
Report by : Sakshi Singh
कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद सुरेश कलमाड़ी का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीति जगत के साथ-साथ खेल प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र में भी शोक की लहर दौड़ गई है। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत लगातार ख़राब चल रही थी,जिसके चलते उन्हें पुणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद वे जीवन की जंग हार गए। परिजनों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार आज शाम पुणे में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
सुरेश कलमाड़ी भारतीय राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई और कई दशकों तक सार्वजनिक जीवन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को एक प्रभावशाली नेता के रूप में बनाए रखा। पुणे की राजनीति में उनका विशेष प्रभाव रहा और उन्होंने क्षेत्र के विकास से जुड़े कई मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।
कलमाड़ी कई बार लोकसभा सांसद चुने गए और उन्होंने केंद्र तथा राज्य की राजनीति में महत्पूर्ण जिम्मेदारियां संभाली। वे न केवल एक राजनेता थे,बल्कि खेल प्रशासन से भी गहराई से जुड़े रहे। खासतौर पर कामनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका देश-विदेश में चर्चित रही। इस दौरान उन्हें प्रशंसा के साथ-साथ आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा,लेकिन भारतीय खेल प्रशासन के इतिहास में उनका नाम हमेशा दर्ज रहेगा।
उनके निधन पर कांग्रेस पार्टी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें एक अनुभवी,जुझारू और संगठन को मजबूती देने वाला नेता बताया। कांग्रेस के कई नेताओं ने कहा कि सुरेश कलमाड़ी ने पार्टी के लिए कठिन समय में भी सक्रिय योगदान दिया और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का प्रयास किया। सोशल मीडिया पर भी कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि संदेश साझा किए हैं।
राजनीतिक विरोधियो ने भी उनके निधन पर शोक जताया है।विभिन्न दलों के नेताओं ने कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद सुरेश कलमाड़ी एक अनुभवी और प्रभावशाली जननेता थे, जिनका लंबा सार्वजनिक जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्ययन का विषय रहेगा। उनके निधन को पुणे और महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
सामाजिक और खेल जगत से जुड़े लोगों ने भी उनके योगदान को याद किया। खेल संगठनों ने कहा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाई। भले ही उनके करियर में विवाद रहे हों,लेकिन उनके प्रशासनिक अनुभव और संपर्कों का लाभ देश को कोई मौकों पर मिला।
सुरेश कलमाड़ी के निधन से एक ऐसे युग का अंत हुआ है,जिसने भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन दोनों को करीब से देखा और प्रभावित किया। उनका जीवन संघर्ष,उपलब्धियों और विवादों का मिश्रण है। उनका जाना न सिर्फ कांग्रेस पार्टी,बल्कि पुरे सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।