Greater Noida : ‘मैं यहीं हूँ पापा’

Report by :- Sakshi Singh, National Khabar
- ‘मैं यहीं हूँ पापा’ – ग्रेटर नोएडा हादसे की पृष्ठभूमि
- घने कोहरे और अंधेरे में छिपा मौत का जाल

आंखों के सामने डूबता बेटा, कुछ नहीं कर सके पिता-ग्रेटर नोएडा हादसे की दर्दनाक कहानी
Greater Noida से सामने आई यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं,बल्कि सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक चूक का भयावह उदाहरण बन गई है। 17 जनवरी 2026 की रात एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की ज़िंदगी खत्म हो गई,जबकि उसका पिता उसकी आंखों के सामने उसे बचाने के लिए बेबस खड़ा रहा। यह कहानी है 27 वर्षीय युवराज मेहता की,जिसकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
Greater Noida:- घने कोहरे में घर लौट रहा था युवराज

17 जनवरी की रात युवराज मेहता गुरुग्राम से अपने घर लौट रहे थे। वही पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और ग्रेटर नोएडा में अपने परिवार के साथ रहते थे। रात के समय घना कोहरा छाया हुआ था, जिससे विजिबिलिटी बेहद कम थी। सड़क पर न तो पर्याप्त लाइटिंग थी और न ही किसी तरह की चेतवानी या सकेतक।
सैक्टर-150 के टी-पॉइंट के पास एक निर्माणधीन मॉल का बेसमेंट था, जिसमें भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था। उसी बेसमेंट के पास बनी बाउंड्री वॉल टूटी हुई थी, लेकिन वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतवानी बोर्ड मौजूद नहीं था।
Greater Noida:- पानी से भरे गड्डे में गिरी कार

कोहरे और अंधेरे के कारण युवराज को आगे का रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं दिया। उनकी कार सीधे उस टूटे हिस्से से होकर मॉल के बेसमेंट में बने गहरे गड्डे में जा गिरी। बताया जा रहा है कि यह गड्डा करीब 20 से 70 फ़ीट तक गहरा था और पूरी तरह पानी से भरा हुआ था।
कार गिरते ही तेज आवाज़ हुई, लेकिन आसपास कोई मौजूद नहीं था। हादसे के तुरंत बाद युवराज किसी तरह कार से निकलने में सफल रहें और कार की छत पर चढ़ गए।
Greater Noida:- कार के छत पर बैठकर मांगी मदद
डूबती कार की छत पर बैठकर युवराज लगातार मदद के लिए चिल्लाने लगे। वह बार-बार “बचाओ-बचाओ” की आवाज़ लगा रहे थे। उनके पास टॉर्च थी, जिससे जलाकर उन्होंने खुद के जिंदा होने का संकेत देने की कोशिश की।
घटना के कुछ ही मिनटो बाद उन्होंने अपने पिता राजकुमार मेहता को फ़ोन किया और कांपती आवाज़ में कहा –
“पापा मुझे बचा लो,मेरी कार नाले में गिर गई है। “
Greater Noida:- पिता को कॉल और तुरंत घटनास्थल पर पहुंचना
बेटे की आवाज़ सुनते ही राजकुमार मेहता के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना एक पल गंवाए वे तुरंत घर से निकल पड़े और बताए गए स्थान की ओर दौड़े। रात का समय, कोहरा और सही लोकेशन न मिल पाने के कारण उन्हें शुरुआत में काफी परेशानी हुई।
वे पहले आसपास के नालों और गड्ढों के पास गए, लेकिन कहीं कुछ दिखाई नहीं दिया। करीब 30 मिनट तक वे बेटे को ढूंढते रहे।
Greater Noida:- आंखों के सामने दिखा बेटा, लेकिन बचा नहीं सके
करीब आधे घंटे की तलाश के बाद राजकुमार मेहता की नजर नीचे गहरे पानी में गई। उन्होंने देखा कि युवराज कार की छत पर लेटा हुआ है। वह कमजोर पड़ता जा रहा था, लेकिन फिर भी बीच-बीच में आवाज लगाकर अपने पिता को पुकार रहा था।
पिता ने उसे आवाज दी, लेकिन पानी की गहराई और साधनों की कमी के कारण वे नीचे उतरने की हिम्मत नहीं कर सके। उन्होंने तुरंत डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी और मदद की गुहार लगाई।
Greater Noida:- देर से पहुंची मदद, टूट गया पिता का सपना

पुलिस और राहत टीम के पहुंचने में काफी समय लग गया। इस दौरान युवराज की ताकत जवाब देने लगी। ठंडा पानी, घबराहट और समय पर मदद न मिल पाने के कारण वह धीरे-धीरे डूबने लगा।
पिता राजकुमार मेहता बस ऊपर से चिल्लाते रहे, लेकिन कुछ कर नहीं सके। कुछ ही देर में युवराज पानी में समा गया। जब तक रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
Greater Noida:- बेटे को नहीं बचा पाने का जीवनभर का दर्द
अपने बेटे की मौत के बाद राजकुमार मेहता पूरी तरह टूट चुके हैं। उनका कहना है,
“मेरे सामने मेरा बेटा मदद के लिए चिल्लाता रहा, मैं कुछ नहीं कर पाया। अगर वहां सुरक्षा इंतजाम होते, बैरिकेडिंग होती या समय पर मदद मिल जाती, तो मेरा बेटा आज जिंदा होता।”
उनका दर्द सिर्फ एक पिता का नहीं, बल्कि हर उस परिवार का है जो ऐसी लापरवाही का शिकार हो सकता है।
Greater Noida:- प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—
निर्माणाधीन मॉल के पास सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे?
पानी से भरे गड्ढे के आसपास बैरिकेडिंग क्यों नहीं की गई?
टूटी बाउंड्री वॉल की मरम्मत समय पर क्यों नहीं हुई?
रात के समय सड़क पर चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा काफी समय से इसी हालत में था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
Greater Noida:- परिवार ने की कार्रवाई की मांग
युवराज मेहता के परिवार ने प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही से हुई मौत है।
परिवार चाहता है कि—
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए
भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों
एक चेतवानी बन गई युवराज की मौत
युवराज की मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन तमाम लोगों के लिए चेतावनी है जो हर दिन ऐसी सड़को से गुज़रते हैं,जहां लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
यह हादसा बताता है कि थोड़ी सी अनदेखी,थोड़ी सी देरी और सिस्टम की उदासीनता किसी की पूरी ज़िंदगी छीन सकती है।
ग्रेटर नोएडा का यह हादसा दिल दहला देने वाला है। एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान चली गई और एक पिता जीवनभर के लिए खाली हाथ रह गया। “मैं यहीं हूँ पापा”-ये शब्द शायद राजकुमार मेहता के कानों में हमेशा गूंजते रहेंगे।
अब सवाल यह है कि क्या इस दर्दनाक घटना से सबक लिया जाएगा,या फिर ऐसी कहानियां यूं ही दोहराई जाती रहेंगी ?







