
Report by : Sakshi Singh, National Khabar
- दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट से पहले होटल इंडस्ट्री में हलचल
- लक्ज़री स्टे बना लग्ज़री कार जितना महंगा
AI : पहली बार हो रहे वैश्विक AI आयोजन ने होटल इंडस्ट्री में मचाई हलचल
नई दिल्ली :
दिल्ली में पहली बार आयोजित होने जा रही अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इम्पैक्ट समिट ने राजधानी के होटल उद्योग में भूचाल ला दिया है। समिट से पहले ही पांच सितारा और लक्ज़री होटलों के रूम चार्ज आसमान छूने लगे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि चार दिन के ठहराव का खर्च अब एक लक्ज़री कार की कीमत जैसा महसूस हो रहा हैं। जहा एक और आम यात्रियों और छोटे कारोबारी मेहमानों के लिए यह बड़ी आर्थिक चुनौती बनकर उभरा हैं,वही दूसरी ओर होटल इंडस्ट्री ओर स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए इसे सुनहरे मौके के तौर पर देखा जा रहा हैं।
AI इम्पैक्ट समिट : दिल्ली के लिए एक ऐतिहासिक आयोजन
AI इम्पैक्ट समिट को भारत में अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा आयोजन माना जा रहा हैं। इस समिट में देश-विदेश से टेक-लीडर्स,स्टार्टअप फाउंडर्स,नीति-निर्माता,निवेशक और रेसर्चेर्स शामिल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधिमडलो की मौजूदगी ने दिल्ली को कुछ दिनों के लिए ग्लोबल टेक हब में बदल दिया हैं।
यही वजह हैं कि आयोजन से हफ्तों पहले ही दिल्ली के प्रमुख इलाको-कनॉट प्लेस,ऐरोसिटी,साउथ दिल्ली और द्वारका-के होटलों में बुकिंग का दबाव अचानक बढ़ गया।
पांच सितारा होटलों के किराए क्यों हुए बेकाबू ?
AI समिट के दौरान मांग और आपूर्ति के असंतुलन ने होटल रूम के दामों को नई ऊचाइयो पर पंहुचा दिया हैं। जहां सामान्य दिनों में किसी पांच सितारा होटल का एक कमरे का किराया 15 से 25 हज़ार रुपयेः प्रति रात रहता था,वहीं समिट के दौरान यही किराया 60 हज़ार से लेकर 1 लाख रूपये प्रति रात तक पहुंच गया हैं।
चार दिन के स्टे के लिए कुल खर्च 3 से 5 लाख रूपये तक पहुंचना कई लोगों को हैरान कर रहा हैं। होटल इंडस्ट्री का तर्क हैं कि यह पूरी तरह “डिमांड-सप्लाई” का मामला हैं।
छोटे होटलों ओर गेस्ट हाउस की भी चांदी
केवल लक्ज़री होटल ही नहीं,बल्कि तीन और चार सितारा होटलों,बुटीक स्टे और गेस्ट हाउस की भी जमकर डिमांड बढ़ी हैं। जो कमरे आम दिनों में 3 से 5 हज़ार रूपये में मिल जाते थे,उनके रेट भी 10 से 15 हज़ार रूपये तक पहुंच चुके हैं।
इसका असर एयरबीएनबी और होम-स्टे जैसे विकल्पों पर भी देखने को मिल रहा है। कई मकान मालिकों ने समिट के दौरान शॉर्ट-टर्म रेंटल के दाम दोगुने कर दिए हैं।
आम यात्रियों और छोटे कारोबारियों पर असर
होटल किरायों में इस तेज बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा हैं,जो किसी अन्य काम से दिल्ली आने की योजना बना रहे थे। छोटे स्टार्टअप फ्रीलांसर ,छात्र और मध्यम वर्गीय बिज़नेस विजिटर्स के लिए राजधानी में ठहरना बेहद महंगा हो गया हैं।
कई लोगों ने मज़बूरी में दिल्ली के आसपास के शहरों और नोएडा,गाजियाबाद और गुरुग्राम-में ठहरने का विकल्प चुना हैं।
होटल इंडस्ट्री के लिए सुनहरा मौका
होटल कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना हैं कि AI इम्पैक्ट समिट जैसे आयोजन दिल्ली के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए बेहद फायदेमद साबित हो सकते हैं। कोविड के बाद जिस तरह उद्योग धीरे-धीरे पटरी पर लौटा हैं,ऐसे हाई प्रोफाइल अंतराष्ट्रीय इवेंट्स से राजस्व में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा हैं।
होटल एसोसिएशनों के मुताबिक, समिट के दौरान ऑक्यूपेंसी रेट लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो सामान्य दिनों में 60 से 70 प्रतिशत के आसपास रहता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
AI समिट का फायदा केवल होटलों तक सीमित नहीं है। टैक्सी सर्विस, लोकल ट्रांसपोर्ट, रेस्तरां, कैफे, इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां और टूर ऑपरेटर्स को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
हजारों अस्थायी और स्थायी रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। ड्राइवरों, वेटर्स, सिक्योरिटी स्टाफ और टेक्निकल सपोर्ट टीम्स की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
हालांकि होटल किरायों में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान किरायों पर किसी तरह की गाइडलाइन होनी चाहिए, ताकि आम लोगों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े।
कुछ सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए सरकार को वैकल्पिक ठहराव व्यवस्थाएं—जैसे कन्वेंशन हॉस्टल या बजट स्टे—भी विकसित करनी चाहिए।
दिल्ली की वैश्विक छवि को मिल रहा फायदा
AI इम्पैक्ट समिट ने दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी मजबूत किया है। दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों के जरिए भारत की टेक्नोलॉजी क्षमता, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल विज़न को वैश्विक मंच मिल रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते हैं, तो दिल्ली लंबे समय में सिंगापुर, दुबई और लंदन जैसे टेक-कॉन्फ्रेंस हब की श्रेणी में आ सकती है।
भविष्य की उम्मीदें और चुनौतियां
AI इम्पैक्ट समिट ने यह साफ कर दिया है कि बड़े टेक इवेंट्स न सिर्फ तकनीकी चर्चा का मंच होते हैं, बल्कि वे शहर की अर्थव्यवस्था को भी गहराई से प्रभावित करते हैं।
होटल किरायों में बढ़ोतरी जहां एक ओर आलोचना का विषय है, वहीं दूसरी ओर यह आर्थिक गतिविधियों के तेज़ होने का संकेत भी देती है।
अब चुनौती यह है कि भविष्य में विकास और आम जनता की पहुंच के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।