AIMIM : ‘मिस्टर योगी, तैयार हो जाओ…’, अकबरुद्दीन ओवैसी की चुनौती से यूपी की राजनीति में नई हलचल

Report by : Sakshi Singh, National Khabar
- 2027 से पहले गरमाई उत्तर प्रदेश की सियासत
- AIMIM का यूपी प्लान क्या है?

AIMIM : 2027 से पहले ही गरमाई उत्तर प्रदेश की सियासत
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर है,लेकिन सियासी माहौल अभी से गर्म होता दिख रहा है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल अपनी-अपनी रणनीतियो में जुटे है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। AIMIM के वरिष्ठ नेता और विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान ने यूपी की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
निजामाबाद की जनसभा से सीधा संदेश

तेलंगाना के निजामाबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान अकबरुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुले मंच से चुनौती दी। उन्होंने कहा,
“मिस्टर योगी, तैयार हो जाओ, यूपी भी आ रहे हैं। इसके बाद यूपी चलते हैं। हम सभी यूपी में अपनी ताकत और अपने झंडे को गाड़ेंगे और वहां भी अपना झंडा लहराएंगे।”
इस बयान को सिर्फ एक चुनावी भाषण नहीं, बल्कि AIMIM की भविष्य की रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
AIMIM का यूपी प्लान क्या है?

AIMIM लंबे समय से हैदराबाद और तेलंगाना की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए हुए है। बीते वर्षों में पार्टी ने महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। अब उत्तर प्रदेश में पार्टी विस्तार का ऐलान यह दर्शाता है कि AIMIM खुद को राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है।
अकबरुद्दीन ओवैसी का यह दावा कि पार्टी यूपी में मजबूती से चुनाव लड़ेगी, साफ करता है कि AIMIM सिर्फ प्रतीकात्मक राजनीति नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर तैयारी की ओर बढ़ रही है।
अकबरुद्दीन ओवैसी: राजनीतिक सफर और पहचान
अकबरुद्दीन ओवैसी AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई हैं। वह पार्टी के सबसे बड़े और प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। अकबरुद्दीन हैदराबाद की चंद्रयानगुट्टा विधानसभा सीट से लगातार छह बार विधायक चुने जा चुके हैं, जो उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है।
साल 2023 में उन्हें तेलंगाना विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था, जो उनके अनुभव और पार्टी में उनकी अहमियत को रेखांकित करता है।
विवादों से रहा है पुराना नाता
अकबरुद्दीन ओवैसी का नाम जितना उनकी चुनावी जीतों के लिए जाना जाता है, उतना ही उनके विवादित बयानों के कारण भी चर्चा में रहा है। खास तौर पर साल 2012 में दिया गया उनका ‘15 मिनट’ वाला बयान आज भी राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बना रहता है।
इन बयानों के चलते उन पर कई बार कानूनी और राजनीतिक सवाल भी उठे, लेकिन इसके बावजूद उनके समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता बनी रही।
योगी आदित्यनाथ बनाम ओवैसी राजनीति

योगी आदित्यनाथ और ओवैसी परिवार की राजनीति दो बिल्कुल अलग ध्रुवों का प्रतिनिधित्व करती है। योगी आदित्यनाथ अपनी सख्त प्रशासनिक शैली और हिंदुत्व की राजनीति के लिए जाने जाते हैं, जबकि AIMIM खुद को अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम समुदाय की आवाज़ बताती है।
ऐसे में अकबरुद्दीन ओवैसी की खुली चुनौती को आने वाले समय में एक बड़े वैचारिक और राजनीतिक टकराव की शुरुआत माना जा रहा है।
यूपी के वोट बैंक पर क्या होगा असर?
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाता रहा है। अब तक यह वोट समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच बंटता रहा है। AIMIM की एंट्री से यह समीकरण और जटिल हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM के आने से विपक्षी वोटों में बंटवारा हो सकता है, जिसका फायदा BJP को मिल सकता है। वहीं AIMIM समर्थकों का दावा है कि पार्टी उन मतदाताओं को विकल्प देगी जो पारंपरिक दलों से असंतुष्ट हैं।
चुनावी रणनीति या सियासी दबाव की चाल
अकबरुद्दीन ओवैसी का बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा है या फिर यह योगी सरकार पर सियासी दबाव बनाने की कोशिश—इस पर भी बहस जारी है। कई जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान AIMIM को राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का केंद्र बनाए रखते हैं और पार्टी को नई पहचान दिलाने में मदद करते हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और जटिल राज्य में राजनीतिक जमीन तैयार करना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं है। AIMIM को न सिर्फ संगठन खड़ा करना होगा,बल्कि स्थानीय मुद्दों और समीकरणों को भी समझना पड़ेगा। 2027 तक का सफर AIMIM के लिए परीक्षा की घड़ी होगा,जहां यह साफ होगा कि पार्टी का यह ऐलान महज बयानबाज़ी था या वाकई एक ठोस राजनीतिक कदम।







