
Report by : Sakshi Singh, National Khabar
- Delhi एसआईआर के विरोध में दिल्ली पहुँचीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
- ममता बनर्जी के साथ सैकड़ों लोगों का दिल्ली आगमन
Delhi : बंग भवन के पास ममता बनर्जी समर्थको और दिल्ली पुलिस के बीच तनाव,चुनाव आयोग से मिलने पहुंची मुख्यमंत्री
Delhi में सोमवार को उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई,जब पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभ्यास को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजधानी पहुँची। इस दौरे का मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकत कर एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे गंभीर आरोपों पर अपनी बात रखना था। लेकिन इस बीच बंग भवन और कैलाश कॉलोनी क्षेत्र में जो घटनाक्रम हुआ,उसने पूरे मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया
Delhi : एसआईआर के विरोध में दिल्ली पहुँची ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर अभ्यास को लेकर तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही हैं कि इसके जरिए मतदाता सूची में हेरफेर की जा रही हैं और खास वर्गों को निशाना बनाया जा रहा हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना हैं कि यह अभ्यास लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला हैं। इन्हीं आरोपों और शिकायतों को लेकर वह दिल्ली पहुँची,जहां उनकी मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात प्रस्तावित थी।
ममता बनर्जी के साथ पश्चिम बंगाल से सैकड़ों लोग भी दिल्ली लाए गए थे। ये सभी लोग खुद को एसआईआर से प्रभावित बताते हैं और उनका कहना हैं कि वे अपनी शिकायतें सीधे चुनाव आयोग के सामने रखना चाहते थे। इन्हीं लोगों को दिल्ली के कैलाश कॉलोनी स्थित एक गेस्ट हाउस में ठहराया गया था।
Delhi पुलिस पर रोके जाने का आरोप
सोमवार सुबह हालात उस समय बिगड़ गए,जब बंगाल से आए लोगों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने कैलाश कॉलोनी स्थित गेस्ट हाउस के गेट पर बैरिकेडिंग कर दी। लोगों का कहना हैं कि उन्हें बाहर निकलने से रोका गया और शिकायतें लेकर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान बंग भवन के पास तनाव की स्थिति बन गई और पुलिस तथा तृणमूल समर्थको के बीच कहासुनी भी हुई।
बंगाल से आए लोगों का आरोप हैं कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे,लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन गेस्ट हाउस के भीतर ही सीमित कर दिया। उनका कहना था कि यह न केवल उनके अधिकारों का हनन हैं,बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा भी हैं।
Delhi : तृणमूल सांसदों का हस्तक्षेप
घटना की सूचना मिलते ही तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद मौके पर पहुँचे। सांसद डोला सेन,बप्पी हलदर,काकुलु घोष सहित अन्य नेताओं ने दिल्ली पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। सांसदों ने आरोप लगाया कि बंगाल से आए लोगों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा हैं और उन्हें जानबूझकर रोका जा रहा हैं।
करीब कुछ घंटो तक चले तनाव और बातचीत के बाद स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ। सांसदों के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने बंगाल से आए
लोगों को कैलाश कॉलोनी स्थित गेस्ट हाउस से हटाकर ग्रेटर कैलाश-दो स्थित एक अन्य गेस्ट हाउस में शिफ्ट करने की अनुमति दी। इसके बाद लोगों को राहत मिली,हालांकि पूरे घटनाक्रम को लेकर नाराज़गी बनी रही।
Delhi : संसद तक पहुँचा मामला
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने संसद में भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने बंगाल के कथित एसआईआर पीड़ितों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें अपनी शिकायतें रखने से रोका गया। सागरिका घोष ने इसे संघिये ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
उनका कहना था कि एक राज्य के नागरिक अगर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने राजधानी आते हैं,तो उन्हें रोकना असवैधानिक हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा।
Delhi : एसआईआर को लेकर गंभीर आरोप
तृणमूल कांग्रेस का आरोप हैं कि पश्चिम बंगाल में चल रहा एसआईआर अभ्यास निष्पक्ष नहीं हैं। पार्टी का कहना हैं कि इसके जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने में भेदभाव किया जा रहा हैं। ममता बनर्जी पहले भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को पत्र लिख चुकी हैं और अब खुद दिल्ली आकर सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने का फैसला किया।
टीएमसी का दावा हैं कि एसआईआर के नाम पर गरीब,अल्पसंख्यक और प्रवासी मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि अगर यह प्रक्रिया पारदर्शी होती, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग शिकायत लेकर दिल्ली नहीं आते।
Delhi : राजनीतिक मायने और आगे की राह
दिल्ली में हुआ यह टकराव केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस इसे लोकतंत्र और राज्यों के अधिकारों का मुद्दा बता रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
ममता बनर्जी की मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात को इस पूरे विवाद में अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में वह एसआईआर को तत्काल रोकने या उसमें बदलाव की मांग कर सकती हैं। वहीं, यह भी देखना होगा कि चुनाव आयोग इस पर क्या रुख अपनाता है।