ब्रेन स्ट्रोक का पुख्ता इलाज यहीं है?

रिपोर्ट- भारती बघेल

मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति में अवरोध आने या गंभीर रुप से कमी आने से स्ट्रोक होता है…रक्त आपूर्ति में कमी आने से मस्तिष्क के ऊतकों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जिससे कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती है…ऐसे में मरीज की मौत या स्थायी विकलांगता हो सकती है…ब्रेन स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें तत्काल इलाज अत्यंत जरुरी है…ताकि मस्तिष्क को होने वाले नुकसान एवं संभावित जटिलताओं को कम से कम किया जा सके…

ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार
मस्तिष्क की किसी धमनी में रुकावट आ जाने से इस्कीमिक स्ट्रोक होता है…जबकि किसी रक्त नलिका से रक्त का रिसाव होने अथवा उसके फट जाने के कारण हेमोरेजिक स्ट्रोक होता है…कुछ लोगों को मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में कुछ समय के लिए रुकावट आ जाने के कारण ट्रांजिएंट इसकीमिक अटैक होता है..

इस्कीमिक स्ट्रोक
करीब 85 प्रतिशत स्ट्रोक इस्कीमिक स्ट्रोक होते हैं…मस्तिष्क की धमनियों के संकुचित या अवरुध्द होने से रक्त प्रवाह में गंभीर कमी हो जाती है…जिससे इस्कीमिक होता है…

ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक
इसे मिनी स्ट्रोक भी कहा जाता है ये मस्तिष्क के कुछ हिस्से में कुछ समय के लिए रक्त की आपूर्ति घट जाने के कारण होता है.. जो अक्सर पांच मिनट से भी कम समय तक रहता है…
इस्कीमिक स्ट्रोक की तरह ही टीआईए उस समय होता है जब कोई थक्का या कचरा मस्तिष्क को होने वाले रक्त प्रवाह के रास्ते में आ जाता है..और रक्त प्रवाह के रास्ते में आ जाता है…और रक्त प्रवाह में रुकावट कुछ समय के लिए होती है..लेकिन यह बड़े ब्रेन स्ट्रोक की चेतावनी है..और इसलिए इसे हल्के से नहीं लिया जाना चाहिए…

हेमोरेजिक स्ट्रोक
यह मस्तिष्क में और उसके आसपास की रक्त वाहिकाओं में सूजन आने और उनके फटने या रिसाव होने के कारण होता है…इसमें मस्तिष्क में रक्तस्त्राव होता है…इसे सामान्य बोलचाल में ब्रेन हेमरेज भी कहा जाता है…यह उन स्थितियों के कारण होता है जो आपकी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती हैं…जिनमें अनियंत्रित उच्च रक्त चाप, एंटीकोएगुलेंट दवाइयों का बहुत ज्यादा सेवन और आपकी रक्त नलिकाओं की दीवारों में कमजोर स्थान आदि शामिल हैं…

ब्रेन स्ट्रोक की जांच
एमआरआई ब्रेन स्ट्रोक की जांच का मानक तरीका है…ब्रेन स्ट्रोक होने के 45 मिनट के भीतर ही एमआरआई की जा सकती है…अगर मरीज को एमआईआर के लिए नहीं ले जाया जा सकता है…तो एक बेहतर विकल्प मस्तिष्क का सीटी स्कैन है…ज्यादातर शहरों में सीटी स्कैन की सुविधा है…और साथ ही इन शहरों में ब्रेन स्ट्रोक का इलाज करने वाले न्यूरोलॉजिस्ट भी होते हैं….अगर मरीज किसी मेट्रो शहर है तो उसे तत्काल ऐसे स्ट्रोक उपचार केंद्र ले जाया जाना चाहिए जहां एमआरआई मशीन तथा न्यूरोलॉजिस्ट की टीम हो…ब्रेन स्ट्रोक होने पर समय का बहुत महत्व है…

ब्रेन स्ट्रोक का इलाज
ब्रेन स्ट्रोक का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को इस्कीमिक या हेमोरेजिक स्ट्रोक है…ट्रांजिएंट इस्कीमिक स्ट्रोक का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि टीआईए का कारण क्या है, लक्षण उभरने के बाद कितना समय बीत चुका है और मरीज की मेडिकल स्थितियां क्या हैं….अगर मरीज को रक्त का थक्का बनने के कारण स्ट्रोक हुआ हो तो टिश्यू प्लाजमिनोजेन एक्टिवेटर नामक थक्का घोलने वाली या थक्के को तोड़ने वाली दवा इंजेक्शन के जरिए दी जाती है…डॉक्टर आपकी बांह की एक नस में टीपीए का इंजेक्शन देते हैं…यह इंजेक्शन स्ट्रोक के लक्षण उभरने के चार घंटे के भीतर जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए..अगर मरीज देर से अस्पताल पहुंचता है अथवा वह टीपीए के लिए फिट नहीं है तो मरीज को कैथलैब में ले जाकर मेकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी की जाती है…मेकैनिकल थ्रोम्बेक्टोमी स्ट्रोक होने के 8 घंटे के भीतर की जानी चाहिए…इसके काफी अच्छे परिणाम होते हैं..

हेमोरेजिक स्ट्रोक का इलाज
हेमोरेजिक स्ट्रोक के इलाज का पहला चरण मस्तिष्क में रक्त स्त्राव के कारण का पता लगाना तथा रक्त स्त्राव को रोकना है…इस्कीमिक स्ट्रोक के मरीज का इलाज एंटीप्लेटलेट दवाईयों एंव रक्त को पतला करने वाली दवाईयों से किया जा सकता है…लेकिन हेमोरेजिक स्ट्रोक में ये दवाइयां किसी काम की नहीं हैं…क्योंकि इन दवाओं से रक्त स्त्राव और अधिक बढ़ सकता है…

एन्युरिज्म क्वायलिंग एंव क्वायल इम्बोलाइजेशन
अगर किसी आर्टरी में बैलून की तरह का उभार बन गया हो और इसके कारण रक्त स्त्राव हो रहा हो तो सर्जन एन्युरिज्म क्लिपिंग अथवा क्वालिंग इम्बोलाइजेशन का सहारा लेते हैं….

ब्रेन हेमरेज की रोकथाम
ब्रेन हेमरेज की रोकथाम के लिए रक्त चाप पर नियंत्रण एंव निगरानी रखना तथा जीवन शैली में सुधार आवश्यक है…ब्रेन हेमरेज अक्सर सुबह के समय और खास तौर पर सर्दियों में होता है..ब्रेन हेनरेज के मरीजों को खूब पानी पीना चाहिए एंव समय पर दवाईयों का सेवन करना चाहिए…मामूली सिरदर्द की अनदेखी नहीं करनी चाहिए…साथ ही किसी भी तरह का संदेह होने पर तत्काल न्यूरो सर्जन से जांच करानी चाहिए..नोएडा स्थित फोर्टिस अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त न्यूरोकैथ लैब है जहां हर न्यूरो सर्जरी सफलतापूर्वक की जा सकती है….

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