Ajit Pawar के जाने से बना ‘शून्य’ कौन भरेगा ?

Report by : Sakshi Singh, National Khabar

Ajit Pawar :- महाराष्ट्र की राजनीति में सिर्फ डिप्टी सीएम नहीं ,पाँच बड़े मोर्चों पर खड़ी हुई चुनौती

महाराष्ट्र की राजनीति ने गुरुवार को अपना एक बड़ा स्तभ खो दिया। छह बार उपमुख्यमंत्री रहे,राज्य की सत्ता-समीकरणों के मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट और मराठा राजनीति के मजबूत चेहरे अजित पवार को बारामती में अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम संस्कार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह,केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी,उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे,उद्धव ठाकरे,राज ठाकरे सहित तमाम बड़े राजनीतिक नेता मौजूद रहे। यह दृश्य इस बात का संकेत था कि अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं,बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की धुरी थे।

उनके निधन से सिर्फ एक व्यक्ति नहीं गया,बल्कि सत्ता,संगठन और सामाजिक समीकरणों का एक पूरा तंत्र अचानक खाली हो गया। अब सवाल यही नहीं हैं कि अगला डिप्टी सीएम कौन होगा,बल्कि यह हैं कि अजित पवार के जाने से पैदा हुए उस ‘शून्य’ को आखिर कौन और कैसे भरेगा ?

Ajit Pawar :- डिप्टी सीएम की कुर्सी से कही आगे का सवाल

अजित पवार का महत्व सिर्फ उपमुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं था। वह सरकार में पावर सेंटर थे। बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी (अजित पवार गुट) की महायुति सरकार में संतुलन उन्हीं के कंधों पर टिका था। उनके पास प्रशासनिक अनुभव,राजनीतिक पकड़ और निर्णय लेने की क्षमता-तीनों का दुर्लभ सयोजन था।

अब उनके जाने से सरकार के भीतर पावर बैलेंस बिगड़ना तय हैं। महायुति के लिए अब सिर्फ नया चेहरा ढूढ़ना ही नहीं,बल्कि उस भरोसे और संतुलन को दोबारा खड़ा करना बड़ी चुनौती बन गया हैं।

वित्त मंत्रालय : सबसे संवेदनशील मोर्चा

अजित पवार का दूसरा सबसे बड़ा रोल वित्त मंत्री के तौर पर था। महाराष्ट्र जैसे आर्थिक रूप से मजबूत राज्य में बजट,विकाश योजनाएं,इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण निवेश की दिशा तय करना आसान नहीं होता। अजित पवार इस मंत्रालय को बेहद सख्ती और स्पष्टता के साथ चलाते थे।

उनके निधन के बाद वित्त मंत्रालय की कमान किसे दी जाएगी, यह सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक फैसला भी होगा। गलत चयन से सरकार की आर्थिक दिशा और निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

Ajit Pawar :- मराठा राजनीति: सबसे बड़ा खालीपन

अजित पवार मराठा राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक थे। आरक्षण से लेकर सत्ता में भागीदारी तक, मराठा समाज के भीतर उनकी स्वीकार्यता मजबूत थी। वह मराठा वोट बैंक और सत्ता के बीच सेतु का काम करते थे।

अब उनके न रहने से मराठा राजनीति में नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है। यह खालीपन सिर्फ एनसीपी के लिए नहीं, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। इस शून्य को भरने के लिए कई नेता कोशिश करेंगे, लेकिन अजित पवार जैसी पकड़ बनाना आसान नहीं होगा।

Ajit Pawar :- चीनी लॉबी और सहकारिता राजनीति पर असर

महाराष्ट्र की राजनीति में चीनी मिलें और को-ऑपरेटिव सेक्टर सत्ता का अहम आधार रहे हैं। अजित पवार इस क्षेत्र के सबसे बड़े रणनीतिक खिलाड़ी थे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान राजनीति और सहकारिता नेटवर्क पर उनकी मजबूत पकड़ थी।

उनके जाने से चीनी लॉबी में भी असमंजस की स्थिति है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रभावशाली सेक्टर पर कौन नेता अपनी पकड़ बनाता है—और क्या बीजेपी इसमें सीधा हस्तक्षेप बढ़ाती है।

Ajit Pawar :- एनसीपी का भविष्य: सबसे बड़ा सवाल

अजित पवार के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—एनसीपी का भविष्य क्या होगा?

शरद पवार से अलग होने के बाद एनसीपी की बागडोर पूरी तरह अजित पवार के हाथों में थी। पार्टी में नंबर दो की भूमिका में प्रफुल्ल पटेल थे, जो फिलहाल कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

प्रफुल्ल पटेल अनुभवी नेता हैं, लेकिन वह मास लीडर नहीं माने जाते। संगठन को संभालने की क्षमता जरूर है, लेकिन चुनावी राजनीति और जनभावनाओं में उनकी पकड़ सीमित मानी जाती है।

Ajit Pawar :- संभावित दावेदार और उनकी सीमाएं

सुनील तटकरे: महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष, कोंकण में मजबूत पकड़, संगठन चलाने में माहिर—लेकिन राज्यव्यापी प्रभाव सीमित।

छगन भुजबल और धनंजय मुंडे: दोनों ओबीसी नेता हैं, लोकप्रिय भी हैं, लेकिन विवादों ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है।

Ajit Pawar :- परिवार से उत्तराधिकार?:

सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं,
पार्थ पवार 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं पाए।

अजित पवार ने अपने परिवार को राजनीति में जरूर आगे बढ़ाया, लेकिन अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और जनस्वीकार्यता के लिहाज से अभी वे बड़े नेतृत्व की भूमिका के लिए तैयार नहीं माने जाते।

Ajit Pawar :- क्या एनसीपी फिर एकजुट होगी?

अजित पवार के जाने के बाद एक बड़ा राजनीतिक प्रश्न यह भी है—क्या एनसीपी के दोनों गुट फिर से एकजुट होंगे?
शरद पवार और अजित पवार के बीच की दूरी राजनीतिक थी, व्यक्तिगत नहीं। ऐसे में नेतृत्व के अभाव में पार्टी के भीतर पुनर्गठन या विलय की चर्चाएं तेज हो सकती हैं।

हालांकि यह राह आसान नहीं होगी, क्योंकि दोनों गुटों की राजनीतिक दिशा और गठबंधन अलग-अलग हैं।

Ajit Pawar :- 360 डिग्री घूम गई महाराष्ट्र की राजनीति

अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा झटका है, जिसने सत्ता, संगठन और सामाजिक समीकरण—तीनों को हिला दिया है। वह नेता थे जो संकट में भी सरकार को संभाल लेते थे, गठबंधन को जोड़कर रखते थे और विरोधियों को भी रणनीतिक रूप से मात देते थे।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि उनकी जगह कौन लेगा, बल्कि यह है कि क्या कोई उनकी जगह ले भी पाएगा?

अजित पवार का निधन महाराष्ट्र की राजनीति में सिर्फ एक खली कुर्सी नहीं,बल्कि एक राजनीतिक युग का विराम है। डिप्टी सीएम,वित्त मंत्री,मराठा चेहरा,सहकारिता का रणनीतिकार और गठबंधन का संतुलनकर्ता-इन सभी भूमिकाओं का एक साथ खत्म होना आसान नहीं।

आने वाले महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति नए मोड़ लेगी। गठबंधन बदलेगा,नितृत्व उभरेगा,लेकिन अजित पवार जैसा सर्वमान्य,निर्णायक और ताकतवर चेहरा मिलना-यह सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

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