ब्रेन ट्यूमर (कारण,बचाव एवं उपचार)

Dr. Rahul Gupta, Sr. Neurosurgeon, Fortis Hospital, Noida
रिपोर्ट- भारती बघेल

ब्रेन ट्यूमर के बारे में सोचने मात्र से ही दिलो दिमाग में सिरहन आ जाती है…ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के अंदर या बाहर के उतकों का असामान्य विकास है..कुछ कारणों से मस्तिष्क की कोशिकाएं भी अनियंत्रित तरीके से बढ़ कर ट्यूमर का रुप ले लेती है…ये टुयूमर किसी भी उम्र में और महिला पुरुष दोनों को हो सकता है…

—ट्यूमर के प्रकार
मस्तिष्क के ट्यूमर बिनाइन या मेलिगेंट हो सकते हैं…

—बिनाइन ट्यूमर
धीरे- धीरे बढ़ता है और कभी भी शरीर के दूसरे भाग में नहीं फैलता है…लेकिन इसका आकार बढ़ाने से आसपास के उतकों एवं कोशिकाओं पर दवाब पड़ता है…जिससे मस्तिष्क के उस भाग का कामकाज प्रभावित होगा..कुछ बिनाइन ट्यूमर को पिलोसाइटिक एस्ट्रोसोइटोमा,मेनिंनगियोमास, पिटयूटरी एडेनोमा, कार्नयोफैरिंगोमा, एपिडरमॉयड सिस्ट्स, न्यूरोसाइटोमा, हेमैंगियोमा, न्यूरोफिब्रोमा आदि नाम से पुकारा जाता है…

—मेंलिंगनेंट ट्यूमर
ये ट्यूमर कई तरह के होते हैं जैसे हाई ग्रेड एस्ट्रोसाइटोमा या ग्लायोमा, एपेंडिमोमा, पीएनईटी, मेटुलेब्लास्टोमा, लिम्फोमा, जर्म सेल ट्यूमर, मेटास्टैसिस आदि…सही समय पर सही उपचार से इनमें से कई ट्यूमर को ठीक किया जा सकता है…

—ब्रेन ट्यूमर के आम लक्षण
ट्यूमर के बढ़ने या ट्यूमर के स्थान, आकार और प्रकार की वजह से मस्तिष्क पर दवाब के कारण निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकते हैं…
1–उल्टी के साथ सिर दर्द
2–चक्कर आना, मुर्छा, बेहोशी, मिर्गी
3–शरीर के अंगों में असामान्य सनसनाहट
4–लड़खड़ाहट के साथ चलना अथवा असंतुलन
5–धुंधला दिखना या दृष्टि में कमी, बोलने में कठिनाई

—हार्मोनल प्रभाव
1–व्यवहार में परिवर्तन
2–अंगों की कमजोरी
3–थकावट, भ्रम,एकाग्रता में कमी

—ब्रेन ट्यूमर की पहचान की विधियां
चिकित्सक सबसे पहले विस्तृत इतिहास का पता लगाते हैं और चिकित्सकीय जांच करते हैं…ब्रेन ट्यूमर होने का संदेह होने पर सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन, फंक्शनल एमआरआई एंजियोग्राम, सीएसएफ परीक्षण, हार्मोनल रक्त परीक्षण या ईईसी जांच की जाती है…ब्रेन ट्यूमर की सबसे अच्छी जांच कंट्रास्ट इनहैन्डस एमआरआई ब्रेन है…

—उपचार कैसे किया जाता है?
आरंभिक उपचार के तहत मरीज को मेडिसिन दी जाती है ताकि दौरे और बेहाशी को रोका जा सके तथा ट्यूमर के कारण मस्तिष्क पर पड़ने वाले दवाब को कम किया जा सके..आगे के उपचार के तौर पर सर्जरी, रेडिएशन थिरेपी एवं कीमोथिरैपी का सहारा लिया जाता है…

—सर्जरी
ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए सर्जरी का सहारा लेना अक्सर अनिवार्य होता है…सर्जरी के तहत ट्यूमर के अधिक से अधिक हिस्से को सुरक्षित तरीके से निकाल लिया जाता है.. नमूने को जांच के लिए बायोप्सी के लिए भेजा जाता है…उच्च क्षमता वाले माइक्रोस्कोप की मदद से ट्यूमर को बड़ा करके देखना तथा उसे हटाना आसान हो जाता है…न्यूरोसर्जरी ऑपरेशन थिएटर में कई विशेष उपकरणों का इस्तेमाल होता है..जैसे उच्च गति वाली ड्रिल, सीयूएसए, इलेक्ट्रोकॉटरी, न्यूरो- नेविगेशन, हेड फिक्सेशन, फ्रेम आदि…

