BOARD EXAM : विद्यार्थियों के भविष्य की दिशा तय करने वाली कसौटी

Report by : Sakshi Singh, National Khabar
- बोर्ड परीक्षा : एक परिचय
- बोर्ड परीक्षा का महत्व

BOARD EXAM : भारत की शिक्षा व्यवस्था में बोर्ड परीक्षा का विशेष स्थान है। कक्षा 10वी और 12वी की बोर्ड परीक्षाएँ विधार्थियों के शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है। इन्हीं परीक्षाओं के आधार पर आगे की पढ़ाई,करियर और कई बार आत्मविश्वाश की दिशा तय होती है। हालांकि समय के साथ शिक्षा प्रणाली में बदलाव आए हैं,फिर भी बोर्ड परीक्षा का दबाव आज भी विधार्थियों,अभिभावकों और शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ हैं।
BOARD EXAM का महत्व
बोर्ड परीक्षा केवल अंको का मूल्यांकन नहीं हैं,बल्कि यह विधार्थियों की समझ,अनुशासन,निंरतर अभ्यास और धैर्य की भी परीक्षा होती हैं। यह परीक्षा देशभर के विधार्थियों को एक समान मच पर परखती हैं,जिससे उनके ज्ञान और क्षमता की तुलना की जा सके।
कक्षा 10वी की बोर्ड परीक्षा आगे की विषय-चयन प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं,जबकि 12वी की बोर्ड परीक्षा उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की नीव रखती हैं। इसलिए बोर्ड परीक्षा को विधार्थियों के भविष्य की दिशा तय करने वाली कसौटी कहा जाता हैं।
BOARD EXAM : विधार्थियों पर मानसिक दबाव

बोर्ड परीक्षा का सबसे बड़ा नकरात्मक पहलु इससे जुड़ा मानसिक दबाव हैं। अच्छे अंक लाने के अपेक्षा,परिवार की उम्मीदें,समाज की तुलना और भविष्य की चिंता विधार्थियों को तनाव में डाल देती हैं।
कई बार यह दबाव इतना बढ़ जाता हैं कि विद्यार्थी अवसाद,अनिंद्रा और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं से झूजने लगते हैं। कुछ मामलों में अत्यधिक तनाव गंभीर परिणाम भी पैदा कर सकता हैं। इसलिए यह आवश्यक हैं कि बोर्ड परीक्षा को जीवन की अंतिम परीक्षा न समझ जाए,बल्कि इसे सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाए।
BOARD EXAM : अभिभावकों की भूमिका
बोर्ड परीक्षा के दौरान अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। कई बार अनजाने में माता-पिता बच्चों पर अत्यधिक दबाव बना देते हैं। पडोसी के बच्चे से ज्यादा अंक लाओ जैसी अपेक्षाएँ विधार्थियों के मनोबल को कमजोर कर सकती हैं।
अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को भावनात्मक सहयोग दें,उनकी मेहनत की सराहना करें और यह समझाए कि असफलता भी सीखने का एक माध्यम हैं। सकारात्मक वातावरण बच्चों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायक होता हैं।
BOARD EXAM : शिक्षकों का योगदान
शिक्षक विधार्थियों के मार्गदर्शन होते हैं। बोर्ड परीक्षा कि तैयारी में उनकी भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
एक अच्छा शिक्षक विधार्थियों को विषय की गहरी समझ देता हैं,उत्तर लिखने की सही तकनीक सिखाता हैं और परीक्षा के प्रति आत्मविश्वास विकसित करता हैं। साथ ही,विधार्थियों की मानसिक स्थिति को समझकर उन्हें तनाव से बाहर निकालने में भी शिक्षक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
BOARD EXAM : तैयारी की सही रणनीति

बोर्ड परीक्षा में सफलता के लिए सही रणनीति आवश्यक हैं। नियमित अध्ययन,समय-प्रबधन और निंरतर अभ्यास सफलता की कुंजी हैं।
परीक्षा से कई महीने पहले पाठ्यक्रम की योजना बनाकर पढ़ाई करना चाहिए। कठिन विषयों को पहले समझना और आसान विषयों का बार-बार दोहराव करना लाभदायक होता है। पिछले वर्षो के प्रश्नपत्र हल करने से परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्तर को समझने में मदद मिलती है। साथ ही,उत्तर लेखन का अभ्यास अंक बढ़ाने में सहायक होता है।
BOARD EXAM : परीक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता
आज के समय में यह सवाल उठता है कि क्या बोर्ड परीक्षा ही विधार्थियों की झमता मापने का एकमात्र तरीका हो सकती है ? नई शिक्षा नीति में निंरतर मूल्यांकन,प्रोजेक्ट वर्क और कौशल आधारित शिक्षा पार जोर दिया गया है। यदि बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ आंतरिक मूल्यांकन को भी समान महत्व दिया जाए,तो विधार्थियों पर दबाव कम किया जा सकता है। परीक्षा को रटने की बजाय-समझ-आधारित बनाना समय की मांग है।
BOARD EXAM और जीवन का संबध
बोर्ड परीक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है,लेकिन यही जीवन नहीं है। अच्छे अंक निश्चित रूप से अवसरों के द्वार खोलते हैं,परंतु असफलता भी जीवन को समापत नहीं करती। इतिहास गवाह हैं कि कई सफल व्यक्तियों ने परीक्षा में औसत प्रदर्शन के बावजूद अपने कौशल और मेहनत से उचाईया हासिल की हैं। इसलिए विधार्थियों को यह समझना चाहिए कि बोर्ड परीक्षा एक अवसर हैं, न कि अंतिम फैसला।
