लंबी जिंदगी जी सकते हैं ब्रेन ट्यूमर के मरीज

Dr. Rahul Gupta, Sr. Neurosurgeon, Fortis Hospita,l Noida

रिपोर्ट- भारती बघेल

ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी स्टीरियोटौक्सी एवं सी आर्म की मदद से की जाती है…जिससे किसी भी तरह की गलती नहीं होती और ऑपरेशन पूरी तरह से कारगर एंव सफल होता है….कई लोग भ्रांतियों एवं सही जानकारियों के अभाव में न्यूरो सर्जरी के नाम से ही डर जाते हैं..लेकिन आज कंप्यूटर नेविगेशन की मदद से सर्जरी अत्यंत सुरक्षित एवं कारगर हो गयी है…

ट्यूमर अगर छोटा हो तो गामा नाइफ, साइबर नाइफ, स्टीरियोटैक्टिक, रेडियोधर्मी जैसे कुछ गैर सर्जिकल विकल्पों का भी सहारा लिया जाता है…कंप्यूटर नेविगेशन आधारित सर्जरी में सर्जन मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग यानी एमआईआर, इंट्रोऑपरेटिव एमआईआर, कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी यानी सीटी और पॉजिट्रॉन इमिशन टोमोग्राफी यानी पेट स्कैन जैसी इमेजिंग टेक्नॉलोजी का सहारा लेते हुए मस्तिष्क का 3 डी मॉडल तैयार करते हैं…

इसके जरिए सर्जन ब्रेन ट्यूमर को हटाने की सबसे सुरक्षित एंव कारगर योजना बनाते हैं…सर्जरी के दौरान कंप्यूटर आधारित प्रणालियों की मदद से सर्जन बिल्कुल सुरक्षित एंव सही तरीके से मस्तिष्क के उस क्षेत्र में पहुंच सकता है जहां उपचार की जरुरत होती है…

आज के समय में आधुनिक तरीकों से की जाने वाली सर्जरी के दौरान मरीज के सिर के बाल को हटाने की जरुरत नहीं होती है…और मरीज सर्जरी के तीसरे दिन ही स्नान कर सकता है…सर्जरी के लिए उच्च गुणवत्ता वाली माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है..जो मस्तिष्क के भीतर के हिस्से को 12 गुणा बढ़ा कर दिखाता है…

जब ऐसा लगता है कि ट्यूमर रक्त नालिकाओं वाला है और सर्जरी के दौरान रक्त स्त्राव हो सकता है तो सर्जरी के पहले रक्त नालिका को अवरुध्द कर दिया जाता है..इसके लिए मरीज को न्यूरोकैथ लैब में ले जाकर ट्यूमर की रक्त नालिकाओं के भीतर दवाई प्रविष्ट की जाती है…

इससे सर्जरी के दौरान बहुत कम रक्त स्राव होता है…सर्जरी के तीन दिन बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है..अगर यह सुनिश्चित हो जाए कि जो लक्षण नजर आ रहे हैं वे ब्रेन ट्यूमर के हैं तो आधुनिक तकनीकों से इलाज किया जा सकता है…

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