—विभिन्न न्यूरो सर्जिकल विधियां
क्रैनियोटोमी- यह सर्वाधिक सामान्य विधि है जिसकी मदद से ट्यूमर के अधिक से अधिक हिस्से को निकाला जा सकता है..ट्यूमर तक पहुंचने के लिए उच्च गति वाले ड्रिल की मदद से खोपड़ी में छेद करके रास्ता बनाया जाता है…ऑपरेशन से पहले सिर के बाल को हटा दिया जाता है…

—न्यूरो नैविगेशन और इंट्रा-ऑपरेटिव इमेजिंग
इसकी मदद से सर्जरी को सटीक एंव कारगर तरीके से किया जा सकता है…इलेक्ट्रोकाटरी, वैक्युम सक्शन, सीयूएसए एवं अन्य विशेष उपकरणों का इस्तेमाल करके ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी को काफी सुरक्षित बनाया जा सकता है..ऑपरेटिंगरुप के भीतर आपरेटिंग माइक्रोस्कोप पर सर्जरी के वीडियो को प्रदर्शित किया जा सकता है..

—इंडोस्कोपिक सर्जरी
पिट्यूटरी क्षेत्र अथवा स्कल बेस में स्थित ट्यूमर को हटाने के लिए नाक अथवा मस्तिष्क के अगले हिस्से में स्थित स्फेनॉयड बोन के जरिए दूरबीन की मदद से इंडोस्कोप आधारित मिनिमल इनवैसिव सर्जरी की जाती है…इसमें चीरा नहीं लगाना पड़ता है…और मरीज शीघ्र ठीक हो जाता है… स्कल बेस अथवा क्रेनियोफेसिल विधि की मदद से स्कल बेस के आसपास के ट्यूमर को हटाया जाता है…यह सर्जरी न्यूरोसर्जन, ईअनटी सर्जन एवं सिर एवं गर्दन के सर्जन की टीम द्वारा की जाती है…

—न्यूरो नेविगेशन सर्जरी
इसे फ्रेमलेस स्टेरियोटैक्टिक सर्जरी भी कहा जाता है..इसकी मदद से न्यूरोसर्जरी की सटीकता एवं सुरक्षा बढ़ जाती है…न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में ऐसी तकनीक मानक साबित हो रही है..

—स्टिरियोटैक्टिक बायोप्सी
इसका उपयोग तब होता है जब ट्यूमर मस्तिष्क में अधिक गहराई में होता है और जहां ओपन बायोप्सी खतरनाक समझी जाती है..इसमें मरीज को स्टीरियोटैक्टिक हेड फ्रेम पहना दिया जाता है और इसके बाद सीटी स्कैन या एमआरआई की जाती है..ट्यूमर की सही स्थिति से जानने के लिए कंप्यूटर का उपयोग करते हुए खोपड़ी में एक छोटे से छेद के जरिए एक सुई प्रविष्ट कराई जाती है और पैथोलॉजिकल जांच के लिए ट्यूमर का छोटा सा हिस्सा निकला जाता है…

—वीपी अथवा वीए शंट
ये ऑपरेशन तब किया जाता है जब ट्यूमर सेरेब्रोस्पाइनल फ्ल्युड के प्रवाह में अवरोध पैदा करता है…इसमें त्वचा के नीचे से एक लंबी ट्यूब प्रविष्ट कराई जाती है और सीएसएफ के प्रवाह को मस्तिष्क वेंट्रिकल से हटा कर पेरिटोनियल कैविटी की तरफ मोड़ दिया जाता है..

—रेडिएशन थिरेपी या रेडियोथिरेपी
इस विधि में टेलीकोबाल्ट या लाइनर एक्सीलेटर मशीन से उत्पन्न एक्स रे या गामा रे का उपयोग किया जाता है..कैंसर वाले ट्यूमर एवं कई तरह के बिनाइन ट्यूमर में भी यह उपयोगी है…

—स्टेरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी एवं रेडियो थिरेपी
ये विशेष तकनीकें हैं जिसकी मदद से मस्तिष्क के सामान्य एवं महत्वपूर्ण हिस्से तक पहुंचने वाली विकिरण की तीव्रता एवं मात्रा को कम कर दिया जाता है….कीमोथिरेपी का उपयोग साइटोटॉक्सिक दवाइयों के जरिए कुछ किस्म के ब्रेन ट्यूमर के लिए किया जाता है…लाइफोमा, मेडुलोब्लास्टोमा, जर्म सेल ट्यूमर, पीएनईटी एवं कुछ तरह के ग्लायोमा के उपचार में उपयोगी है…

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