पतित पावनी, मोक्षदायिनी, अविरल मां गंगा

संत जटाशंकर मिश्रा, माँ गंगा जी के सेवक

नेशनल खबर की रिपोर्ट

भगवती और भगवान में अनेकों शुभ गुण लक्षण हैं उसमें 6 प्रत्यक्ष दर्शन ऐसे होते और 7वां प्रत्यक्ष रूप में दर्शिता
“सम्पूर्ण ऐश्वर्य,सम्पूर्ण धर्म,सम्पूर्ण यश,सम्पूर्ण श्री(लक्ष्मी),सम्पूर्ण ज्ञान,सम्पूर्ण वैराग्य। यह लक्षण भगवती भगवान के सदा प्रत्यक्ष होते हैं और 7वां मोक्ष(निर्वाण)पद(जिसें हम आप मुक्ति कहते हैं) देने की कला,जिनमें में य 7 लक्षण प्रत्यक्ष देखा जाता हैं वहीं परब्रह्म परमेश्वर व परमेश्वरी हैं,भगवान शिव ने कहा हैं भगवती गंगा साक्षात् धर्मस्वरुपिणी,करुणामयी,आनंददायिनी श्रीब्रह्मा,श्रीविष्णु,एवं मेरा ही रुप हैं,जो केवल पूजा,श्रीगंगामहाआरती सेवा से अनंत सुख स्वर्ग में दिलाकर पुनः वैंकुण्ठ वास देती हैं,
हम प्रत्यक्ष रुम में यह सभी लक्षण आदि शक्ति परब्रह्म परमेश्वरी पराम्बा भगवती गंगा मैंईया के चरणों में भाव स्नेह समर्पित कर कल्याण के भागी बने रहेंगे
वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि को राजा भागीरथी जी के निवेदन पर पितामह श्रीब्रह्मा जी ने जल अपने कमण्डल से भगवान शिव के जटा में सस्नेह प्रवाहित किऐ थे,यद्यपि शास्त्रों में अनेकों स्थान पर गंगा मैंईया के जल तरंग की प्रकट स्थिति पर वर्णन हैं परन्तु यह विशेष मान्य जयन्ती को लेकर हैं,
अनेकों अनेक श्लोक,स्तोत्र गंगा मैंईया के लिए सभी स्नेही भक्त ने लिखा है,
गोस्वामी तुलसीदास जी ने बहुत सरल से परब्रह्म परमेश्वरी गंगा मैंईया के महात्म्य का दर्शाया
गंग सकल मुद मंगल मूला।
सब सुख करनी हरणि सब सूला।
और स्कंदपुराण से संक्षेप
“किं वाऽऽयुषाऽप्यरोगेण विकाससिन्याऽथ किंश्रिया।
किंवा बुद्धय्या निर्मलया यदि गंगां न सेवते।।”
स्कंदमहापुराण में भगवान विष्णु और भगवान शिव संवाद आज इस श्लोक को सत्य दर्शन करा रहीं हैं,

आई ऐ आज से प्रयास करते हैं,कि सबको कुडा़-कचरा फेंकने से मना करेंगे गंगा मैंईया के जल तरंग और घाट पर किसी भी प्रकार का कुड़ा-कचरा नहीं फेंकना है और सभी को जागरुक करना हैं,
कृतयुगे तू तीर्थानिः,त्रेयताम पुष्करं तीर्थं।
द्वापरे तू कुरुक्षेत्रोः कलोः गङ्गा विशिष्यतेः।।
सतयुग में अनेक तीर्थ,त्रेता में पुष्कर तीर्थ,द्वापर में कुरुक्षेत्र,कलिकाल में केवल गंगा ही विशेषरुप से श्रेष्ठ हैं,जो सभी मनोरथ को सिद्ध करने में सक्षम हैं,
श्रीगंगासहस्त्रनाम में 1000 नाम क्षमाये नमः। से यह प्रत्यक्ष दर्शन कर सकते हैं कि सभी पाप, ताप से हर सभी भक्तों को उसके अपराध के लिऐ क्षमा भी करने के लिऐ अग्रसर रहती हैं,
जय हो मंगल हो सभी का कल्याण हो,
श्रीराम जयराम जयजयराम।
जय गंगा मैंईया।
सबको जय गंगा मैंईया

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