धर्म विशेष

!!श्रीगंगादशहारा संक्षेप महात्म्य्!!
20 जून श्रीगंगादशहारा उत्सव हैं
गंग सकल मुद मंगल मूला।
सब सुख करनी हरणि सब सूला।।
उद्देश्य:-गंगा मैंईया की भक्ति और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन स्वच्छता जागरुकता हेतू
गंगा मैंईया सभी भक्तों के सुख का महानतम कारण है और भक्तों के सभी संसारिक त्रयताप को हरण करती हैं।
स्कंदमहापुराण-श्लोक:-
ज्येष्ठे मासे सिते पक्षे दशाम्यां बुद्ध हस्तयोः।
दशहरा जायते व्यास गंगा जन्म परं शुचि।।
अर्थात्-भगवान वेदव्यास ने कहा ज्येष्ठ मास के शुल्क पक्ष दशमी तिथि बुधवार को हस्तनक्षत्र में भगवती गंगा स्वयं को विश्वकल्याण के लिऐ प्रकट कर हम सभी को अनुग्रहित किऐ।
इस दिन गंगा मैंईया के जल तरंग में स्नान,ध्यान,पुजा,सेवा महाआरती अगर कोई प्रायश्चित(आज के बाद दोबारा नहीं करेंगे) भाव में करें तो वो और उसके पूर्वज के साथ आने वाला पीढ़ि भी तरता हैं,
आईऐ जाने उस पाप को जिससे हम सभी को बचना चाहिऐ, तीन प्रकार के पाप हम आप से इस तरह होता हैं इसके बचने का प्रयास करना चाहिऐ दैंहिक,मानसिक,वाचिक
यह दैहिक पाप ये हैं:-
1-बिना दी हुई वस्तु लेना,
2-निषिद्ध हिंसा करना,
3-परस्त्री समगम करना!,
यह दैहिक वाणी(वाचिक) ये हैं:-
1-कठोर वचन मुँह से निकालना,-
2झूठ बोलना,
3-सब ओर चुंगली करना,
4-अंट-संट बातें करना करना!,
यह मानसिक पाप हैं:-
1-दूसरे के धन को लेने का विचार करना,
2-मन से दूसरे का बुरा सोचना,-
3-असत्य वस्तु में आग्रह रखना!
भुक्ति-मुक्ति-दायिनी गंगा मैंईया के जल तरंग प्रकट दिवस में यह 10 प्रकार के पाप को नष्ट करने की शक्ति हैं अगर कोई प्रायश्चित स्थिति में स्नान करें तो उसका यह पाप सदा के लिऐ नष्ट हो जाऐगा,,अगर कोई गंगा मैंईया के जल तरंग में आकर स्नान नहीं कर पा रहा हो तो वो वहीं अपने(घर) स्थान पर #”गंगा गंगा गंगा#” उच्चारण कर स्नान,ध्यान, स्मरण करें तो उतना ही स्नान का फल प्राप्त कर सकता हैं, गंगादशहारा के दिन दस बार गंगा मैंईया के जल तरंग में स्नान कर, माँ भगवती त्रिगुणात्मक शक्ति भुक्ति मुक्ति दायिनी गंगा मैंईया का जल तरंग में इस प्रकार स्वरुप ध्यान करें:-श्रीगंङ्गादेवी के चार भुजाएँ और सुंदर नेत्र हैं। उनके श्रीअङ्गों से दस हजार चन्द्रमाओं के समान उज्जवल चाँदनी-सी छिटकी रहती है।दासियाँ उन्हें चवँर डुलाती हैं।मस्तक पर तना हुआ श्वेत छत्र उनकी शोभा बढा़ता।वे अत्यन्त प्रसन्न और वरदायिनी हैं। करुणा से वसुधारा पर सुधा धारा सख्ती हैं।देवता आदि सदा उनकी स्तुति करते हैं। वे दिव्य रत्नों के आभूषण,दिव्य हार और दिव्य अनुलेपन से विभूषित हैं,महाशय, इस प्रकार ध्यान करने के बाद
