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Maharashtra Election: चुनाव में क्यों हो रहा है Indelible Ink की जगह मार्कर का इस्तेमाल? जानें इसके 5 बड़े कारण

Maharashtra Election: विपक्ष ने लगाए चुनावी धांधली के गंभीर आरोप

National Khabar, Desk Report

Maharashtra Election

चुनावी आरोप पर उठे सवाल

Maharashtra Election: में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मतदाताओं की उंगली पर अमिट स्याही ((इंडेलिबल इंक) की जगह मार्कर पेन के इस्तेमाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह बदलाव चुनावी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है और इससे धांधली की आशंका बढ़ जाती है। इसी मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने सरकार और चुनाव प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

राज ठाकरे का कहना है कि सरकार किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहती है, और इसके लिए वह चुनावी व्यवस्थाओं के साथ छेड़छाड़ करने से भी नहीं हिचकिचा रही। उनका आरोप है कि मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए वर्षों से इस्तेमाल हो रही अमिट स्याही को हटाकर मार्कर पेन का प्रयोग करना, लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

Maharashtra Election: अमिट स्याही की परंपरा और उसका महत्व

भारत में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दशकों से मतदाताओं की उंगली पर अमिट स्याही लगाई जाती रही है। इस स्याही की खासियत यह होती है कि यह कई दिनों तक नहीं मिटती, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई व्यक्ति एक से अधिक बार मतदान न कर पाए। अमिट स्याही चुनाव आयोग द्वारा प्रमाणित होती है और इसके इस्तेमाल के पीछे एक ही उद्देश्य होता है—
“एक व्यक्ति, एक वोट” के सिद्धांत को सख्ती से लागू करना। विपक्ष का कहना है कि जब यह व्यवस्था पहले से कारगर और भरोसेमंद थी, तो फिर अचानक मार्कर पेन लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

मार्कर पेन पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

मार्कर पेन को लेकर विपक्ष की मुख्य आपत्तियां इस प्रकार हैं—

मार्कर पेन आसानी से मिटाया जा सकता है
साबुन, सैनिटाइज़र या केमिकल से निशान हल्का या साफ हो सकता है
इससे दोबारा वोट डालने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता
चुनाव की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कमजोर होता है

विपक्ष का आरोप है कि अगर कोई व्यक्ति मार्कर पेन का निशान मिटाकर फिर से मतदान केंद्र पहुंच जाए, तो उसे रोकना मुश्किल हो सकता है।

Maharashtra Election: राज ठाकरे का सरकार पर सीधा हमला

MNS प्रमुख राज ठाकरे ने इस पूरे मामले को लेकर बेहद सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा— “मैं जनता का ध्यान इस बात की ओर खींचना चाहता हूं कि सरकार किस तरह सिस्टम को लागू कर रही है। वे किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहते हैं। इसके लिए वे कुछ भी कर सकते हैं।”

मार्कर पेन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा— “अब स्याही की जगह मार्कर पेन इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ऐसी फर्जी चुनाव प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं है।” उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सतर्क रहें और चुनावी प्रक्रियाओं पर नजर रखें, ताकि लोकतंत्र के साथ कोई खिलवाड़ न हो।

‘धांधली वाले चुनावों का कोई मतलब नहीं’

राज ठाकरे ने यह भी कहा कि अगर चुनाव निष्पक्ष नहीं हैं, तो ऐसे चुनाव लोकतंत्र की आत्मा को नुकसान पहुंचाते हैं। उनके अनुसार—

चुनाव सिर्फ जीतने का माध्यम नहीं
बल्कि जनता की आवाज़ और विश्वास का प्रतीक होते हैं
यदि प्रक्रिया ही संदिग्ध हो, तो परिणाम भी सवालों के घेरे में आते हैं

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धांधली से भरे चुनावों का कोई मूल्य नहीं होता।

Maharashtra Election: अमित साटम को लेकर भी टिप्पणी

अपने बयान में राज ठाकरे ने बीजेपी नेता अमित साटम का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा— “अमित साटम को अब इसमें दखल देकर बात नहीं करनी चाहिए।” इस बयान को राजनीतिक हलकों में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव के रूप में देखा जा रहा है।

विपक्ष के आरोप: सरकार की मंशा पर संदेह

कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और अन्य विपक्षी दलों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि—

चुनावी नियमों में बिना पर्याप्त जानकारी बदलाव
जनता और राजनीतिक दलों को भरोसे में न लेना
पारदर्शिता की कमी

ये सभी बातें सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती हैं।

विपक्ष का दावा है कि यदि सरकार और चुनाव प्रशासन के पास कोई ठोस कारण है, तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग की भूमिका पर भी निगाहें

इस पूरे विवाद के बाद अब सभी की निगाहें राज्य चुनाव आयोग पर टिकी हैं। जनता और विपक्ष यह जानना चाहते हैं कि—

क्या मार्कर पेन का फैसला चुनाव आयोग का था?
क्या यह किसी तकनीकी या लॉजिस्टिक कारण से किया गया?
क्या इससे पहले किसी अन्य राज्य में ऐसा प्रयोग हुआ है?

अगर आयोग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं आता, तो यह विवाद और गहराने की संभावना है।

लोकतंत्र में भरोसे का संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव केवल प्रक्रिया नहीं,बल्कि भरोसे की बुनियाद होते है। अगर मतदाता को यह महसूस हो कि सिस्टम के साथ छेड़छाड़ हो सकती है तो-

मतदान प्रतिशत घट सकता है
लोकतंत्र में जनता का विश्वाश कमजोर हो सकता है
सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है

इसलिए चुनावी प्रक्रिया में हर छोटा बदलाव भी बेहद संवेदनशील होता है।

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में मार्कर पेन बनाम अमिट स्याही का विवाद केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं,बल्कि लोकतंत्र कि विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है। राज ठाकरे और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को नज़रअंदाज़ करना सरकार और चुनाव आयोग दोनों के लिए मुश्किल होगा।

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