Shankaracharya : शक्ति अगर असुरों के हाथ आई तो

Report by : Sakshi Singh, National Khabar

Shankaracharya : शंकराचार्य विवाद के बीच सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा प्रहार

बयान जिसने सियासत को गरमा दिया

देश की राजनीति एक बार फिर धर्म,संस्कृति ओर सत्ता के सवालों के ईद-गिर्द घूमती नज़र आ रही है। शंकराचार्य के एक बयान को लेकर जहां पहले से ही राजनीतिक ओर वैचारिक बहस तेज थी,वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ताज़ा बयान ने इस विवाद को और धार दे दी है।

सीएम योगी का यह कथन— “अगर शक्ति असुरों के हाथ में चली गई, तो उसका इस्तेमाल समाज और राष्ट्र के विनाश के लिए होगा”—अब सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक टिप्पणी नहीं रह गया है, बल्कि यह एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

Shankaracharya : शंकराचार्य विवाद: सियासत की चिंगारी

शंकराचार्य के बयान को लेकर देशभर में प्रतिक्रियाओं का दौर चला। कुछ वर्गों ने इसे धर्म और परंपरा की रक्षा से जोड़कर देखा, तो कुछ ने इसे आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को सत्ता पक्ष पर हमला बोलने का अवसर बना लिया।

इसी पृष्ठभूमि में सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान सामने आया, जिसने विवाद को धार्मिक विमर्श से निकालकर सीधे राजनीतिक अखाड़े में ला खड़ा किया।

Shankaracharya : सीएम योगी का बयान: शब्दों में छुपा संदेश

सीएम योगी ने बिना किसी दल या नेता का नाम लिए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘शक्ति’ का अर्थ संरक्षण, धर्म और राष्ट्र की रक्षा से जुड़ा हुआ है। लेकिन अगर यही शक्ति “असुर प्रवृत्तियों” के हाथ में चली जाए, तो उसका उपयोग विनाशकारी हो सकता है।

योगी के इस बयान को उनके समर्थक सनातन परंपरा की वैचारिक व्याख्या मान रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहा है।

Shankaracharya : ‘असुर’ शब्द और उसका राजनीतिक अर्थ

योगी आदित्यनाथ के बयान में प्रयुक्त ‘असुर’ शब्द पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। भारतीय ग्रंथों में असुरों को अधर्म, अहंकार और विनाश की प्रवृत्ति का प्रतीक माना गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी का इशारा उन ताकतों की ओर है, जिन्हें वह संस्कृति-विरोधी और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाला मानते हैं।

यह बयान सीधे-सीधे विपक्ष को यह संदेश देता है कि सत्ता उनके हाथों में जाना देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।

Shankaracharya : विपक्ष पर ‘संस्कृति विरोधी सोच’ का आरोप

सीएम योगी ने विपक्ष पर “संस्कृति विरोधी सोच” और “तुष्टिकरण की राजनीति” करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विपक्ष सत्ता पाने के लिए समाज को बांटने का काम करता है और भारत की मूल सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश करता है।

योगी आदित्यनाथ लंबे समय से इस लाइन पर राजनीति करते रहे हैं कि उनकी सरकार “राष्ट्रवादी” और “संस्कृति आधारित” है, जबकि विपक्ष “वोट बैंक” की राजनीति में उलझा हुआ है।

Shankaracharya : धर्म और राजनीति का संगम

सीएम योगी का यह बयान एक बार फिर धर्म और राजनीति के घनिष्ठ संबंध को सामने लाता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहां धर्म और आस्था का राजनीति पर गहरा असर है, ऐसे बयान का राजनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

योगी की राजनीति का बड़ा आधार यही रहा है कि वह खुद को केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक योद्धा के रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह बयान उसी छवि को और मजबूत करता है।

Shankaracharya : धार्मिक बयान या राजनीतिक रणनीति?

विपक्ष का आरोप है कि सीएम योगी इस तरह के बयान देकर असली मुद्दों—महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता—से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि यह बयान देश की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह बयान आने वाले चुनावी माहौल को ध्यान में रखकर दिया गया है, जहां धर्म और संस्कृति एक बार फिर केंद्रीय मुद्दे बन सकते हैं।

Shankaracharya : शंकराचार्य विवाद से सीएम योगी का जुड़ाव

हालांकि सीएम योगी ने सीधे तौर पर शंकराचार्य के बयान का समर्थन या विरोध नहीं किया, लेकिन उनके शब्दों ने साफ कर दिया कि वह इस विवाद को अपने वैचारिक एजेंडे से जोड़कर देख रहे हैं।

यह बयान इस बात का संकेत देता है कि भाजपा और उसके नेता शंकराचार्य विवाद को केवल धार्मिक बहस नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं।

Shankaracharya : विपक्ष की संभावित प्रतिक्रिया

सीएम योगी के बयान के बाद अब सबकी नजर विपक्ष पर टिकी है। सवाल यह है कि विपक्ष इसे किस तरह लेता है—
क्या वह इसे धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाकर पलटवार करेगा,
या फिर सीधे योगी सरकार की नीतियों और प्रशासन पर हमला तेज करेगा?

पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे बयानों के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज होती है, जिससे मुद्दा और बड़ा रूप ले लेता है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में असर

उत्तर प्रदेश देश की राजनीति का केंद्र रहा है है। यहां दिए गए बयान अवसर राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करते है। सीएम योगी का यह बयान न केवल राज्य की राजनीति,बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा के वैचारिक रुख को मजबूत करता हैं। यह संदेश साफ हैं-भाजपा खुद को “सरक्षक” की भूमिका में ओर विपक्ष को “विनाशकारी शक्तियों” के रूप में पेश करना चाहती हैं।

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