दोनों डोज लेने के बाद भी लोग क्यों हो रहे हैं कोरोना संक्रमित? कितना खतरनाक है ‘डेल्टा’ वेरिएंट

रिपोर्ट- भारती बघेल

कोरोना की दोनों डोज लेने के बाद भी कई लोग कोरोना से संक्रमित हो गए ऐसा क्यों हो रहा है इसी सवाल का जवाब दिल्ली में एम्स की एक स्टडी में सामने आया है…स्टडी के मुताबिक इसकी वजह है कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिंएंट जो बेहद खतरनाक है..

दूसरी लहर का जिम्मेदार है डेल्टा वेरिएंट?
कोरोना की दूसरी लहर में कहर मचाने वाले कोरोना के किलर वेरिएंट की पहचान हो चुकी है जिसका नाम है डेल्टा यानी B1.617.2….जितनी इसके नाम में गहराई है उतना ही गहरा असर करता है…दोनों डोज लेने के बावजूद भी लोग संक्रमित हो रहे थे..जब दिल्ली के एम्स अस्पताल ने वजह तलाशने की कोशिश की तो पता चला इसके पीछे की वजह है खतरनाक वेरिएंट डेल्टा…कोविशल्ड और कोवैक्सीन के असर को डेल्टा वेरिएंट कम करके संक्रमित करने में सक्षम है…वैक्सीन की दोनों डोज लेने वाले 60 प्रतिशत लोगों में और जबकि एक डोज लेने वाले 77 फीसदी लोगों को कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट ने संक्रमित किया था…

एम्स ने क्या कहा?
एम्स की स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी मरीजों में वायरस लोड काफी ज्यादा था..चाहें वो दोनों डाज ले चुके हों या फिर एक डोज लेने वाले हो..कोविशिल्ड और कोवैक्सीन लेने वाले दोनोें ही तरह के मरीजों में वायरल लोड का स्तर काफी ज्यादा था..वैज्ञानिकों के अनुसार डेल्टा वेरिएंट की वजह से ही दूसरी लहर में रोज 3-3 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए…

दक्षिण भारत से अभी भी सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे हैं..और आपको जानकर ये हैरानी होगी कि इसमें भी डेल्टा वेरिएंट का हाथ है..कर्नाटक सरकार का दावा है कि राज्य में 93 फीसदी कोरोना केस डेल्टा वेरिएंट से जुड़े हुए हैं..ऐसा नहीं है कि

डेल्टा वेरिएंट से तेजी से पसारे पैर
डेल्टा वेरिएंट ने सिर्फ भारत में ही कहर मचाया है बल्कि ये वेरिएंट दुनिया के करीब 53 देशों में मिल चुका है यहां तक कि अमेरिका में भी ये वेरिएंट चिंता का सबब बना हुआ है…8 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति के ट्वीट में इसकी झलक मिलती है…जिसमें उन्होंनें ब्रिटेन के डेल्टा वेरिएंट के संक्रमण से देश को आगाह किया है…साथ ही अमेरिकी नागरिकों को वैक्सीन लगवाने की नसीहत दी है..ब्रिटेन में तीसरी लहर के दौरान इसी वेरिएंट की वजह से उठाल आया है..18 से 20 वर्ष के लोग इसके चलते बहुत तेजी से संक्रमित हो रहे हैं…जिसकी वजह से ब्रिटेन ने तो 21 जून से लॉकडाउन खत्म करने के फैसले को भी टालने का मन बना लिया है…

ये डेल्टा वेरिएंट का ही असर है जो दुनिया में दूसरी और तीसरी लहर के लिए जिम्मेदार है..क्योंकि ये वेरिएंट अपने से पहले मिले अल्फा वेरिएंट से 50 फीसदी ज्यादा संक्रामक है..डेल्टा वेरिएंट का पहली बार पता भारत में अक्टूबर 2020 में लगा था..इस वेरिएंट को WHO ने बेहद घातक मानते हुए वेरिएंट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा है…

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