समाजवादी पार्टी का उदयराज एक बार फिर होगा शुरु ?

रिपोर्ट- भारती बघेल

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बारे में यूं तो काफी कुछ लिखा पढ़ा गया है लेकिन आज हम उनकी जिंदगी के उन किस्सों को आपको बताएंगे जिसे न तो किसी किताबों में दर्ज किया गया है और न किसी पत्र पत्रिकाओं में…

जानकार कहते हैं राजनीति में आने के बाद अखिलेश यादव में काफी कुछ बदलाव आया है…इससे पहले अखिलेश काफी अलग थे..राजनैतिक परिवार के जरुर थे लेकिन राजनीति से बहुत दूर थे..इटावा के सेैफई गांव में जन्में अखिलेश यादव की बचपन की पढ़ाई राजस्थान के धौलपुर मिलिट्री स्कूल से शुरु हुई और मैसूर होते हुई ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में खत्म हुई…

अखिलेश यादव साल 2000 में पहली बार सांसद बने…महज 38 साल की उम्र में देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री भी बन गए…राजनीति में जीत और हार दोनों को स्वीकार करना पड़ता है…अखिलेश यादव भी शायद इस बात को समझ चुके हैं..

बहरहाल राजनीति से इतर अखिलेश यादव की शादी से जुड़ा किस्सा भी बहुत दिलचस्प है..अखिलेश 21 साल की उम्र में डिंपल से मिले थे..प्यार की शुरुआत तो तभी शुरु हो गई थी जब दोनों पहली बार मिले..हांलांकि इजहार करने में कुछ वक्त जरुर लगा…उस वक्त डिंपल लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहीं थीं..एक दोस्त के घर दोनों मिले थे..डिंपल से चार साल अखिलेश छुप- छुपकर मिलते रहे और इसी बीच वो पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया निकल गए..अब दोनों ने शादी का मन बना लिया था..लेकिन शादी हो कैसे एक राजपूत और दूसरा यादव और ऊपर से प्रदेश का नाम उत्तर प्रदेश…एक दिग्गज राजनीतिक परिवार से तो दूसरा आर्मी बेकग्राउंड से..उसके बाद शादी को लेकर पिता मुलायम सिंह यादव से बात की…बात किसी राजनीतिक परिवार की हो या आम भारतीय परिवार की..शादी की बात पर कौन बाप एकदम से हां करता है…मुलायम को इस बात का डर था कि विरोधी कहीं इसे मुद्दा न बना लें…लेकिन अखिलेश यहां नहीं हारे और जा पहुंचे अपनी दादी के पास…दादी की रजामंदी के बाद दोनों हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गए…

अखिलेश यादव को बनाने में एक शख्स का बहुत बड़ा योगदान है मुलायम से भी ज्यादा…सियासी गलियारों में कहा जाता है कि मुलायम ने अखिल़ेश को भले ही पैदा किया हो लेकिन मंझे हुए रा्जनेता बनाने में सबसे बड़ी भूमिका जेनेश्वर मिश्रा ने निभाई है..छोटे लोहिया कहे जाने वाले जेनेश्वर मिश्रा ने ही अखिलेश को राजतनीति की ट्रेनिंग दी थी…2011 में उन्होंने अखिलेश कोे समझाते हुए कहा कि संभव है कि पार्टी में कुछ लोग तुम्हें नेता की तरह स्वीकार न करें..पर तुम घबराना मत…वो अखिलेश जिंदाबाद न कहें तो भी तुम मत घबराना…जिस दिन तुम खुद को नेता के तौर पर स्थापित कर लोगे तो मेैं खुद अखिलेश जिंदाबाद के नारे लगाऊंगा..

मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश ने नेताओं के पैर छूना बंद कर दिए..नेता बनने के लिए ये जरुरी था..स्कूल के दिनों में एक बार जनेश्वर मिश्रा ने पूछा था कि राजनीति में कब आओगे…तो अखिलेश मुस्कराने लगे थे…आगे मिश्रा ने कहा कि आना जरुर…राजनीति एक अच्छी चीज है..और इसे अच्छे लोगों की जरुरत है..इसके अलावा जनेश्वर मिश्रा ने ही अखिलेश को भाषण देने और खुद में बदलाव करने की ट्रेनिंग दी थी..

राजनीति से इतर अखिलेश यादव के कई ऐसे किस्से और कहानियां हैं जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है…अखिलेश फुटबॉल प्रेमी आदमी हैं लेकिन इसकी कीमत भी उन्ह़ें चुकानी पड़ी…स्कूल के दिनों की बात है एक फुटबॉल मेैच के दौरान एक शॉट उमकी नाक पर जाकर लगा और उनकी नाक टूट गई वहीं से उनकी नाक टेढ़ी हो गई..ऐसे ही अखिलेश और अमिताभ बच्चन का भी एक किस्सा है जो शायद ही किसी को मालूम हो…ऑस्ट्रेलिया में अखिलेश की पढ़ाई चल रही थी..उसी दौरान बिग बी के एक कार्यक्रम में अखिलेश उनसे मिलने पहुंच गए…दोनों की फोटो अखबार में आई..अखिलेश के मकान मालिक को भी यकीन नहीं हुआ कि उनके यहां रह रहा लड़का भारत के रक्षामंत्री का बेटा है..

आज भले ही चाचा शिवपाल और अखिलेश में छत्तीस का आंकड़ा हो..लेकिन बचपन में शिवपाल ही वो शख्स थे जो हमेशा अखिलेश के साथ साये की तरह रहते थे…अगर अखिलेश यादव किसी मंच पर कन्नड़ बोलते दिख गये तो किसी को आश्चर्य नहीं करना चाहिए…मैसूर में अपनी इंजीनियरिंग के दौरान एक चाय के स्टॉल पर अखिलेश चाय पीने जाते थे वहीं काम कर रहे चंदू ने अखिलेश को कन्नड़ सिखाई…

मुजफ्फरनगर दंगा, दादरी कांड, मथुरा का रामवृक्ष कांड, बदांयु रेप कांड और यादव से भ्रष्टाचार जैसे सवाल अखिलेश के व्यक्तित्व और राजनीति की राह में ऐसे सवाल हैंं जिनका जवाब उनसे हर बार मांगा जाएगा…स्कूल के दिनों में हमेशा अफसर बनने की बात करने वाले अखिलेश आज यूपी की सियासत का सबसे बड़ा राजनीतिक चेहरा बन गये हैं…आज सत्ता में भले ही न हों लेकिन यूपी पंचायत चुनाव के बाद लोगों में कहीं न कहीं ये उम्मीद फिर से पैदा हो गई है कि ये लड़का फिर से यूपी का मुख्यमंत्री बन सकता है…अखिलेश की राजनीति का अब तक का सबसे बड़ा हासिम यही है कि मुलायम पुत्र होते हुए भी लोगों का उन्हें देखने का अंदाज मुलायम जैसा बिल्कुल नहीं है…

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