धर्म क्या है?

रिपोर्ट भारती बघेल

धर्म न अफीम है..न चरस है…न भांग है…न दारु…धर्म न मंदिर है न मस्जिद…न गुरुद्वारा न गिरिजाघर…धर्म न गीता है न कुरान…न ग्रंथ साहब न बाइबल…धर्म न धूप है न अगरबत्ती…धर्म न हरिद्वार है न मक्का….न रोम न अमृतसर…धर्म न सुन्नत है न जनेऊ…धर्म न दंडवत है न हज..न गंगा में डुबकी…कहते हैं धर्म सत्य है..धर्म ईमान है…धर्म प्रेम है..धर्म बंधुत्व है..धर्म का अर्थ मंदिर या मस्जिद से नहीं है..धर्म का अर्थ कर्तव्य से है…यदि हर व्यक्ति अपने धर्म का पालन नहीं करेगा तो पूरे समाज का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा…

बाप का बेटे के साथ क्या धर्म है..बेटे का बाप के साथ क्या धर्म है..मां का बेटे के साथ क्या धर्म है..बेटे का मां के साथ क्या धर्म है..पति का पत्नी के साथ क्या धर्म है..पत्नी का पति के साथ क्या धर्म है..भाई का भाई से…भाई का बहन से…बहन का भाई से …सास का बहु से…बहु का सास से …नौकर का मालिक के साथ…मालिक का नौकर के साथ क्या धर्म है..शिक्षक का शिष्यों के साथ क्या धर्म है और शिष्यों का शिक्षक के साथ क्या धर्म है..पुलिस का जनता के साथ …जनता का पुलिस के साथ ..अपने देश के साथ क्या धर्म है…

अपने समाज के साथ क्या धर्म है..ब्राहमण का धर्म है अज्ञान का नाश करना…क्षत्रिय का धर्म है अन्याय का नाश करना..वैश्य का धर्म है अभाव का नाश करना…शुद्र का धर्म है सेवा करना…अगर हम अपने धर्म को जानकर काम करेंगे तो हम अच्छे लोकांतरों में जन्म लेकर सुख भोगेंगे…और अगर हम धर्म के विपरीत काम करेंगे तो दुख भोगेंगे…

धर्म और संप्रदाय अलग अलग चीज हैं..धर्म की बुनियाद प्रेम है, करुणा है, मैत्री है, अहिंसा है…धर्म मुक्त करता है..संप्रदाय बंधन में डालता है..धर्म दीवारें हटाता है..संप्रदाय दीवारें खड़ी करता है..यही कारण है कि आज मुसलमान तो हैं लेकिन मोहम्मद साहब का भाईचारा कहां है…क्रिश्चियन तो हैं लेकिन ईशा मसीह का प्रेम कहां…जैन तो हैं किंतु भगवान महावीर की अहिंसा और मैत्री कहां..बौध्द तो हैं पर भगवान बुध्द की करुणा कहां…सनातनी तो हैं पर भगवान राम की मर्यादा कहां…संप्रदाय के केवल लेवल लगे हैं जीवन में धर्म कहां है?

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