सीड्स ऑफ इनोसेंस का विजन: फर्टिलिटी केयर को बना रहा है सरल, स्मार्ट और इंसानी रूप से संवेदनशील

लेखक: नेशनल खबर हेल्थ डेस्क

भारत में लगभग 27.5 मिलियन जोड़े इनफर्टिलिटी (बांझपन) की समस्या का सामना कर रहे हैं। जब ये जोड़े हर तरफ से उम्मीद खोने लगते हैं, तब जाकर आईवीएफ (IVF) प्रक्रिया की तस्वीर सामने आती है। एक नए जीवन का सपना किसी ठंडी, निर्जीव प्रयोगशाला से शुरू नहीं होता। यह बहुत पहले, अक्सर देर रात को एक अकेले और शांत सवाल के साथ शुरू होता है— “हमारे साथ ही ऐसा क्यों नहीं हो रहा है?”

यह एक बेहद भारी सवाल है, और दुर्भाग्य से, किसी पेशेवर डॉक्टर से मिलने से पहले ऐसे जोड़ों को अक्सर मिथकों, अच्छी नीयत से दी जाने वाली भ्रामक सलाहों और भारी सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है

अनुभव और सच्चाई: डॉ. अदिति भटनागर के विचार

सीड्स ऑफ इनोसेंस (Seeds of Innocence) की सीनियर आईवीएफ कंसलटेंट, डॉ. अदिति भटनागर ने इन दर्द भरी कहानियों को सुनने में अपने जीवन का एक दशक से अधिक समय बिताया है। उन्होंने बार-बार मिल रही असफलताओं की निराशा और सेकंडरी इनफर्टिलिटी के खामोश दर्द को झेलने वाले अनगिनत परिवारों के साथ यह सफर तय किया है। उनका मानना है कि हमारी मेडिकल टेक्नोलॉजी भले ही बेहद आधुनिक और शानदार हो चुकी है, लेकिन इलाज में असली रुकावट विज्ञान की कमी नहीं, बल्कि स्पष्ट और सच्ची जानकारी का अभाव है

हाल ही में ‘नेशनल खबर’ के साथ हुई एक खास बातचीत में डॉ. भटनागर ने इसी मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने जटिल मेडिकल भाषा के पीछे छिपने के बजाय, आईवीएफ और इनफर्टिलिटी पर पूरी सहजता और इंसानियत के साथ चर्चा की। उन्होंने उन सवालों के जवाब दिए जिन्हें पूछने से लोग अक्सर डरते हैं, और यह याद दिलाया कि इनफर्टिलिटी कोई छिपाने वाला राज या शर्म की बात नहीं, बल्कि एक सामान्य मेडिकल चुनौती है जिसका समाधान संभव है

इसी सोच के साथ सीड्स ऑफ इनोसेंस काम कर रहा है, जहां जागरूकता को इलाज जितना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। देश भर में 35 से अधिक सेंटर्स और 78% की शानदार सफलता दर के साथ, इस संस्थान ने अब तक 21,000 से अधिक स्वस्थ बच्चों को इस दुनिया में लाने में मदद की है। लेकिन संस्थान से जुड़े लोगों का मानना है कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उनका असली मिशन यह सुनिश्चित करना है कि इलाज की इस लंबी प्रक्रिया में कोई भी जोड़ा खुद को अकेला या लाचार महसूस न करे

अस्पताल की चार दीवारों से बाहर निकली फर्टिलिटी केयर: HomeIVF

डॉ. अदिति भटनागर ने बताया कि फर्टिलिटी की हर यात्रा एक-दूसरे से अलग होती है। हर मरीज अपनी एक अलग मेडिकल हिस्ट्री और भावनात्मक अनुभवों के साथ आता है। कई बार इसके लिए एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, तो कई बार सिर्फ सही समय पर सटीक डायग्नोसिस और एक भरोसेमंद सहारे की आवश्यकता होती है

इसी विजन से प्रेरित होकर सीड्स ऑफ इनोसेंस, होमआईवीएफ (HomeIVF) और जेनेस्ट्रिंग्स लैब्स (Genestrings Labs) की संस्थापक व एमडी, डॉ. गौरी अग्रवाल ने HomeIVF की शुरुआत की। यह एक ऐसा कदम है जो मरीजों को बार-बार अस्पताल या क्लिनिक के चक्कर लगाने से राहत देता है। इसके तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह, ट्रीटमेंट प्लानिंग और मॉनिटरिंग सीधे मरीज के घर तक पहुंचाई जाती है, ताकि परिवार अपने निजी और आरामदायक माहौल में तनावमुक्त होकर इलाज की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकें

जेनेटिक कनेक्शन और Genestrings Diagnostics की पहल

सीड्स ऑफ इनोसेंस केवल सतही इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्या की असली जड़ (“क्यों”) तक पहुंचने का प्रयास करती है। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने उत्तर भारत की पहली समर्पित Genestrings Diagnostics Lab की स्थापना की है, जो फर्टिलिटी केयर में जेनेटिक टेस्टिंग को मुख्यधारा में लेकर आई है

डॉ. भटनागर ने स्पष्ट किया कि कई बार बार-बार असफलताओं की वजह हॉर्मोन या शारीरिक दिक्कतें नहीं होतीं, बल्कि वह हमारे डीएनए (DNA) में छिपी होती हैं। इन छिपे हुए आनुवंशिक कारणों की सटीक पहचान करके डॉक्टर अंदाजे के आधार पर किए जाने वाले इलाज से बच सकते हैं और सीधे साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) ट्रीटमेंट शुरू कर सकते हैं, जिससे मरीजों को बार-बार असफलता का दर्द नहीं झेलना पड़ता

डर को तथ्यों में बदलना

आधुनिक स्वास्थ्य सेवा का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को शिक्षित करना और जागरूक बनाना है। यही वजह है कि डॉ. भटनागर जैसी विशेषज्ञ जटिल चिकित्सा विज्ञान को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचा रही हैं

आज के दौर में जहां पारदर्शिता और भरोसा पाना मुश्किल होता जा रहा है, वहीं सीड्स ऑफ इनोसेंस यह साबित कर रहा है कि बेहतरीन नतीजे केवल अत्याधुनिक विज्ञान और सच्ची सहानुभूति के मेल से ही मिल सकते हैं। एक नए जीवन की शुरुआत किसी पॉजिटिव रिपोर्ट या सफल ट्रांसफर से बहुत पहले हो जाती है—उसकी शुरुआत सही समय पर सही बातचीत करने के साहस से होती है, और इसी दिशा में सीड्स ऑफ इनोसेंस एक मिसाल पेश कर रहा है

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