Wednesday, May 29, 2024
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प्रधानमंत्री मोदी के 72 साल

रिपोर्ट :-  प्रज्ञा झा

“17 सितंबर 1950” यही वो दिन था ,जिस दिन हमारे देश के 14वे प्रधानमंत्री का जन्म हुआ। किसको पता था, की एक मध्यम वर्ग के परिवार में जन्म हुआ एक आम सा बच्चा पर ,जिसकी सोच दुनिया के बड़े दिग्गजों को हरा दे। नरेंद्र दामोदरदास मोदी एक दिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का मुखिया बनेगा । लेकिन इस पद को हासिल करने के लिए 72 साल तक किए गए , वो परिश्रम जिसे शायद दुनिया का हर इंसान जानना चाहता है।  क्या थी इन 72 सालों में मोदी की पूरी कहानी यह पढ़िए।

खबर विस्तार से निजी जीवननरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के बड़नगर में हुआ था। इनके पिता का नाम “दामोदरदास मूलचंद मोदी” और माता का नाम “हीराबेन मोदी” है। बचपन से ही मोदी दुनिया से अलग सोच रखने वाले और कुछ बड़ा काम करने का सपना देखने वाले बच्चों में शामिल थे। लेकिन एक मध्यम वर्ग के परिवार में जन्म लेने के कारण उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। परंतु इन संघर्षों के बीच भी नरेंद्र मोदी ने हार नहीं मानी। मोदी ने 1967 में गुजरात के बड़नगर से ही अपने उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की। जिस दौरान उन्होंने स्कूल के साथ बड़नगर रेलवे स्टेशन पर अपने पिता के साथ चाय बेचने में भी हाथ बटाया।

लेकिन इस बात पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है । कि क्या वह सच में चाय बेचा करते थे। उस वक्त में ज्यादा ट्रेनें बड़नगर स्टेशन पर नहीं आती थी। सुबह और दोपहर के समय में ही सिर्फ दो ट्रेनें आती थी। जिसमें स्कूल से 1 घंटे की छुट्टी मिलने पर नरेंद्र मोदी भाग कर स्टेशन पहुंचा करते थे और वहां ट्रेनों के डिब्बों में चाय देने के बाद वह भाग कर अपना बस्ता उठाकर स्कूल जाया करते थे। स्कूल में उन्हें शिक्षकों ने औसत छात्र के रूप में ही हमेशा देखा। लेकिन उनका रुझान नाटकीय प्रदर्शन की तरफ ज्यादा बताया जाता था मोदी हमेशा अपने से ज्यादा उम्र और अनुभव वाले पात्रों की भूमिका निभाना पसंद करते थे।बरहाल इसी बीच 8 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी को (आर एस एस) यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मिलवाया गया। युवावस्था में मोदी छात्र संगठन “अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद” में भी शामिल हुए। किशोरावस्था में अपने भाई के साथ मिलकर चाय की दुकान चला चुके नरेंद्र मोदी ने वडनगर से ही अपने स्कूली शिक्षा पूरी की और आर एस एस के कार्यकर्ता रहते हुए 1980 में उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान की और डिग्री हासिल की। इन सब चीजों के बीच 18 वर्ष की उम्र में नरेंद्र मोदी की शादी जशोदाबेन मोदी से करा दी गई यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चला और 1968 में यह दोनों अलग हो गए। 18 साल की उम्र में ही अपने जीवन का अर्थ समझने के लिए उन्होंने अपना घर त्याग दिया और उत्तर भारत की सैर पर निकल गए वहां पर अलग-अलग मठों में ज्ञान की प्राप्ति और जीवन का सार समझने के प्रयास में जुटे हुए थे। जहां उन्हें यह समझ में आया कि उनका जन्म साधु के वेश में रहने के लिए नहीं बल्कि देश सेवा के लिए हुआ है जिसके बाद से उनके राजनीतिक यात्रा शुरू हुई।


राजनीतिक यात्रा मोदी की असल राजनीतिक यात्रा एक व्यस्क के रूप में “1971” से शुरू हुई जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ के सत्याग्रह में शामिल हुए ताकि जंग के लिए तैयार किया जा सके। लेकिन इंदिरा गांधी के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार के मुक्तिवाहिनी को समर्थन ना मिलने के कारण कुछ समय के लिए मोदी को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया गैस लिए भी था क्योंकि मोदी की छवि युवा से ही स्वयंसेवक संघ के एक निष्ठावान प्रचारक के रूप में देखी गई थी। शुरुआती समय से ही राजनीति में सक्रिय थे और भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने में मोदी ने एक अहम रोल निभाया।”1975″ में जब इंदिरा गांधी द्वारा इमरजेंसी लागू की गई किया गया तो उस वक्त में सभी नेताओं को पकड़ा जा रहा था जो शक के घेरे में थे उस वक्त में नरेंद्र मोदी छिपे हुए थे। गुजरात में शंकर सिंह वाघेला का जनाधार मजबूत करने में भी मोदी की ही रणनीति शामिल थी।1985 में नरेंद्र मोदी ने बीजेपी भारतीय जनता पार्टी का साथ देना शुरू किया 1990 के दशक में जब गठबंधन की सरकार चल रही थी तभी नरेंद्र मोदी की मेहनत रंग लाई और 1995 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी दो तिहाई बहुमत हासिल करने में सफल रही और सरकार बना पाई। इस दौरान मोदी के नेतृत्व में दो बड़ी यात्राएं निकाली गई सबसे पहली सोमनाथ से अयोध्या तक भव्य रथ यात्रा निकाली गई और दूसरा कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा निकाली गई।1995 में शंकर सिंह वाघेला के त्यागपत्र देने के बाद केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया और मोदी को दिल्ली बुलाकर भाजपा के केंद्र मंत्री का भार सौंपा गया।फिर 1998 में मोदी को गुजरात का सीएम बना दिया गया 2001 से लेकर 2014 तक तकरीबन 13 साल तक मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे इस दौरान साल 2002 में गुजरात दंगों में मोदी प्रशासन का हाथ देखा गया जिसमें करीबन 1044 लोग मारे गए थे और इसमें मरने वाले मुस्लिमों की संख्या तीन चौथाई थी देश के सर्वोच्च न्यायालय ने खास लोगों का संगठन बिठाया और मोदी पर खासतौर पर ध्यान रखने को कहा लेकिन मोदी के खिलाफ कुछ ना मिलने पर इस फाइल को 2022 में बंद कर दिया गया।मोदी के नेतृत्व में 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों पर जीत हासिल की यह 1984 के बाद पहली बार था । जब किसी पार्टी को इतनी सीटें मिली थी। उन्होंने सांसद के रूप में उत्तर प्रदेश की पावन भूमि वाराणसी और गुजरात के वडोदरा से सांसद के रूप में लड़े और जीते भी।2019 के लोकसभा चुनाव में फिर से पूर्ण बहुमद के साथ जीत हासिल की। इस संघर्ष के दौरान मोदी ने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग छवि बना ली है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को चलाना कोई आसान काम नही पर ये दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश और इसके लोकतंत्र को संभाल कर रखना ये उपलब्ध रही प्रधान मंत्री मोदी की। देश में चाहे युवा हो व्यस्क हो या महिला हो सबका विश्वास जीता है।

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