर्जन को सर्जरी के दौरान ब्रेन ट्यूमर का पता लगाने और सुरक्षित तरीके से उसे पूरा निकालने में सक्षम बनाता है…फ्लोरोसेंट डाई को ट्यूमर कोशिकाओं द्वारा ही ग्रहण किया जाता है…और इसे एक विशेष ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप के माध्यम से देखा जाता है…फ्लोरोसेंस वैस्कुलर न्यूरोसर्जन को एन्यूरिज्म या अन्य वैस्कुलर विकृतियों को ऑपरेशन करते समय इंट्रा ऑपरेटिव एंजियोग्राफी करने में सक्षम बनाता है…इससे ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन हेमरेज के मरीजों के परिणामों में काफी बदलाव आया है….

—अवैध क्रैनियोटॉमी
एल्लोक्वन्ट क्षेत्रों में या उसके पास स्थित कुछ ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए विशेष सर्जिकल कौशल की आवश्यक्ता होती है…यह रोगी के सचेत अवस्था में किया जाता है…और उसी दौरान रोगी को गाने, ताली बजाने आदि जैसे काम करने को कहा जाता है…न्यूरो- एनेस्थेटिस्ट रोगी को दर्द और एंग्जाइटीसे मुक्त रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है…

—इंट्रा ऑपरेटिव ब्रेन मैपिंग
मस्तिष्क की सतह पर विभिन्न कार्यात्मक क्षेत्रों के बारे में मार्गदर्शन करते हैं जो मस्तिष्क के अंदर प्रवेश करने के लिए ट्रैजेक्टरी की योजना बनाने और विशेष रुप से मिर्गी की सर्जरी में घाव को सुरक्षित रुप से हटाने में मदद करते हैं….

—इंट्रा ऑपरेटिव इमेजिंग
ब्रेन ट्यूमर के कुछ मामलों में सर्जरी के दौरान रीयल टाइम ब्रेन इमेजिंग मददगार साबित हो सकता है…जो अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एमआरआई की मदद से किया जा सकता है…

—एंजियोग्राफी
ब्रेन हेमरेज के मामले में मस्तिष्क के वैस्कुलर विकृति को देखने के लिए प्री-ऑपरेटिव डीएसए किया जाता है…घाव को देखने और पूरी तरह से निकालने के लिए एडवांस सी- आर्म मशीन के साथ इंट्रा- ऑपरेटिव डीएसए किया जा सकता है…डीएसए ब्रेन ट्यूमर की वैस्कुलैरिटी की जांच करने में मदद करता है…और ऑपरेशन के दौरान होने वाले रक्त के नुकसान के कम करने के लिए प्री- ऑपरेटिव एमंबोलिजेशन किया जा सकता है…

—योग्य न्यूरो
एनेस्थीसिया टीम द्वारा सुरक्षित एनेस्थीसिया देना और ब्रेन सर्जरी के बाद अच्छे परिणाम के लिए न्यूरो- आईसीयू में पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल अनिवार्य है….तकनीकी प्रगति के साथ पिछले दशक में ब्रेन सर्जरी के परिणाम में काफी सुधार हुआ है…किसी भी देरी को रोकने के लिए एक तुरंत निर्णय लेना अनिवार्य है….

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