
The Great Nicobar Project: भारत अब दुनिया के 40% तेल टैंकरों की आवाजाही पर नज़र रखने वाला है, क्योंकि NGT ने The Great Nicobar Project को हरी झंडी दिखा दी है। NGT ने इस प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं का ये कहकर निपटारा किया है की ये प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से महत्पूर्ण है।
The Great Nicobar Project: NGT ने केंद्र सरकार के 90000 करोड़ रूपए के दी ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है। इस प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ये कहकर दर किनार कर दिया की ये प्रोजेक्ट देशहित में महत्पूर्ण है। इस प्रोजेक्ट की खास बात ये है की अगर ये डेवलपमेंट शुरू होती है तो हिन्द महासागर से गुजरने वाले सभी तेल टैंकर्स पर भारत नज़र रख पाएगा। दुनिया के तकरीबन 40% तेल टैंकर्स पर भारत की नज़र रहेगी।
सोनियां गाँधी ने उठाए बड़े सवाल
कांग्रेस संसद सोनिया गाँधी ने इस प्रोजेक्ट पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है की इस प्रोजेक्ट से आदिवासियों के अधिकारों का हनन हो रहा है। इसके अलावा ये प्रोजेक्ट पर्यावरण के लिए भी खतरा साबित होगा। पेड़ों की लगातार कटाई से आदिवासी जन जातियों और पर्यावरण दोनों खतरे के निशान पर है
चीन की बढ़ती गतिविधियां भी है कारण
हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियां भी इस प्रोजेक्ट पर काम करने का एक महत्पूर्ण कारण है। चीन बड़ी तेजी से अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहा है। इसीलिए भारत को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर ध्यान देने की बेहद ज्यादा जरुरत है। ये प्रोजेक्ट भारत की सुरक्षा और संतुलन को बनाए रखने के लिए जरुरी है।
आदिवासियों को हो सकता है नुकसान
ग्रेट निकोबार में शोम्पेन, ओंगे और निकोबारी जैसे कई विभिन्न आदिवासी जनजातियां रहती हैं। यदि उनकी पारंपरिक क्षेत्र को क्षति पहुंचाई जाए तो उनकी संस्कृति और पहचान को खतरा हो सकता है।
प्रोजेक्ट को रोकने का कोई आधार नहीं :- NGT
NGT के प्रमुख जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने 2022 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दिए जाने वाले पर्यावरण विभाग के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही तर्क दिया की ये प्रोजेक्ट देश हित के लिहाज से अच्छा है इसलिए इस प्रोजेक्ट को रोकने का कोई आधार नहीं है। साथ ही ये भी कहा गया की इस प्रोजेक्ट के साथ सारे साफ़गार्ड्स का ध्यान दिया गया है।
Great Nicobar Project क्या है ?
ग्रेट निकोबार गलाथिया खाड़ी के पास है। इस प्रोजेक्ट के तहत लाखों पेड़ों को काटने की बात कही जा रही है। रेसेअर्चेर्स का कहना है की अगर इन पेड़ों को काटा गया तो वहां के जनजातियों के लिए मुसीबत बढ़ सकती है।
लेकिन NGT ने इन सभी तर्कों को दरकिनार करके The Great Nicobar Project को हरी झंडी दिखा दी है।