कब है षटतिला एकादशी 5 या 6 फरवरी को, जानिए महत्व और पुजा का शुभ मुहूर्त।…

हिंदू धर्म में एकादशी भगवान विष्‍णु को समर्पित की गई हैं. माघ महीने में आने वाला कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता हैं. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से और व्रत रखने से सारी मनोकामनाये की पूर्ति होती है. साथ ही माघ महीने की इस एकादशी के दिन तिल का उपयोग करने से बहुत लाभ होता है. इसमें तील का महत्व है इसलिए इसे पीषटतिला एकादशी कहते हैं. इस एकादशी में जो लोग भगवान विष्‍णु की पूजा करते है और उन्‍हें तिल अर्पित करते है, उनके सारे कष्‍ट दूर हो जाते हैं. जीवन में सुख-समृद्धि, हमेशा बनी रहती है

Written By: Rishu Panday, Edited By: Pragya Jha

हाईलाइट


. 6 फरवरी को है एकादशी

.षटतिला एकादशी व्रत का पारण समय – सुबह 07:14 min पर है

. इस व्रत में काले तिल का उपयो काफी लाभदायक है ।

.पीषटतिला एकादशी करने से घर में सुख समृद्धि आती है।

षटतिला एकादशी डेट और शुभ मुहूर्त।


पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी 5 फरवरी को शाम 05 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 6 फरवरी को शाम 04 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।

षटतिला एकादशी उपयोग होने वाले पूजा सामग्री ।


इसमें गंगाजल,चौकी ,पीला कपड़ा ,आम के पत्ते कुमकुम ,फूल मिठाई, अक्षत ,पंचमेवा ,धूप ,दीप ,फल भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी साधना किया जाता है।

षटतिला एकादशी पूजा विधि


षटतिला एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मंदिर की सफाई करें। अब चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। भगवान विष्णु को चंदन और हल्दी, कुमकुम से तिलक करें और दीपक जलाकर आरती करें। अब भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और विष्णु का चालीसा का पाठ करें। अब खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल को शामिल करें। इसके पश्चात लोगों में प्रसाद का वितरण करें।

षटतिला एकादशी का महत्व …


शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण,युधिष्ठिर को इस एकादशी का महत्व बताते हुए कहते हैं कि हे नृपश्रेष्ठ!माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी ‘षटतिला’ या ‘पापहारिणी’के नाम से विख्यात है,जो सब पापों का नाश करने वाली है। इस दिन तिल से बने हुए व्यंजन या तिल से भरा हुआ पात्र दान करने से अंनत पुण्यों की प्राप्ति होती है। पदमपुराण में वर्णित है कि तिलों के बोने पर उनसे जितनी शाखाएं पैदा होती हैं, उतने हजार वर्षों तक दान करने वाला व्यक्ति स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है। षटतिला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति होती है और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति प्राप्त होती है। जितना पुण्य कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या और स्वर्ण दान से मिलता है, उससे अधिक फल प्राणी को षटतिला एकादशी का व्रत करने से मिलता है। इस व्रत से परिवार के विकास में सहायता होता है

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