डायबिटीज टाइप- 1 से मुक्ति कैसे पाएं?

रिपोर्ट- भारती बघेल

नमस्कार…आज हम बात करेंगे कि डायबिटीज टाइप- 1 से मुक्ति कैसे पाएं…और इस पर विस्तार से चर्चा करने के लिए हम पहुंचे डॉ. बिस्वरुप रॉय चौधरी के पास…और उनसे सभी सवालों के जवाब लिए…तो क्या इलाज बताया उन्होंने चलिए हम आपको बताते हैं…

—तो पहला सवाल ही ये आता है कि डायबिटीज टाइप- 1 क्या है?
इस पर डॉ. बीआरसी ने जवाब देते हुए कहा कि डायबिटीज टाइप -1, डायबिटीज टाइप-2 से अलग है…टाइप-2 मतलब अगर किसी की शुगर ज्यादा हो गई और लंबे समय तक ज्यादा बनी रहे तो ये हुआ डायबिटीज टाइप-2

वहीं ये समस्या अगर छोटे बच्चों में हो जो 18 साल से कम के हैं और दवा लेने से भी उनका शुगर कंट्रोल में नहीं आ रहा है तो उसे हम बोल देंगे डायबिटीज टाइप- 1…

टाइप-1 को ऑटो इम्युन डिसीज बोला जाता है…यानी हमारी जो इम्युनिटी है वो ऑटोमेटिकिली हमारे अच्छे सैल्स को ही अपना दुश्मन मानकर उस पर अटैक करती है…

—अब सवाल आता है कि ये बीमारी क्यों होती है?
इसकी वजह समझाते हुए डॉ. बीआरसी ने कहा कि आपने कुछ ऐसी चीज खाई ..खासतौर पर एनिमल प्रोटीन अगर बच्चे लेते हैं जैसे अंडा हुआ …मीट हुआ..और डेरी प्रोडक्ट…ये सारी चीजें मिलकर ऑटो इम्युन रिएक्शन ट्रिगर करती हैं…जिससे हमारे पेनक्रेस के बीटा सैल मर सकते हैं या मर जाते हैं…तो एक तो ये है रीजन…

दूसरा रीजन है पैक्ड एंड रिफाइंड फूड…जैसे बिस्किट है नमकीन है आदि…तो ऐसी चीजों से भी ऑटो इम्युन रिएक्शन ट्रिगर हो सकता है…

—अब आखिरी सवाल आता है कि इसका इलाज क्या है?
पहली बात तो आप ये जान लीजिए कि सोल्युशन प्रिवेंशन से आता है…तो जो भी छोटे बच्चे हैं उन्हें डेरी प्रोडक्ट नहीं देना है..डेरी प्रोडक्ट आप जानते ही होंगे..दूध, दही, मख्खन, पनीर, छाछ आदि…

दूसरा एनीमल प्रोडक्ट है जैसे मीट, अंडा..आदि नहीं देना है…

और तीसरा अपने बच्चों को धूप दिखाइए…

वहीं डीआईपी डाइट आपको पता ही है…उसमें दो चीज एड कर लीजिए…
नंबर-1 सुबह ब्रेकफस्ट से पहले आप दो तीन तरह की वेजिटेबल खा लीजिए…
नंबर-2 आप लंच और डिनर से पहले आपको पत्ते खाने हैं पत्ते मतलब…मूली के पत्ते…पान के पत्ते, तुलसी के पत्ते, धनिया के पत्ते, पुदीने के पत्ते, पालक के पत्ते तीन चार के पत्ते ले लिए और अपने वेट के अनुसार …मान लो कोई 30 किलोग्राम का बच्चा है तो 30 ग्राम पत्ते उसको देने हैं…और ऐसे ही डिनर से पहले भी उसे तीन चार तरह के पत्ते देना है जिसे चबा चबाकर खाना है…

इसमें एक बात जो आपको ध्यान रखनी है वो ये है कि आपको प्लेट-2 सिर्फ डिनर में ही लेनी है बाकी लंच में सलाद और पत्ते ही देने हैं…इसके अलावा बच्चों को करीब एक घंटे धूप में भी खेलने दें…धूप में खेलने का फायदा ये होता है कि जब बच्चा धूप में खेलता है…एक्सरसाइज करता है तो ये प्रक्रिया भी इंसुलिन बनाने में हेल्प करती है…

तो जैसे ही बच्चा ये करेगा तो याद रखिए जो इंसुलिन ले रहे हैं उन्हें इंसुलिन की मात्रा उसी दिन 50 प्रतिशत कम करनी पड़ेगी….नहीं तो हाइपोग्लाइसीमिया हो जाएगा…क्योंकि बॉडी भी इंसुलिन बना रही है और आप भी ऊपर से दे रहे हो…इसलिए बहुत ही चौकन्ना होकर इंसुलिन देनी है…और अगर बच्चा इस डाइट में निरंतर रहता है तो करीब 3 से 5 महीने के भीतर ही इंसुलिन डिपेंडेंसी कम हो जाएगी…और आखिर में वो पूरी तरह ठीक हो जाएंगे….

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