पश्चिम बंगाल

Nipah Virus : पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस अलर्ट : स्थिति निंयत्रण में लेकिन सतर्कता जरुरी

Report by : Sakshi Singh, National Khabar

  • पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस अलर्ट: स्थिति नियंत्रण में, लेकिन सतर्कता ज़रूरी
  • भारत में निपाह वायरस के नए मामले: सरकार और WHO की संयुक्त निगरानी
Nipah Virus

Nipah Virus : भारत में निपाह वायरस के नए मामले,सरकारी और WHO की सयुंक्त में,लेकिन निगरानी जारी

Nipah Virus : निपाह वायरस (Nipah Virus) एक गंभीर और जानलेवा ज़ूनोटिक बीमारी है,जो मुख्य रूप से चमगादड़ों से इंसानों में फैलती हैं। यह संक्रमण कभी-कभी दूषित भोजन,जैसे कच्चा खजूर का रस,या संक्रमित व्यक्ति के नज़दीकी संपर्क से भी फैल सकता हैं। फ़िलहाल निपाह वायरस के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समय पर पहचान,सहायक उपचार और सख्त संक्रमण रोकथाम उपाय ही सबसे प्रभावी बचाव माने जाते हैं।

29 जनवरी 2026 : पश्चिम बंगाल में दो मामलों की पुष्टि

29 जनवरी 2026 को भारत सरकार ने पुष्टि की कि पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण के दो मामले सामने आए हैं। दोनों संक्रमित 25 वर्षीय नर्स हैं-एक महिला और एक पुरुष-जो उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं।

दोनों में दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में शुरुआती लक्षण दिखाई दिए थे, जिनमें बुखार, सिरदर्द और कमजोरी शामिल थी। कुछ ही दिनों में उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई और गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं सामने आईं। जनवरी की शुरुआत में दोनों को आइसोलेशन में रखा गया।

Nipah Virus : जांच और पुष्टि की प्रक्रिया

11 जनवरी को कल्याणी स्थित सरकारी अस्पताल की वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी (VRDL) ने इन मामलों को संदिग्ध निपाह वायरस संक्रमण के रूप में चिन्हित किया। इसके बाद नमूनों को पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजा गया, जहां 13 जनवरी को निपाह वायरस संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि हुई।

21 जनवरी तक की रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष मरीज की हालत में सुधार हो रहा है और वह रिकवरी की ओर है, जबकि महिला मरीज की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है और उसे गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में रखा गया है।

Nipah Virus : संक्रमण नियंत्रण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की त्वरित कार्रवाई

निपाह वायरस की पुष्टि होते ही राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया शुरू की। कुल 196 ऐसे लोगों की पहचान की गई, जो इन दोनों संक्रमितों के संपर्क में आए थे। सभी की ट्रेसिंग, नियमित निगरानी और लैब जांच की गई।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सभी संपर्क में आए व्यक्ति अब तक लक्षणहीन हैं और उनकी निपाह वायरस जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है।
27 जनवरी 2026 तक राज्य में कोई नया मामला सामने नहीं आया है, जो राहत की बात है।

Nipah Virus : केंद्र और राज्य सरकार का समन्वय

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में एक विशेष आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम तैनात की है, जो राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम कर रही है। इस टीम का फोकस बढ़ी हुई निगरानी, तेज़ लैब परीक्षण, संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण उपायों के साथ-साथ फील्ड इन्वेस्टिगेशन पर है।

केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल और समय पर उठाए गए कदमों के कारण इस प्रकोप को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सका है।

Nipah Virus : जोखिम संचार और जन-जागरूकता अभियान

प्रभावित जिलों और आसपास के क्षेत्रों में लक्षित जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को खास तौर पर कच्चे खजूर के रस का सेवन न करने, फलों को अच्छी तरह धोकर और छीलकर खाने, तथा चमगादड़ों के संपर्क से बचने की सलाह दी जा रही है।

स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू किया गया है, ताकि अस्पतालों में किसी भी प्रकार के फैलाव को रोका जा सके।

