Budget 2026 : नए इनकम टैक्स सिस्टम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 1 लाख करने की क्यों है ज़रूरत

Report by : Sakshi Singh, National Khabar
- नए इनकम टैक्स रेजीम पर सरकार का बढ़ता फोकस
- बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन क्यों बना बड़ा मुद्दा

Budget 2026:- यूनियन बजट 2026 से पहले सैलरीड टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत की उम्मीद
जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2026 नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे देश के करोड़ों नौकरीपेशा करदाताओं की निगाहें एक बार फिर सरकार के फैसलों पर टिकी हैं। खासतौर पर इनकम टैक्स में राहत को लेकर उम्मीदें काफी ज्यादा हैं। इस बार चर्चा के केंद्र में है — स्टैंडर्ड डिडक्शन, जो सैलरीड क्लास और पेंशनभोगियों के लिए टैक्स राहत का सबसे आसान और प्रभावी माध्यम बन चुका है।
सरकार नए इनकम टैक्स रेजीम को लगातार आकर्षक बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बजट 2026 में यदि कोई अतिरिक्त राहत दी जाती है, तो उसका सबसे मजबूत जरिया स्टैंडर्ड डिडक्शन माना जा रहा है।
Budget 2026:- स्टैंडर्ड डिडक्शन क्या है और यह क्यों अहम है ?

स्टैंडर्ड डिडक्शन एक निश्चित राशि होती है,जिसे सैलरी या पेंशन से सीधे घटा दिया जाता है। इसके लिए किसी निवेश या दस्तावेज की ज़रूरत नहीं होती। यही वजह है कि यह करदाताओं के बीच सबसे लोकप्रिय टैक्स बेनिफिट्स में से एक है।
वर्तमान में :
पुराने टैक्स रेजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 है, जो कई वर्षों से अपरिवर्तित है।
नए टैक्स रेजीम में सरकार ने 2024 में इसे बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया था।
यह बढ़ोतरी सरकार की उस नीति का हिस्सा थी, जिसके तहत नए टैक्स सिस्टम को सरल और आकर्षक बनाना लक्ष्य है।
नए टैक्स रेजीम पर सरकार का बढ़ता फोकस
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने नए टैक्स रेजीम में लगातार बदलाव किए हैं:
टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया
दरों को कम किया गया
बजट 2025 में ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री कर दिया गया
सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए, ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ने के बाद ₹12.75 लाख तक की आय प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री हो गई।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, FY 2023-24 में 72% करदाताओं ने नया टैक्स रेजीम चुना, और यह संख्या आगे और बढ़ने की संभावना है।
Budget 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन क्यों बना सबसे बड़ा मुद्दा?
टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि अब नए टैक्स रेजीम में:
टैक्स स्लैब बदलने की गुंजाइश सीमित है
नई छूट या एक्सेम्प्शन जोड़ने से सिस्टम जटिल हो सकता है
ऐसे में स्टैंडर्ड डिडक्शन ही एकमात्र व्यावहारिक तरीका है, जिससे सरकार बिना सिस्टम को जटिल बनाए, करदाताओं को राहत दे सकती है।
महंगाई ने बढ़ाया दबाव, ₹75,000 अब नाकाफी?
Budget 2026:- बीते कुछ वर्षों में:
महंगाई लगातार बढ़ी है
किराया, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन खर्च बढ़े हैं
सैलरी ग्रोथ कई सेक्टर्स में सीमित रही है
टैक्स एक्सपर्ट्स का तर्क है कि ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन आज की आर्थिक वास्तविकताओं के हिसाब से पर्याप्त नहीं रह गया है। इससे करदाताओं की डिस्पोजेबल इनकम पर दबाव बढ़ रहा है।
Budget 2026:- इन्फ्लेशन से जोड़ने की मांग क्यों उठ रही है ?
कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि :
स्टैंडर्ड डिडक्शन को महंगाई दर से जोड़ा जाए, ठीक उसी तरह जैसे सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाया जाता है।
Budget 2026:- इसके फायदे:
हर साल राहत अपने आप एडजस्ट हो जाएगी
बार-बार बजट में बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी
टैक्स सिस्टम सरल बना रहेगा
Budget 2026:- कितना बढ़ सकता है स्टैंडर्ड डिडक्शन?

इस पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं:
- बड़ा इजाफा
कुछ टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि:
स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹1 लाख या ₹1.25 लाख तक किया जा सकता है
इससे:
मिडिल क्लास को ठोस राहत मिलेगी
नए टैक्स रेजीम की स्वीकार्यता और बढ़ेगी
- सीमित बढ़ोतरी
Budget 2026:- दूसरी राय यह है कि:
₹15,000 से ₹25,000 की बढ़ोतरी भी पर्याप्त राहत दे सकती है
यह बढ़ोतरी बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को आंशिक रूप से संतुलित कर सकती है।
लेबर कोड का असर और स्टैंडर्ड डिडक्शन
स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने के पक्ष में एक और बड़ा तर्क है — नए लेबर कोड्स।
नए लेबर कानूनों के तहत:
“वेतन” की परिभाषा बदली जा रही है
प्रोविडेंट फंड (PF) जैसी कटौतियां बढ़ सकती हैं
कर्मचारियों की नेट सैलरी घटने की आशंका है
ऐसी स्थिति में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाना सैलरीड क्लास के लिए एक संतुलनकारी कदम हो सकता है।
सरकार क्यों हिचक सकती है?
हालांकि मांगें मजबूत हैं, लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ना तय नहीं है।
संभावित कारण:
पिछले बजट में पहले ही बड़ी टैक्स राहत दी जा चुकी है
सरकार का राजकोषीय दबाव
नॉन-कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में नरमी के संकेत
सरकार पहले यह देखना चाह सकती है कि FY 2025-26 में कितने करदाता नए रेजीम में शिफ्ट होते हैं
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार किसी भी कदम से पहले राजस्व पर उसके असर का आकलन जरूर करेगी।
Budget 2026 की सबसे व्यावहारिक टैक्स राहत
आज की स्थिति में,जब
नए टैक्स में एक्सेम्प्शन की गुंजाइश कम है
टैक्स सिस्टम को सरल बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है
तो स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाना सबसे आसान,पारदर्शी और प्रभावी उपाय बनकर उभरता है।
अब देखना यह होगा कि बजट 2026 में सरकार सैलरीड टैक्सपेयर्स की इस उम्मीद पर कितना खरा उतरती है। लेकिन इतना तय है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन नए टैक्स रेजीम के तहत कर राहत का सबसे स्तभ बन चुका है।




