हार्ट अटैक से ज्यादा घातक है ब्रेन अटैक,एंडोस्कोपिक सर्जरी क्यों है बाकी विकल्पों से बेहतर…

रिपोर्ट- भारती बघेल

ब्रेन अटैक या एक्यूट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें मरीज को पहला लक्षण दिखने के घंटे भर के अंदर एक अच्छे अस्पताल में पहुंचाना चाहिए…स्ट्रोक की स्थिति में मृत्यु या स्थायी विकलांगता भी हो सकती है..

—तीव्र स्ट्रोक क्या है?
मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में रक्त के प्रवाह में कमी को तीव्र स्ट्रोक के रुप में जाना जाता है…थ्रोम्बस, एम्बोली या मस्तिष्क में रक्त आपूर्ति करने वाली धमनी में किसी भी प्रकार की चोट लग जाने से यह अचानक अवरुध्द हो जाती है, ऐसी स्थिति में मरीज को तीव्र स्ट्रोक का सामना करना पड़ता है…

–तीव्र स्ट्रोक के क्या कारक हैं?
थ्रोम्बस स्ट्रोक उक्त रक्तचाप, मधुमेह और हाइपरलिपिडिमिया के खराब नियंत्रण के कारण होता है…इसके अलावा कई अज्ञात कारणों से भी स्ट्रोक हो सकता है….ब्रेन में ब्लड के स्थाई ठहराव को ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक कहते हैं…

—लक्षण क्या हैं?
स्ट्रोक को संक्षेप में फास्ट का नाम दिया गया है…जहां एफ का मतलब है – फेशियल पैरालिसिस, ए का मतलब – आर्म वीकनेस, एस का मतलब है- स्पीच एब्नॉर्मेलिटी एनं टी मतलब- टाइम….देखने या सुनने की क्षमता कम हो जाना,चक्कर, निगलने में कठिनाई इसके मुख्य लक्षण हैं…

—स्ट्रोक का इलाज कैसे संभव है?
स्ट्रोक का शीघ्र पता लगाना और मरीज को बिना देर किए अस्पताल पहुंचाना आपात स्थिति से बचने का बेहतर विकल्प है…उपचार की दो विधि हैं जिसमें अवरुध्द रक्त वाहिका को खोलकर साल्वेजिबल ब्रेन में री- स्टोर किया जाता है…इसके अलावा इंट्रावेनस ड्रग थैरेपी एंव न्यूरो- कैथलैब में क्लॉट रिमूवल के माध्यम से भी उपचार संभव है….

—इसमें किस प्रकार की जांच की जाती हैं?
तीव्र स्ट्रोक की जांच के लिए मस्तिष्क का एक सादा सी टी स्कैन ही पर्याप्त है…जब तक जांच में संदेह न हो तब तक मस्तिष्क की एमआरआई नहीं करवानी चाहिए….

—-स्ट्रोक का इंट्रावेनस उपचार क्या है?
स्ट्रोक आने के साढ़े चार घंटे के अंदर चिकित्सक की देखरेख में मरीज को क्लॉट बस्टिंग एजेंट का तरह कार्य करने वाली एक दवा दी जाती है…यह दवा 50 प्रतिशत से अधिक मामलों में अवरुध्द वाहिकाओं को खोल सकती है….

—-मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी क्या है?
एक बड़े रक्त वाहिका ब्लॉक को खोलने के लिए नवीनतम और प्रभावी उपचार है…..इसमें न्यूरो- इंटरवेंश्निस्ट न्यूरोकैथलैब में एक प्रकार के कैथेटर और वायर का उपयोग करता है और एस्पिरेशन विधि या स्टंट द्वारा थ्रोम्बस को हटा देता है…थक्का हट जाता है, तो प्रवाह स्थापित हो जाता है और मस्तिष्क क्षति की संभावना कम हो जाती है…यह सभी मरीजों में 6 घंटे में और कुछ चयनित मरीजों में 24 घंटे तक किया जा सकता है….यह परक्यूटेनियस विधि द्वारा मरीज को बेहोश करके जाता है और यह विधि 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों में सफल है….

—-डी- कंप्रेसिव क्रनियोक्टॉमी क्या है?
यह एक लाइफ सेविंग विधि है…इसमें स्कल में दवाब द्वारा मृत मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को ठीक किया जा सकता है…इस विधि में ऑपरेशन थियेटर में खोपड़ी का एक बड़ा हिस्सा हटाकर संरक्षित किया जाता है….सूजन कम होने के बाद इसे बदला भी जा सकता है….

