
- ट्रंप का नया ऐलान: ईरान से व्यापार करने वालों पर 25% टैरिफ
- सेंसेक्स का हाल
- निफ्टी भी नहीं बच पाया
- ट्रंप की धमकी से क्यों डरे निवेशक?
- भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?
- भारत-ईरान के बीच व्यापारिक संबंध
- ईरान से भारत को आयात
- बाजार पर आगे क्या असर पड़ सकता है?
- निवेशकों के लिए क्या है सलाह ?
Stock Market Crash 2026: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने जिस तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की, उसने निवेशकों में उत्साह भर दिया था। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। कुछ ही समय में बाजार की दिशा पूरी तरह बदल गई और सेंसेक्स-निफ्टी तेज गिरावट के साथ लाल निशान में आ गए। इस अचानक आई गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर किया गया नया और सख्त ऐलान बड़ी वजह माना जा रहा है। शब्द “Stock Market Crash 2026” से जुड़ी घटनाओं की निगरानी करते रहना चाहिए। बाजार का ध्यान “Stock Market Crash 2026” पर होगा।
ट्रंप का नया ऐलान: ईरान से व्यापार करने वालों पर 25% टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट के जरिए बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश पर 25 फीसदी टैरिफ लगाएगा। ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू होगा और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने लिखा कि जो भी देश “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान” के साथ व्यापार करेगा, उसे अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यापार पर 25% अतिरिक्त टैरिफ चुकाना होगा। इस बयान ने वैश्विक बाजारों में तनाव पैदा कर दिया और निवेशक जोखिम भरे सौदों से दूरी बनाने लगे।
सेंसेक्स का हाल
समय के साथ-साथ, “Stock Market Crash 2026” के संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, नीति निर्धारण में बदलाव हो सकते हैं। बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,878.17 के मुकाबले तेजी के साथ 84,000 के पार खुला | शुरुआती कारोबार में यह 84,258 अंक तक पहुंच गया| लेकिन अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ा और सेंसेक्स 250 अंक से ज्यादा गिरकर 83,616 के स्तर तक आ गया
निफ्टी भी नहीं बच पाया
एनएसई निफ्टी ने 25,790 के पिछले बंद से ऊपर 25,897 पर ओपनिंग की, कुछ ही देर में यह फिसलकर 25,709 के आसपास आ गया इस तेज उतार-चढ़ाव ने साफ कर दिया कि बाजार ट्रंप के बयान को लेकर काफी संवेदनशील है।
ट्रंप की धमकी से क्यों डरे निवेशक?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप का बयान सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है।
- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की आशंका
- पश्चिम एशिया में अस्थिरता का खतरा
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना
- ग्लोबल ट्रेड वॉर का डर
इन सभी कारणों से निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार में गिरावट देखने को मिली।
भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?
इस बिंदु पर, “Stock Market Crash 2026” को ध्यान में रखते हुए, ट्रंप का बयान पर्याप्त चिंताओं को जन्म देता है इसलिए, निवेशकों को “Stock Market Crash 2026” के संदर्भ में सतर्क रहना चाहिए।
पहली नजर में देखा जाए तो भारत पर इस फैसले का सीधा असर सीमित दिखता है। दरअसल, अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भारत ने 2019 से ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद भारत और ईरान के बीच कई अन्य वस्तुओं का व्यापार अब भी जारी है।
भारत-ईरान के बीच व्यापारिक संबंध
भारत ईरान को कई जरूरी सामान निर्यात करता है, जिनमें शामिल हैं: चावल, चाय, चीनी, दवाइयां और फार्मास्यूटिकल्स, कृत्रिम फाइबर, इलेक्ट्रिक मशीनरी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी |
यहां तक कि “Stock Market Crash 2026” की स्थिति में, निवेशकों को अपने निर्णयों के बारे में सोच-समझकर काम करना चाहिए। दूसरी ओर, “Stock Market Crash 2026” के दौरान वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
ईरान से भारत को आयात
वहीं ईरान से भारत में आयात की जाने वाली प्रमुख वस्तुएं हैं: सूखे मेवे, अकार्बनिक और कार्बनिक रसायन, कांच के बर्तन और ग्लासवेयर | यदि अमेरिका अपने टैरिफ फैसले को सख्ती से लागू करता है, तो इन व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
बाजार पर आगे क्या असर पड़ सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि:
- विदेशी निवेश (FII)
- रुपये की चाल
- कच्चे तेल की कीमतें
- महंगाई
निवेशकों को “Stock Market Crash 2026” की चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए।
पर भी देखने को मिल सकता है। खासकर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेशक ऐसे समय पर सतर्क रुख अपनाते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह ?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फ़िलहाल निवेशकों को घबराने की जरुरत नहीं है,लेकिन सावधानी जरुरी है
- शार्ट टर्म में उतार चढ़ाव बना रह सकता है
- लंबी अवधि के निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस रखे
- वैश्विक घटनाक्रमो पर नज़र बनाए रखें
- बिना सोचे-समझे बिकवाली से बचें
यह भी ध्यान देने योग्य है कि “Stock Market Crash 2026” की संभावनाओं को देखते हुए, भारत को भी सावधानी बरतनी होगी विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को “Stock Market Crash 2026” के संदर्भ में सतर्क रहने की आवश्यकता है। विश्लेषकों का मानना है कि “Stock Market Crash” के संदर्भ में अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि:
- विदेशी निवेश (FII)
- रुपये की चाल
- कच्चे तेल की कीमतें
- महंगाई
पर भी देखने को मिल सकता है। खासकर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेशक ऐसे समय पर सतर्क रुख अपनाते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फ़िलहाल निवेशकों को घबराने की जरुरत नहीं है,लेकिन सावधानी जरुरी है
- शार्ट टर्म में उतार चढ़ाव बना रह सकता है
- लंबी अवधि के निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस रखे
- वैश्विक घटनाक्रमो पर नज़र बनाए रखें
- बिना सोचे-समझे बिकवाली से बचें