
Report by : Sakshi Singh, National Khabar
- कोचिंग कल्चर पर उठते सवाल
- क्या है प्रस्ताव ?
- कहां है समस्या?
- इससे क्या होगा फायदा?
- कोचिंग क्यों आगे निकल गई ?
JEE-NEET : कोचिंग कल्चर पर उठते सवाल
देश में JEE-NEET, और CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर बढ़ते कोचिंग कल्चर और छात्रों पर पड़ रहे मानसिक दबाव को लेकर सरकार अब गंभीर नज़र आ रही है। आए दिन छात्रों के तनाव,अवसाद और पढ़ाई के अत्यधिक बोझ से जुड़ी खबरें सामने आ रही है।इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा गठित एक समिति ने स्कूल शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का सुझाव दिया है।
इस समिति का मानना है कि अगर स्कूल सिस्टम को मजबूत किया जाए और पढ़ाई को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप ढाला जाए,तो छात्रों को कम उम्र से ही कोचिंग पर निर्भर होने की मज़बूरी नहीं रहेगी। समिति की सबसे अहम सिफारिश यह है कि कोचिंग क्लासेज के पढ़ाई के घंटे सीमित किए जाए।
JEE-NEET: क्या है प्रस्ताव ?
कोचिंग क्लासेज को दिन में अधिकतम 2 से 3 घंटे तक सीमित किया जाए लबे और थकाऊ क्लास शेड्यूल पर रोक लगे
छात्रों को पढ़ाई के साथ आराम और अन्य गतिविधियों का समय मिले समिति का कहना है कि कई छात्र स्कूल के बाद 6 से 8 घंटे तक कोचिंग में पढ़ते हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक संतुलन बिगड़ता है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि स्कूल सिलेबस और JEE-NEET जैसी परीक्षाओं के पैटर्न में बड़ा अंतर है।
JEE-NEET: कहां है समस्या?
समस्या स्कूल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के पर्यटन के बीच मौजूद गहरी खाई है। बोर्ड परीक्षाओं में जहां लिखित उतरो,सोच समझ और विश्लेषण आधारित सवालों पर जोर दिया जाता है और थ्योरी व व्याख्या को प्राथमिकता मिलती है,वहीं प्रवेश परीक्षाएं पूरी तरह ऑब्जेक्टिव और मल्टीप्ल चॉइस प्रशनो पर आधारित होती है। यही अंतर छात्रों को यह महसूस कराता है कि केवल स्कूल की पढ़ाई के सहारे JEE,NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं पास करना कठिन है,और इसी मजबूरी में वे कोचिंग क्लासेज का रुख करने लगते है।
JEE-NEET: इससे क्या होगा फायदा?
- छात्रों को अलग से कोचिंग की जरूरत कम होगी
- स्कूल में पढ़ाई गई चीजें ही परीक्षा में काम आएंगी
- पढ़ाई का दोहरा बोझ नहीं पड़ेगा
- आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को राहत मिलेगी
समिति का मानना है कि अगर स्कूल में ही मजबूत कॉन्सेप्ट क्लियर कर दिए जाएं, तो कोचिंग सिर्फ एक सहायक विकल्प बनकर रह जाएगी।
JEE-NEET: शिक्षकों की ट्रैंनिंग पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई स्कूलों में शिक्षक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए प्रयाप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं है।
JEE-NEET: कोचिंग क्यों आगे निकल गई ?
कोचिंग संस्थानों के आगे निकलने के कई कारण हैं –
परीक्षा केंद्रित पढ़ाई
नियमित टेस्ट और एनालिसिस
अनुभवी फैकल्टी
रैंक और रिजल्ट का आक्रामक प्रचार
जब स्कूल सिस्टम इन जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता,तो छात्र और अभिभावक स्वाभाविक रूप से कोचिंग की ओर आकर्षित होते है।
सरकार की यह पहल सिर्फ कोचिंग पर निंयत्रण की नहीं,बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को संतुलित बनाने की कोशिश है। अगर स्कूल मजबूत होंगे,पढाई व्यावहारिक और परीक्षा उन्मुख होगी,और छात्रों को मानसिक रूप से स्वस्थ माहौल मिलेगा,तो कोचिंग का दबदबा अपने आप हो जाएगा।
असली लक्ष्य यह होना चाहिएः कि शिक्षा छात्रों को सफल ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, आत्मविश्वासी और खुशहाल भी।