—वहीं आपको बता दें कि ब्रेन ट्यूमर के इलाज का एक और एडवांस विकल्प है- एंडोस्कोपिक सर्जरी
ब्रेन ट्यूमर भारत में हो रही मौतों का दसवां सबसे बड़ा कारण है इस घातक बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां विभिन्न प्रकार के ट्यूमर अलग-अलग उम्र के लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं…विश्व स्वास्थ संगठन के सहयोग से इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ कैंसर रेजीस्ट्रीज द्वारा निकाली गई ग्लोबोकैन 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल ब्रेन ट्यूमर के लगभग 28,000 नए मामले दर्ज किए जाते हैं….

इस घातक के कैंसर के कारण अबतक लगभग 24,000 मरीजों की मौत हो चुकी है…मस्तिष्क में मौजूद कोशिकाएं जब खराब होने लगती हैं, तो बाद में जाकर ब्रेन ट्यूमर का रुप ले लेती हैं…ये ट्यूमर कैंसर या बिना कैंसर वाला हो सकता है…जब कैंसर विकसित होता है, तो मस्तिष्क पर गहरा दवाब पड़ता है, जिससे ब्रेन डेमेज होने के साथ मरीज की जान जा सकती है…

—-क्या हैं लक्षण
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण और संकेत ट्यूमर के आकार और जगह पर निर्भर करते हैं…कुछ लक्षण सीधा ब्रेन टिशू को प्रभावित करते हैं, जबकि कुछ लक्षण मस्तिष्क में दवाब डालते हैं…
ब्रन ट्यूमर के मुख्य लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं..
….सिरदर्द
…उल्टियां
….धूंधला दिखाई देना
…..मानसिक स्वभाव में बदलाव
….मस्तिष्क में झटकों का एहसास
….हाथों, पैरों या चेहरों पर कमजोरी
….अंगों के मूवमेंट में मुश्किल

—ब्रेन ट्यूमर के प्रकार
ब्रेन ट्यूमर के प्राइमरी और सेकंडरी तौर पर विभाजित किया जाता है…प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर वह है जो मस्तिष्क में होता है…उनमें से कुछ ट्यूमर कैंसर का रुप नहीं लेते हैं…सेकेंडरी ब्रेन ट्यूमर को मेटास्टेटिक ब्रेन ट्यूमर के नाम से भी जानते हैं…यह ट्यूमर तब होता है जब कैंसर की कोशिकाएं स्तन या फेफड़ों आदि जैसे अन्य अंगों से होते हुए मस्तिष्क तक पहुंच जाती हैं…प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर या तो सीधे मस्तिष्क में विकसित होता है या निम्नलिखित प्रकार से विकसित होता है….
…मस्तिष्क कोशिकाएं
…नर्व सेल्स जैसे कि
…मस्तिष्क की परतें जैसे कि मेनिंग्योमा

— प्राइमरी ब्रेन ट्यूनर कैंसरस व नॉन- कैंसरस दोनों ही हो सकता है….गाइलोमा और मेनिंग्योमा व्यस्कों में होने वाले सबसे आम प्रकार के ब्रेन ट्यूमर हैं
—सेकेंडरी ब्रेन ट्यूमर सबसे आम प्रकार का ब्रेन ट्यूमर माना जाता है…इस प्रकार के ट्यूमर हमेशा कैंसर वाले होते हैं क्योंकि ये शरीर के किसी भी अंग से होते हुए मस्तिष्क तक फैलने की क्षमता रखते हैं…
…उदाहरण के लिए
फैफड़ों का कैंसर
स्तन कैंसर
किडनी कैंसर
त्वचा का कैंसर

—ब्रेन ट्यूमर का खतरा कैसे लोगों में होता है?
परिवारिक इतिहास….एक हालिया अध्ययन के अनुसार , केवल 5 से 10 फीसदी कैंसर आनिवांशिक होते हैं…हालांकि ट्यूमर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है, लेकिन यदि आप बीमारी का पारिवारिक इतिहास रखते हैं , तो आपके लिए समय समय पर हेल्थ स्क्रीनिंग और परामर्श लेना आवश्यक है….

हालांकि यह बीमारी 55 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अधिक होती है…लेकिन ऐसे कई मामले देखे गए हैं, जहां 3 साल से 15 साल तक के बच्चे इसका शिकार हुए हैं….