जोखिम मूल्यांकन: WHO की राय

भारत ने पहले भी निपाह वायरस के प्रकोपों को सफलतापूर्वक संभाला है। इस बार भी राष्ट्रीय और राज्य स्वास्थ्य टीमें मिलकर सभी अनुशंसित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय लागू कर रही हैं। फिलहाल इंसान से इंसान में संक्रमण बढ़ने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पश्चिम बंगाल के उप-राष्ट्रीय स्तर पर जोखिम को मध्यम (Moderate) श्रेणी में रखा है। इसकी वजह भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्रों में फल खाने वाले चमगादड़ों की मौजूदगी और कभी-कभार होने वाला ज़ूनोटिक स्पिलओवर है।
हालांकि, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर जोखिम को कम (Low) माना गया है।

संक्रमण के सभी मामले उत्तर 24 परगना जिले तक सीमित हैं। मरीजों ने लक्षण दिखने के दौरान कोई यात्रा नहीं की थी और सभी संपर्कों की रिपोर्ट नेगेटिव रही है। ऐसे में अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

Nipah Virus : भारत में निपाह वायरस का इतिहास

यह भारत में दर्ज किया गया सातवां निपाह वायरस प्रकोप है और पश्चिम बंगाल में तीसरी बार यह संक्रमण सामने आया है। इससे पहले 2001 में सिलीगुड़ी और 2007 में नदिया जिले में निपाह वायरस के मामले सामने आए थे।

ये सभी जिले बांग्लादेश की सीमा से सटे हुए हैं, जहां लगभग हर साल निपाह वायरस के छोटे-बड़े प्रकोप देखे जाते हैं।

Nipah Virus : निपाह वायरस कैसे फैलता है

निपाह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है—या तो सीधे संपर्क से या दूषित भोजन के माध्यम से। यह सूअरों जैसे जानवरों से भी इंसानों में फैल सकता है।
कुछ मामलों में यह बीमारी इंसान से इंसान में भी फैलती है, खासकर लंबे और नज़दीकी संपर्क के दौरान, विशेष रूप से स्वास्थ्य-सेवा संस्थानों और परिवार के सदस्यों के बीच।

इंसानों में निपाह वायरस संक्रमण बिना लक्षण के भी हो सकता है, लेकिन कई मामलों में यह गंभीर सांस की बीमारी और घातक दिमागी सूजन (एन्सेफेलाइटिस) का कारण बनता है।
वैश्विक स्तर पर इसकी मृत्यु दर 40% से 75% के बीच मानी जाती है, जो समय पर पहचान और इलाज की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।

Nipah Virus : WHO की सिफारिशें और समुदाय के लिए दिशा-निर्देश

फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है, हालांकि कई वैक्सीन उम्मीदवार विकास के चरण में हैं। गंभीर मामलों में समय पर सहायक उपचार और आईसीयू सुविधा जीवन रक्षक साबित हो सकती है।

संक्रमण से बचाव के प्रमुख उपाय

Nipah Virus : चमगादड़ से इंसान में संक्रमण रोकना:

खजूर के रस को ढककर संग्रह करना
ताजा रस को उबालकर पीना
फलों को अच्छी तरह धोकर और छीलकर खाना
जिन फलों पर चमगादड़ के काटने के निशान हों, उन्हें न खाएं
चमगादड़ों के बसेरों से दूरी बनाए रखें

जानवर से इंसान में संक्रमण रोकना:

बीमार जानवरों को संभालते समय दस्ताने और सुरक्षात्मक कपड़े पहनें
वध या निपटान के दौरान पूरी सावधानी बरतें

इंसान से इंसान में संक्रमण रोकना:

संक्रमित व्यक्ति के साथ बिना सुरक्षा के नज़दीकी संपर्क से बचें
नियमित रूप से हाथ धोएं और स्वच्छता बनाए रखें

स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा:

पर्याप्त वेंटिलेशन
जोखिम का सही आकलन
संदिग्ध या पुष्टि मामलों की देखभाल के दौरान उचित पीपीई का उपयोग

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