BMC Election में हार के बाद उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान

Report by :- Sakshi Singh, National Khabar

“मैं सिर्फ चेहरा हूं, लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई”

मुंबई: बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद पहली प्रतिक्रिया

BMC:- महाराष्ट्र की राजनीति में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव हमेशा से सत्ता और सियासत का सबसे बड़ा रणक्षेत्र रहे हैं। इस बार के नगर निकाय चुनावों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) को करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव नतीजों के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने न सिर्फ हार के कारणों पर खुलकर बात की, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना (शिंदे गुट) पर भी तीखा हमला बोला।

नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और शिवसेना की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं, जिन्हें न सत्ता खरीद सकती है और न पैसा।

BMC:- “मैं सिर्फ चेहरा हूँ,असली ताकत कार्यकर्ता हैं”

अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने खुद को पार्टी का केवल एक चेहरा बताते हुए कहा कि शिवसेना की असली पहचान उन हज़ारों कार्यकर्ताओं से है,जो गली-मोहल्लो में पार्टी के लिए डटे रहे।

उन्होंने कहा,

“में सिर्फ चेहरा हूँ। असली वास्तुकार वो कार्यकर्ता हैं,जिन्होंने विपरीत परिस्थतियों में भी पार्टी का झंडा थामे रखा। सत्ता,पैसा और दबाव से लोग तोड़े जा सकते हैं,लेकिन ज़मीनी शिवसेना की निष्ठा को कभी ख़रीदा नहीं जा सकता”।

उद्धव ठाकरे का यह बयान साफ संकेत देता है कि वे पार्टी की हार को व्यक्तिगत विफलता नहीं मानते,बल्कि संगठन की ताकत पर भरोसा जताते हैं।

BMC:- हार के कारणों पर खुलकर बोले उद्धव ठाकरे

बीएमसी चुनाव में मिली हार को लेकर उद्धव ठाकरे ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने माना कि हालात पार्टी के लिए आसान नहीं थे। सत्ता की ताकत,धनबल और प्रशासनिक दबाव ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया।

उद्धव ने कहा कि यह चुनाव समान परिस्थतियों में नहीं लड़ा गया। उन्होंने इशारों-इशारों में आरोप लगाया कि विरोधियों ने सत्ता और ससाधनों का जमकर इस्तेमाल किया,जिससे चुनावी प्रक्रिया असंतुलित हो गई।

BMC:- बीजेपी और शिंदे गुट पर तीखा हमला

उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने शिवसेना को तोड़ने का काम किया,वे यह समझते हैं कि पार्टी केवल सत्ता से चलती है।

उन्होंने कहा,

“शिवसेना कोई दुकान नहीं है जिसे खरीद लिया जाए। यह विचारधारा है,जिसे दबाव या पैसों से खत्म नहीं किया जा सकता।”

उद्धव ठाकरे ने शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता के सहारे मिली जीत स्थायी नहीं होती,जबकि जनता और कार्यकर्ताओं का भरोसा ही असली पूंजी होता है।

“लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है”

हार के बावजूद उद्धव ठाकरे के तेवर आक्रामक नज़र आए। उन्होंने साफ कहा कि यह चुनाव अंतिम नहीं है और संघर्ष जारी रहेगा।

उनका कहना था कि शिवसेना का इतिहास संघर्षो से भरा रहा है और पार्टी हर मुश्किल दौर से निकलकर और मजबूत हुई है। बीएमसी चुनाव की हार को उन्होंने एक पड़ाव बताया,अंत नहीं।

BMC:- महायुति पर भी सीधा निशाना

उद्धव ठाकरे ने बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) की महायुति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विचारधारा से समझौता कर बनाई गई सत्ता ज्यादा दिन नहीं चलती।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे निराश न हों,,क्यूंकि जनता सब देख रही है और सही समय पर जवाब देगी।

BMC:- नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संदेश

नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने उनसे जनता के बीच सक्रिय रहने और जमीनी मुद्दों पर काम करने का आहन किया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भी जनसेवा का काम जारी रखना ही पार्टी की असली पहचान है। नगरसेवकों से उन्होंने साफ-सुथरी राजनीति और जनता के भरोसे को कायम रखने की अपील की।

BMC:- शिवसेना की विरासत का जिक्र

अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे की विरासत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिवसेना सिर्फ सत्ता के लिए नहीं बनी थी,बल्कि आम मराठी मानुष की आवाज़ बनने के लिए बनी थी।

उन्होंने कहा कि यह विरासत किसी चुनावी हार से खत्म नहीं हों सकती।

राजनीतिक संकेत और आने वाले दिन

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक,उद्धव ठाकरे का यह बयान आने वाले चुनावों के लिए रणनीतिक संकेत भी देता है। वे साफ कर रहे हैं कि पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है और आने वाले समय में बीजेपी और शिंदे गुट को कड़ी चुनौती दी जाएगी।

बीएमसी चुनाव की हार के बावजूद उद्धव ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रखने की कोशिश कर रहे हैं और यह संदेश दे रहे हैं कि असली लड़ाई अभी बाकी है।

हार के बाद भी संघर्ष का ऐलान

बीएमसी चुनाव में करारी हार के बाद उद्धव ठाकरे का यह बयान साफ दर्शाता है कि शिवसेना (उद्धव गुट) इसे अंत नहीं,बल्कि नए संघर्ष की शुरुआत मान रही है।

“मैं सिर्फ चेहरा हूँ,लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई”-यह बयान न केवल कार्यकर्ताओं के लिए संदेश है,बल्कि राजनीतिक विरोधियों के लिए भी चेतावनी है कि महराष्ट्र की राजनीति में संघर्ष अभी जारी रहेगा।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उद्धव ठाकरे अपनी इस चुनौती को किस रणनीति के साथ आगे बढ़ाते हैं और शिवसेना (उद्धव गुट) खुद को कैसे पुनर्गठित करती है।

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