—रेडिएशन और केमिकल का एक्सपोजर
जो लोग रेडिएशन और कैमिकल के एक्सपोजर में ज्यादा रहते हैं…उन्हें ब्रेन ट्यूमर होने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं…

—मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई)
एमआरआई पावरफुल चुंबक और रेडियो वेव्स की मदद से मस्तिष्क को साफतौर पर देखने में मदद करता है…इंट्रावीनस कॉन्ट्रास्ट के साथ मिलकर यह एक बेहतरीन विकल्प बन जाता है,जो ट्यूमर की जगह, आकार, दवाब का प्रभाव और विशेषताओं के बारे में बताता है…

—एंडोस्कोपिक ब्रेन ट्यूमर सर्जरी एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसकी मदद से न्यूरोसर्जन मस्तिष्क की गहराई में विकसित ट्यूमर का भी इजाज कर सकता है…या फिर उसे नाक के जरिए ढूंढ सकता है…इस प्रक्रिया के दौरान, एक या दो छोटे चीरे लगाकर उसमें पतली ट्यूब डाली जाती है, जिससे मस्तिष्क की तस्वीरें देखी जा सकती हैं…इस ट्यूब को एंडोस्कोप कहते हैं जिसमें एक छोटा कैमरा फिट होता है…इसी कैमरे की मदद से न्यूरोसर्जन विकसित ट्यूमर को देख पाता है….इस प्रक्रिया की मदद से मस्तिष्क में स्वस्थ हिस्से को बिना नुकसान पहुंचाए ब्रेन ट्यूमर को निकाल दिया जाता है…

—ब्रेन मेटास्टेटिक का निदान
ब्रेन ट्यूमर का निदान टेस्ट के साथ शुरु किया जाता है, जहां पहले मरीज से यह उसका स्वास्थ्य इतिहास पूछा जाता है…इस टेस्ट के बाद डॉक्टर कुछ अन्य जांचों की सलाह देता है….जैसे-
….मस्तिष्क का सीटी स्कैन
डॉक्टर इस स्कैन की मदद से मरीज के शरीर को अच्छे से जांचा जाता है…सीटी स्कैन शरीर को समझने के लिए एक्सरे से भी बेहतर विकल्प है…

—इलाज के अन्य विकल्पों की तुलना में एंडोस्कोपिक सर्जरी कैसे बेहतर है?
एंडोस्कोपिक ब्रेन ट्यूमर सर्जरी एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसकी मदद से न्यूरोसर्जन मस्तिष्क की गहराई में विकसित हुए ट्यूमर का भी इलाज कर सकता है…या फिर उसे नाक के जरिए ढूंढ सकता है…इस प्रक्रिया के दौरान , एक या दो छोटे चीरे लगाकर उसमें पतली ट्यूब डाली जाती है…जिससे मस्तिष्क की तसवीरें देखीं जा सकती हैं…इस ट्यूब को एंडोस्कोप कहते हैं, जिसमें एक छोटा कैमरा फिट होता है…इसी कैमरे की मदद से न्यूरोसर्जन विकसित हुए ट्यूमर को देख पाता है…इस प्रक्रिया की मदद से मस्तिष्क के स्वस्थ हिस्से को बिना नुकसान पहुंचाए ब्रेन ट्यूमर को निकाल लिया जाता है…शुरुआत इलाज से बाद की समस्याओं से बचा जा सकता है…इलाज में देरी से दिमाग के अंदर गंभार दवाब पड़ने लगता है…इसलिए इसके लक्षण नजर आते ही बीमारी का निदान व इलाज कराना आवश्यक है…

सर्जन पिट्यूटरी ग्लैंड ट्यूमर, स्कल बोन और ट्यूमर आदि के इलाज के लिए एंडोस्कोपिक सर्जरी का इस्तेमाल बहुत ही कम करते हैं….इलाज के बेहतर परिणामों के लिए एंडोस्कोपिक सर्जरी को रोबोटिक साइबरनाइफ रेडिएशन थेरेपी के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है…

नोट-इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति एंव संस्थान की है…
डॉ. राहुल गुप्ता
डायरेक्टर ऑफ न्यूरोसर्जरी
(ब्रेन, स्पाइन एंड न्यूरो- एंडोवेस्कुलर सर्जन)
फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा और एस्कॉर्ट दिल्ली

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