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जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की CBSE मान्यता रद्द

Report by : Sakshi Singh

छात्रा सुसाइड मामले में सख्त कारवाई,जाँच में सामने आई स्कूल प्रशांसन की गंभीर लापरवाही जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर से सामने आए एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामले ने पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।कक्षा 4 में पढ़ने वाली 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की आत्महत्या के मामले सामने में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नीरजा मोदी ने स्कूल की मान्यता रद्द कर दी हैं। CBSE ने यह फैसला स्कूल में छात्र सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्ल्घन और असुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के चलते लिया हैं।

यह घटना 1 नवंबर की हैं,जब नीरजा मोदी स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा अमायरा ने स्कूल भवन की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद से ही स्कूल प्रशासन की भूमिका,शिक्षको की संवेधनशीलता और बच्चो की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए CBSE ने एक विशेष जाँच समिति का गठन किया था।

जांच रिपोर्ट में चौकाने वाले खुलासे

CBSE की जाँच समिति की रिपोर्ट में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार,अमायरा स्कूल में लगातार बुलिंग का शिकार हो रही थी। बच्ची मानसिक रूप से बेहद परेशान थी और उसने अपनी परेशानी को लेकर मौत से पहले कम से कम पांच बार शिक्षकों से मदद मांगी थी। इसके बावजुद उसकी शिकायतों पर न तो गंभीरता से ध्यान दिया गया और न ही ठोस कदम उठाया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया हैं कि स्कूल में बच्चो की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ को लेकर तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। स्कूल की एंटी-बुलिंग पालिसी केवल कागजो तक समिति थी और उस व्यवहार में लागू नहीं किया गया।

पेरेंट्स की शिकायतें भी की गई नज़रअंदाज़

जांच में यह बात भी सामने आई कि अमायरा के माता-पिता ने पिछले डेढ़ साल में तीन से अधिक बार स्कूल प्रशांसन,शिक्षको और कोऑर्डिनेटर से बुलिंग
की शिकायत की थी। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने न तो बच्ची की काउंसलिंग कारवाई की।

CBSE ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा हैं कि स्कूल प्रशांसन की लापरवाही और उदासीन रवैये ने इस घटना को और गंभीर बना दिया। यदि समय रहते शिकायतो पर ध्यान दिया जाता,तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

CBSE का सख्त रुख

CBSE ने अपनी आधिकारिक बयान में कहा कि किसी भी स्कूल की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी छात्रों की शरीरिकःऔर मानसिक सुरक्षा सुनश्चित करना होती हैं। नीरजा मोदी स्कूल इस ज़िम्मेदारी को निभाने में पुती तरह असफल रहा। ऐसे असुरक्षित माहोल में बच्चो को पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती,इसलिए स्कूल की मानयता रद्द की जाती हैं।

हालांकि,बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया हैं कि स्कूल में पढ़ने वाले अन्य छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जाएगा,ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतवानी हैं। बच्चो के मानसिक स्वास्थ्य,बुलिंग और स्कूलों में सुरक्षा जैसे मुद्दे लबे समय से नज़रअंदाज़ किए जाते रहे हैं। अमायरा की मौत ने यह साबित कर दिया हैं कि बच्चो की आवाज़ को अनसुना करना कितना घातक हो सकता हैं।

अमायरा के माता-पिता ने न्याय की मांग करते हुए कहा हैं कि उनकी बेटी ने बार-बार मदद कि गुहार लगाई,लेकिन सिस्टम ने उसे नज़रअंदाज़ कर दिया। उनका कहना हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई होनी चाहिए,ताकि भविष्य में किसी और बच्चे को इसे तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।

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