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Jana Nayagan in Censor: Superstar से ‘जन नेता’ बनने चले Thalpati Vijay की फिल्म पर सेंसर का साया, हाई कोर्ट पहुंचा मामला, गरमाई Tamil Nadu की राजनीति

Report by : Sakshi Singh, National Khabar

  • थलपति विजय की ‘जन नायगन’ पर सेंसर का साया
  • विजय के फैंस और समर्थक संगठन सेंसर बोर्ड के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं

रिलीज से पहले ‘जन नायगन’ पर क्यों फंसा सेंसर का पेंच? कोर्ट में पहुंचा विवाद, राजनीतिक साजिश के आरोपों से बढ़ा हंगामा

Jana Nayagan in Censor:- तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायगन’ (हिंदी टाइटल: ‘जन नेता’) रिलीज से ठीक पहले विवादों में घिर गई है। फिल्म का मुद्दा अब सिर्फ सिनेमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तमिलनाडु की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर उठे सवालों के चलते मामला सीधे हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है, वहीं राजनीतिक साजिश के आरोपों ने इस विवाद को और भी हवा दे दी है।

रिलीज से पहले क्यों फंसी ‘जन नायगन’?

थलपति विजय की यह फिल्म शुक्रवार को रिलीज के लिए शेड्यूल है, लेकिन अब तक इसकी एडवांस बुकिंग पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड (CBFC) से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। आमतौर पर रिलीज से कई दिन पहले फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट जारी हो जाता है, लेकिन ‘जन नायगन’ के मामले में यह प्रक्रिया अटक गई।

सूत्रों के मुताबिक, सेंसर बोर्ड को फिल्म के कुछ संवादों और राजनीतिक संदर्भों पर आपत्ति है। कहा जा रहा है कि फिल्म में दिखाए गए कुछ सीन और डायलॉग्स मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और सत्ता पर सीधा हमला करते नजर आते हैं।

कोर्ट क्यों पहुंचा मामला?

जब सेंसर से जुड़ी प्रक्रिया तय समय में पूरी नहीं हुई, तो मेकर्स ने इसे कानूनी मुद्दा बना दिया। फिल्म से जुड़े पक्षों का कहना है कि सेंसर सर्टिफिकेट में जानबूझकर देरी की जा रही है। इसी के चलते मामला हाई कोर्ट में पहुंचा है।

कोर्ट में दायर याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि फिल्म को राजनीतिक दबाव के चलते रोका जा रहा है। मेकर्स का दावा है कि फिल्म अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में है और इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे कानून-व्यवस्था को खतरा हो।

राजनीतिक साज़िश के आरोप

‘जन नायगन’ को विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। इसके बाद वह पूरी तरह राजनीति में सक्रिय होने की तैयारी में है। ऐसे में फिल्म सिर्फ एक सिनेमाई प्रोजेक्ट नहीं ,बल्कि एक राजनीतिक बयान बन गई है।

फिल्म की कहानी एक ऐस व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है,जो आम जनता की आवाज़ बनकर सत्ता से टकराता है। यही वजह है कि फिल्म को विजय की रियल लाइफ इमेज से जोड़ा जा रहा है। दर्शक इसे एक फिल्म से ज्यादा,एक संदेश के रूप में देख रहे है।

सेंसर बोर्ड की आपत्तियां क्या है ?

हालांकि सेंसर बोर्ड के ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है,लेकिन सूत्रों की मानें तो फिल्म में कुछ पोलिटिकल रेफेरेंसेंस,नेताओं पर कटाक्ष और सिस्टम पर सवाल उठाने वाले डायलॉग्स को लेकर आपत्ति जताई गई है।

CBFC चाहता है कि कुछ सवादो में बदलाव किए जाएं या उन्हें म्यूट किया जाए। वहीं मेकर्स का कहना है कि अगर ऐसा किया गया तो फिल्म का मूल संदेश ही कमजोर हो जाएगा।

एडवांस बुकिंग पर असर

सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने का सीधा असर फिल्म की एडवांस बुकिंग पर पड़ा है। थिएटर मालिक असमंजस में है,क्यूंकि बिना सेंसर सर्टिफिकेट के वे शो की टाइमिंग और स्क्रीन अलॉटमेंट तय नहीं कर पा रहे हैं।

फंस के बीच भी बेचैनी बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया पर #JanaNAYAGAN और #ThalapathyVijay ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग फिल्म को जल्द रिलीज़ करने की मांग कर रहे है।

विजय के फैंस और राजनीतिक समर्थन

विजय के फैंस इस मुद्दे को सिर्फ सिनेमा का नहीं,बल्कि जनता की आवाज़ दवाने का मामला बता रहे है। कई फैन क्लब और समर्थक संगठनो ने सेंसर बोर्ड के रवैये पर सवाल उठाए है।

कुछ राजनीतिक दलों और संगठनो ने भी विजय का समर्थन किया है और कहा है कि कला और सिनेमा को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए ।

तमिलनाडु की राजनीति में हलचल

‘जन नायगन’ के चलते तमिलनाडु की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां इस अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़कर देख रहे है,वही सत्ताधारी पक्ष इस पूरे मामले पर फिलहाल चुपी सीधे हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर फिल्म बिना बड़े कट्स के रिलीज़ होती है,तो यह विजय की राजनीतिक छवि को और मजबूत कर सकती है।

आगे क्या ?

अब सभी की निगहाए हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। अगर कोर्ट सेंसर बोर्ड को जल्द सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश देता है,तो फिल्म समय पर रिलीज़ हो सकती है। लेकिन मामला लंबा खींचा,तो रिलीज़ टलने के आशंका है।

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