पेट से जुड़ी समस्या होती है इरिटेबल बोवल सिंड्रोम/ संग्रहणी …जानिए इसका पक्का इलाज

रिपोर्ट- भारती बघेल

नमस्कार….आज हम इरिटेबल बोवल सिंड्रोम पर बात करेंगे जिसे हिंदी में ग्रहणी या संग्रहणी कहते हैं….अक्सर अगर आपका निरंतर पेट खराब रहता है…आपको खाना खाते ही अगर वॉसरुम जाना पड़ता हो…भूख कम लगती हो…हर वक्त थका थका महसूस करते हो तो आपको भी इरिटेबल बोवल सिंड्रोम की तकलीफ हो सकती है…जिसे कई बार हम लीवर की समस्या समझ कर बाजार से तमाम तरह की सीरप लेकर पी लेते हैं….लेकिन ये इसका इलाज नहीं है…इस पर विस्तार से चर्चा करने के लिए हम डॉ. बिस्वरुप रॉय चौधरी जी के पास पहुंचे…और उनसे इस परेशानी के बारे में विस्तार से जाना…क्या कहा डॉ. बिस्वरुप रॉय चौधरी ने चलिए हम आपको बताते हैं….

—तो अब पहला सवाल यही आता है कि ये इरिटेबल बोवल सिंड्रोम या संग्रहणी क्या है और क्यों होती है?
इस पर डॉ बी.आर.सी. ने जवाब देते हुए कहा कि जैसे कि इसके नाम से ही पता चल रहा है इरिटेबल बोवल सिंड्रोम…यानी कि कुछ भी आप खाते हैं वो हजम नहीं होता है…हमेशा एक डिसकंफर्ट रहता है…अगर सीधी भाषा में समझे तो बॉडी जो भी न्यूट्रीशियन ले रही है उसे अब्जॉर्व नहीं कर पा रही है…बल्कि स्टूल के रुप में बाहर निकाल रही है….यानी कि पूरा न्यूट्रीशियन आप ले तो रहे हैं लेकिन बॉडी में न जाकर वो वेस्ट हो जा रहा है….एक बात आप यहां पर समझिए कि अगर आपकी बॉडी को न्यूट्रीशियन नहीं मिल पाएगा तो ज़ाहिर सी बात है कि डिस्कंफर्ट आएंगे…और लगभग सारे ही डिस्कंफर्ट आएंगे…जैसे हार्मोन इनबैलेंस की प्रॉब्लम है…बॉडी ग्रोथ नहीं करेगी…पतले और कमजोर दिखेंगे…

अब बात करते हैं कि ये परेशानी क्यों होती है? दरअसल कुछ ऐसे फूड हैं जो इंसान की बॉडी में एलर्जी क्रिएट करते हैं…हरेक की बॉडी अलग अलग है हो सकता है कि एक व्यक्ति को जिस फूड आइटम से एलर्जी है, उस फूड से दूसरे व्यक्ति को एलर्जी न होती हो …इसलिए ये आपको पहचानना पड़ेगा कि आपकी बॉडी में किस फूड आइटम से एलर्जी होती है…उस फूड आइटम को आपको छोड़ना पड़ेगा…इस से जो नंबर वन पर एलर्जी क्रिएट करने वाले फूड माने जाते हैं वो होते हैं पैक्ड फूड और एनीमल प्रोडक्ट…

—-अब एक सवाल ये भी आता है कि ..बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्हें जब ये प्रॉब्लम होती है… खाना पचता नहीं है तो वो मेडिकल से लीवर की सीरप ले आते हैं…उन्हें लगता है कि लीवर खराब हो गया है…तो सवाल ये है कि ये बीमारी लीवर से कितनी अलग है?

इसका जवाब देते हुए डॉ. बीआर.सी. ने कहा कि लीवर कभी किसी का खराब नहीं होता…लीवर की स्थिति बिल्कुल छिपकली की पूंछ की तरह होती है…कोई अगर उसकी पूंछ काट भी दे तो दोबारा पूंछ बन जाती है…वहीं हमारी बॉडी में लीवर ही एक ऐसा ऑर्गन है जो छिपकली की पूंछ की तरह है…तो लीवर से जुड़ी ये प्रॉब्लम नहीं है…ये प्रॉब्लम लाइफ स्टाइल और फूड से जुड़ी प्रॉब्लम है…फूड की वजह से धीरे धीरे आपकी बॉडी के सारे ऑर्गन कमजोर हो जाते हैं…और सबसे पहले लीवर पर पेट पर असर होगा तो वो भी कमजोर होंगे…तो लीवर कमजोर हो गया है इसलिए ये प्रॉब्लम नहीं है…ये प्रॉब्लम है इसलिए लीवर कमजोर है…इसलिए प्रॉब्लम पर काम करने की जरुरत है न कि लीवर पर…

—-अब सवाल आता है कि इसे कैसे पहचानें? क्या लक्षण हैं इसके?
इसके लक्षण हैं…जैसे खाना न पचना…खट्टी डकारें आना…शरीर में कमजोरी महसूस करना…बहुत जल्दी थक जाना…पेट में हल्का दर्द महसूस करना…मुंह से स्मैल आना…भूख न लगना, या कम लगना….वहीं इसके और भी लक्षण होते हैं वो डिपेंड करता है कि आपकी ये प्रॉब्लम कौन सी स्टेज पर चल रही है….एक बात का जरुर ध्यान रखिए कि ऐसा खाना मत खाइए जिसे डाइजेस्ट होने में टाइम लगे…कुछ लोगों में गेंहू और चावल खाने से एलर्जी हो जाती है…

अब आखिरी सवाल ये आता है कि इसका इलाज़ क्या है?
डॉ. बी.आर.सी. ने कहा कि इलाज वही है जो मैं हमेशा से बताता आया हूं, कि डी.आई.पी. डाइट पर रहो…जिसमें 12 बजे तक पेट भरकर फल खाओ…और लंच और डिनर में दो प्लेट रखो….एक प्लेट में कच्ची सब्जियों का सलाद और दूसरी प्लेट में जो भी आप खाना खाते हो वो…वहीं जिन चीजों का हमने मना किया है उन्हें छोड़ दो…डिनर के वक्त याद रखें कि डिनर आप सूर्यास्त तक खा लें क्योंकि तभी तक आपकी बॉडी में डाइजेस्ट करने की क्षमता होती हैं…उसके बाद आपका स्टमक सो जाता है… अगर कोई रात के 10 बजे खाना खाएगा या 12 बजे खाएगा तो ऐसा करने से आप स्टमक को उठा रहे हैं …उसे जगा रहे हैं…अब वो इरिटेट होगा…जैसे आप अगर नींद में हो और कोई आपको जगाएगा तो ज़ाहिर सी बात है कि आप इरिटेट होंगे…तो ठीक यहीं हालत इसके साथ होती है….

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