दस प्रकार के फल,10 नारीयल,मिष्ठान आदि,दस पान-सुपाडी़,जौं के सत्तू में गुड़(पितरों के निमित्त)मिलाकर गंगा मैंईया के जल तरंग में डालना चाहिऐ जो भी पूजन सामाग्री गंगा मैंईया की सेवा में लाए उन सभी का उपयोग करते समय ऊँ नमो दशहरायै नारायण्यै गंङ्गायै नमः। इसी मंत्र का उच्चारण करते हुए सभी पूजन (सभी अलग अलग 10 प्रकार के) सामग्री से सेवा,पूजा,भोग,आरती कर अपने सभी संसारिक सुख समृद्धि एवं पितरों का उद्धार तथा सकल परिवार के सुंदर सुखमय वमंगलमय जीवन की शुभेच्छा के लिऐ प्रार्थना कर गंगा मैंईया का जल तरंग दर्शन और स्पर्श करते हुए निवेदन करें।
(विशेष ध्यान के साथ ये अवश्य करें, गंगा मैंईया के जल तरंग में या तट पर जो पुष्प,तुलसी,दुर्वा,बेलपत्र इत्यादि से पुजा करेंगे वो पूजा के बाद गंगा मैंईया का जल तरंग उपर छिड़क कर घर लेते आईऐगा और जहाँ आप धन रखते हैं उसी स्थान पर रख दीजिऐगा,!इससे समृद्धि वृद्धि होती है,तील,अक्षत,जौ का सत्तू और गुड़ मिठाई गंगा मैंईया के जल तरंग में रहने वाले सेवक ग्रहण कर लेते हैं,जो भी फल अर्पित करिऐगा वो जल से स्पर्श कराकर प्रसाद बांट कर स्वयं भी ग्रहण करिऐ, पान और सुपाड़ी पूजन के बाद उपर गंगा मैंईया का जल तरंग छिड़क कर किसी ब्राह्मण को दे दीजिऐगा, स्वच्छता भी हो गया और सभी उचित स्थान पर सुलभता के पहुँच जाऐगा और आप गंगा मैंईया के कृपा पात्र सपरिवार बने रहेंगे)
इसके साथ इस विषय पर अवश्य ध्यान दीजिऐगा।
लेकिन इस बात पर जरुर ध्यान होगा आपके कहीं ये पाप आपसे ना हो जाऐं,पितामह श्री ब्रह्माजी ने कहा श्रीनारद जी से श्रीनारदमहापुराण के अंतर्गत
कहा-श्लोक:-
मलं,मूत्रं,पूलिष्म च विषठ्म् तथा।
गण्डु मत्सु मुचञन्ति ये ते ब्रह्मण्भि समाः।
अर्थात=गंगा मैंईया के जल तरंग में जो कोई मल,मूत्र,कफ,विष्ठा,कुल्ला,छोड़ता हैं,उसे ब्रह्म हत्या का पाप लगता हैं,,इसीलिए भक्ति सेवा में समर्पण,स्वच्छता सदा मंगलकारी होता हैं,
और मन से इस दिन धर्म कि वृद्धि के निमित्त धन,धान्य,भोजन,साधन जो भी भगवत कृपा धर्म से प्राप्त किया हैं उसका दान करना चाहिऐ जो अक्षयदान के तरह ही माना गया हैं,, गंगा मैंईया भुक्ति मुक्ति दायिनी जल तरंग संग त्रिगुणात्मक शक्ति लेकर तीनों लोक का निःस्वार्थ कल्याण करती हैं,
20 जून को बिहार के भागलपुर बरारी सीढ़ि घाट पर भक्तिमय मंगलमय आनंदमय महामंगलकारिणी त्रिपथगामिणी मोक्षदायिनी सकल मनोरथ सिद्धि दायिनी जल तरंग संग श्रीगंगामहाआरती दर्शन करने अपने परिवार मित्र बंधू के साथ अवश्य आऐ,
आयोजन कर्ता-एवं निवेदक:-पेक ग्लोबल और बालाजी एग्रो आॅर्गेनिक्स एण्ड फर्टिलाईजर्स प्रा०लि० मेघनगर इंदौर मध्य-प्रदेश।
आयोजन स्थल:-बिहार भागलपुर बरारी सीढ़ि घाट,
समय:-संध्या 6 से 6:30 बजे तक।
व्यवस्थापक:- गंगाऋषिकृषि कार्यशाला के सभी सदस्य
श्रीगुरुहरिमाँशक्ति चरणकम्लेभ्योः नमः*
हरिहरगंगे नमः शिवाय्
भक्त भक्ति भगवंत गुरु चतुर वपु एक।
इनके पद वंदन किए नाशे विघ्न क्लेश।
!!श्रीराम जयराम जयजयराम!!
!!सबको जय गंगा मैंईया!!

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