Kolkata HighCourt में ED की याचिका : मुख्यमंत्री Mamta Banerjee पर छापेमारी में हस्तक्षेप का आरोप

Report by : Sakshi Singh, National Khabar

Kolkata :- I-PAC कार्यालयों पर छापे,कोयला घोटाले की जांच और चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेजों को लेकर बढ़ा सियासी-कानूनी टकराव

Kolkata HighCourt में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर एक याचिका ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून व्यवस्था में नया मोड़ ला दिया हैं। इस याचिका में ईडी ने आरोप लगाया हैं कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2020 के कथित कोयला घोटाले से जुड़ी जांच के दौरान आई-पैक (I-PAC) के कार्यालयों पर चल रही छापेमारी में हस्तक्षेप किया। ईडी का दावा हैं कि छापे के दौरान मुख्यमंत्री स्वय वहां पहुंची और महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने साथ ले गई। इस गंभीर आरोप के बाद मामला अब न्यायिक जांच और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया हैं।

Kolkata:- मामला क्या हैं ?

प्रवर्तन निदेशालय 2020 के कथित कोयला घोटाले की जांच कर रहा हैं। इस घोटाले में अवैध खनन,कोयले की तस्करी और उससे जुड़े पैसों के लेन-देन के आरोप हैं। इसी सिलसिले में ईडी ने चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक के कुछ कार्यालओं पर छापेमारी की थी। आई-पैक वहीं संस्था हैं जो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए रणनीतिक सलाह दें रही हैं।

ईडी का कहना हैं कि छापेमारी के दौरान उन्हें कुछ ऐसे दस्तावेज मिले जो जांच के लिए बेहद अहम थे। एजेंसी के अनुसार,उसी समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंची और कथित तौर पर कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गई,जिससे जांच प्रभावित हुई।

Kolkata:- ईडी का आरोप : जांच में बाधा

ईडी ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा हैं कि किसी भी जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान इस तरह का हस्तक्षेप कानून के शासन के खिलाफ हैं। एजेंसी का तर्क हैं कि मुख्यमंत्री जैसे सवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का छापेमारी के समय मौके पर पहुंचना और दस्तावेज ले जाना जाँच को प्रभावित करने की श्रेणी में आता हैं। ईडी ने कोर्ट से इस पूरे घटनाक्रम की न्यायिक समीक्षा और उचित दिशा-निर्देश देने की मांग की हैं।

ईडी का यह भी कहना हैं कि यदि इस तरह की घटनाओं को रोका नहीं गया तो भविष्य में केंद्रीय जांच एजेंसियो के लिए स्वंतंत्र और निष्पक्ष जांच करना मुश्किल हो जाएगा।

Kolkata:- तृणमूल कांग्रेस की पलटवार

ईडी के आरोपों के जवाब में तृणमूल कांग्रेस ने भी कोलकाता हाईकोर्ट में एक अलग याचिका दायर की हैं। टीएमसी का दावा हैं कि ईडी ने छापेमारी के दौरान चुनाव से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। पार्टी का कहना हैं कि ये दस्तावेज पूरी तरह से चुनावी रणनीति से सबधित थे और उनका किसी भी कथित कोयला घोटाले से कोई लेना-देना नहीं हैं।

टीएमसी ने आरोप लगाया हैं कि ईडी का उदेशय जांच से ज्यादा राजनीतिक दबाव बनाना हैं,ताकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ पार्टी को कमजोर किया जा सके। पार्टी ने कोर्ट से मांग की हैं कि ऐसे दस्तावेज तुरंत वापस किए जाएं और ईडी को चुनावी प्रक्रिया में दख़ल देने जसे रोका जाए।

Kolkata:- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का रुख

हालांकि इस याचिका पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से सीधे तौर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पहले भी वह कई बार केंद्रीय एजेंसियों पर राजनीति से प्रेरित कार्रवाई करने का आरोप लगाती रही हैं। उनका कहना रहा है कि ईडी, सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल केंद्र सरकार विपक्षी दलों को डराने और दबाने के लिए कर रही है।

ममता बनर्जी यह भी कहती रही हैं कि पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता बढ़ जाती है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ठीक नहीं है।

Kolkata हाईकोर्ट में सुनवाई

इस पूरे मामले की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ कर रही है, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति सुव्रा घोष कर रही हैं। कोर्ट के सामने अब दो विपरीत दावे हैं—एक तरफ ईडी का आरोप कि जांच में बाधा डाली गई, और दूसरी तरफ टीएमसी का आरोप कि एजेंसी ने चुनावी दस्तावेज़ जब्त कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।

न्यायमूर्ति सुव्रा घोष ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत सुनवाई का संकेत दिया है। कोर्ट यह तय करेगा कि छापेमारी के दौरान वास्तव में क्या हुआ, कौन-से दस्तावेज़ जांच से जुड़े थे और क्या किसी पक्ष ने कानून का उल्लंघन किया।

Kolkata:- राजनीतिक मायने

यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में मुख्यमंत्री पर लगे आरोप सियासी तापमान को और बढ़ा सकते हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोल सकते हैं, वहीं टीएमसी इसे केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई के रूप में पेश कर सकती है।

इस विवाद से यह सवाल भी उठता हैं कि जांच एजेंसियो की स्वंत्रता ओर राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच सतुंलन कैसे बनाया जाए। यदि हाई कोर्ट ईडी के आरोपों को गंभीर मानता हैं, तो इसका असर मुख्यमंत्री की छवि ओर सरकार पर पड़ सकता हैं। वहीं यदि टीएमसी की दलीलें स्वीकार की जाती हैं, तो केंद्रीय एजेंसियो की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होंगे।

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