
लेखक : संजय पांडेय
नई दिल्ली: डॉ. सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी से जुड़े एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) के कर्ज विवाद में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिन कंपनियों ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से ऋण लिया था, उन्होंने अब पूरे बकाये को चुकाने के लिए आधिकारिक तौर पर सेटलमेंट का प्रस्ताव सौंप दिया है। इस नए प्रस्ताव की सबसे खास बात यह है कि कर्जदार कंपनियां मूलधन का पूरा हिस्सा 10% ब्याज के साथ चुकाने पर राजी हो गई हैं।
क्या है पूरा मामला और किन कंपनियों पर है बकाया?
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से एस्सेल ग्रुप से जुड़ी विभिन्न कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कर्ज लिया था:
- वसंत सागर प्रॉपर्टीज लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड: इन दोनों कंपनियों ने मिलकर लगभग 500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
- डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्पिरिट इंफ्रापावर प्रोजेक्ट्स: इन कंपनियों ने भी एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से लगभग 480 करोड़ रुपये का लोन लिया था।
अब इन चारों कंपनियों ने आगे आकर एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड को 100 प्रतिशत मूलधन और 10 फीसदी ब्याज के साथ पूरा भुगतान करने का प्रस्ताव पेश किया है।
डॉ. सुभाष चंद्रा की भूमिका: स्पष्टीकरण
इस पूरे वित्तीय प्रकरण में यह बात विशेष रूप से सामने आई है कि संबंधित ऋण सीधे तौर पर इन कंपनियों द्वारा लिए गए थे, न कि व्यक्तिगत रूप से डॉ. सुभाष चंद्रा द्वारा। डॉ. चंद्रा ने इन व्यावसायिक कर्जों के संबंध में केवल पर्सनल गारंटर (व्यक्तिगत गारंटर) की भूमिका निभाई थी।
सूत्रों का मानना है कि कंपनियों की ओर से आए इस नए सेटलमेंट प्रस्ताव के बाद, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और इस हाई-प्रोफाइल कर्ज विवाद से जुड़े कानूनी घटनाक्रमों में एक नया मोड़ आ सकता है। बाजार और वित्तीय गलियारों में इस प्रस्ताव को एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें कर्जदार कंपनियां पूरे मूलधन के साथ ब्याज भुगतान की बात कह रही हैं।