January में 800 से ज्यादा लोग लापता : अफवाह या हकीकत ?

Report by : Sakshi Singh, National Khabar

January : दिल्ली पुलिस का बयान, आंकड़ों की सच्चाई और सिस्टम की पूरी तस्वीर

देश की राजधानी दिल्ली को आमतौर पर सुरक्षा, प्रशासन और आधुनिक व्यवस्था का प्रतीक माना जाता हैं। लेकिन जनवरी 2026 में सामने आएएक आंकड़े ने पूरे शहर में चिंता और बहस दोनों को जन्म दे दिया। सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैलने लगा कि सिर्फ जनवरी महीने में दिल्ली से 800 से ज्यादा लोग लापता हो गए हैं, जिनमें करीब 140 बच्चे शामिल हैं।

इन आंकड़ों के वायरल होते ही लोगों के मन में डर, असुरक्षा और सवाल पैदा होने लगे। आखिर इतने लोग अचानक कैसे गायब हो सकते हैं? क्या दिल्ली सुरक्षित नहीं रही? क्या पुलिस कुछ छिपा रही है?

इन्हीं सवालों के बीच अब दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है।

January : सोशल मीडिया पर फैले आंकड़े और बढ़ता डर

जनवरी के आखिरी हफ्तों में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट और वीडियो वायरल होने लगे, जिनमें दावा किया गया कि दिल्ली में लापता लोगों की संख्या खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है।
पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चे गायब हो रहे हैं, और प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए है।

इन दावों का असर यह हुआ कि आम नागरिकों में डर का माहौल बन गया। माता-पिता बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखे, वहीं कई लोगों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

January : दिल्ली पुलिस का आधिकारिक जवाब

इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस ने अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए एक स्पष्ट बयान जारी किया है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) संजय त्यागी ने कहा कि राजधानी में लापता व्यक्तियों को लेकर जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे भ्रामक और अधूरी जानकारी पर आधारित हैं।

पुलिस के अनुसार,

“जनवरी 2026 में लापता व्यक्तियों के मामलों की संख्या पिछले वर्षों की समान अवधि की तुलना में कम रही है। इसमें किसी भी तरह की असामान्य वृद्धि दर्ज नहीं की गई है।”

पुलिस ने साफ किया कि सोशल मीडिया पर फैल रहे आंकड़ों को बिना आधिकारिक पुष्टि के साझा किया जा रहा है, जिससे अनावश्यक डर फैल रहा है।

January : क्या सच में बढ़े हैं लापता मामलों के आंकड़े?

दिल्ली पुलिस द्वारा साझा किए गए आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, हर साल एक निश्चित संख्या में लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट दर्ज होती है।
इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जहां व्यक्ति कुछ समय बाद स्वयं वापस लौट आता है या परिवार से संपर्क स्थापित हो जाता है।

पुलिस का कहना है कि:

कई बच्चे नाराज़ होकर घर छोड़ देते हैं
कुछ लोग काम, रिश्तों या मानसिक दबाव के कारण चले जाते हैं
बड़ी संख्या में मामले 24 से 72 घंटे के भीतर सुलझा लिए जाते हैं

इसलिए केवल “लापता रिपोर्ट दर्ज होना” अपराध या अपहरण का प्रमाण नहीं होता।

January : बच्चों के मामलों पर विशेष ध्यान

दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
जैसे ही किसी नाबालिग के लापता होने की सूचना मिलती है, तुरंत तयशुदा SOP (Standard Operating Procedure) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।

इसमें शामिल हैं:

आसपास के इलाकों में तलाशी
CCTV फुटेज की जांच
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शेल्टर होम्स में सूचना
जरूरत पड़ने पर विशेष टीमों का गठन

पुलिस का दावा है कि बच्चों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की देरी नहीं की जाती।

January : अफवाह फैलाने वालों पर सख्त रुख

दिल्ली पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि जो लोग बिना पुष्टि के डर फैलाने वाली जानकारी साझा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस के मुताबिक:

“भ्रामक सूचनाएं न केवल जनता में भय पैदा करती हैं, बल्कि पुलिस के काम में भी बाधा बनती हैं।”

इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करें।

January : लापता व्यक्ति की रिपोर्ट कैसे करें?

दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि नागरिकों के पास लापता व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कई आसान विकल्प मौजूद हैं।

रिपोर्ट दर्ज कराने के तरीके:

नजदीकी स्थानीय पुलिस थाने में जाकर
दिल्ली पुलिस की ऑनलाइन वेबसाइट पर फॉर्म भरकर
ERSS-112 हेल्पलाइन पर कॉल करके

इन माध्यमों से शिकायत दर्ज कराने में किसी भी तरह की देरी नहीं होती और मामला तुरंत सिस्टम में दर्ज हो जाता है।

January : पारदर्शिता और निष्पक्षता का दावा

पुलिस ने साफ कहा है कि अपराध और लापता मामलों की रिपोर्टिंग पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होती है।
डिजिटल रिकॉर्ड, ऑटोमेटेड सिस्टम और मल्टी-लेवल मॉनिटरिंग के चलते आंकड़ों में छेड़छाड़ या जानकारी छुपाना संभव नहीं है।

पुलिस का कहना है कि अगर किसी नागरिक को किसी भी स्तर पर लापरवाही महसूस होती है, तो उसके लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की व्यवस्था भी मौजूद है।

January : जनता की भूमिका भी अहम

इस पूरे मामले ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया के दौर में जिम्मेदार नागरिक बनना कितना जरूरी है।
अधूरी जानकारी, डरावने हेडलाइन और बिना पुष्टि वाले आंकड़े समाज में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।

January : दिल्ली पुलिस और विशेषज्ञों दोनों का मानना है कि:

घबराने के बजाय सतर्क रहना जरूरी है
अफवाहों से बचना चाहिए
सही जानकारी साझा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है

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