उत्तर प्रदेश

कौन हैं ये ‘गूगल गोल्डन बाबा’? माघ मेले 2026 में जिनके साथ सेल्फी लेने के लिए उमड़ रही है हजारों की भीड़।

‘गूगल गोल्डन बाबा प्रयागराज की पावन धरती पर हर वर्ष लगने वाला माघ मेला केवल आस्था का पर्व नहीं,बल्कि साधना,त्याग,तप और विविध परपराओं का जीवत संगम भी है। संगम की रेती पर बसे इस आद्यात्मिक संसार में देश-विदेश से साधु-संत,कल्पवासी और श्रद्वालु जुटते हैं। इस वर्ष माघ मेले में एक ऐसा नाम चर्चा में हैं,जिसने श्रद्धा के साथ-साथ जिज्ञासा और कौतूहल भी पैदा कर दिया हैं -‘गूगल गोल्डन बाबा’

National Khabar, Desk Report

प्रयागराज की पावन धरती पर हर वर्ष लगने वाला माघ मेला केवल आस्था का पर्व नहीं,बल्कि साधना,त्याग,तप और विविध परपराओं का जीवत संगम भी है। संगम की रेती पर बसे इस आद्यात्मिक संसार में देश-विदेश से साधु-संत,कल्पवासी और श्रद्वालु जुटते हैं। इस वर्ष माघ मेले में एक ऐसा नाम चर्चा में हैं,जिसने श्रद्धा के साथ-साथ जिज्ञासा और कौतूहल भी पैदा कर दिया हैं -‘गूगल गोल्डन बाबा’

अपने अनोखे पहनावे,करोड़ो के सोने-चांदी के आभूषण,चांदी के बर्तनों में भोजन और फिर भी नंगे पाव चलने के संकल्प के कारण ये बाबा माघ मेले का बड़ा आकर्षण बन गए हैं।

कौन हैं गूगल गोल्डन बाबा

गूगल गोल्डन बाबा का असली नाम भले ही आम लोगों को न पता हो,लेकिन उनकी पहचान उनके विशिष्ट अंदाज़ से बन चुकी हैं। सिर से लेकर पांव तक सोने-चांदी के आभूषणों से सजे बाबा, पहली नजर में किसी राजसी व्यक्तित्व की तरह प्रतीत होते हैं। बताया जाता है कि बाबा के शरीर पर पहना गया सोना-चांदी करीब 5 करोड़ रुपये की कीमत का है।

उनकी यह पहचान केवल दिखावे तक सीमित नहीं है। बाबा खुद को एक संदेशवाहक मानते हैं, जो आधुनिक समाज को अलग ढंग से अध्यात्म की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

आभूषणों में छिपा संदेश

आम धारणा है कि साधु-संत त्याग और सादगी के प्रतीक होते हैं, लेकिन गूगल गोल्डन बाबा इस धारणा को नए नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि
“सोना-चांदी पहनना या न पहनना बाहरी चीज़ है, असली तप मन और विचारों का होता है।”

बाबा मानते हैं कि आज का समाज दिखावे और भौतिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यदि कोई संत उसी भाषा में लोगों का ध्यान आकर्षित कर सके और फिर उन्हें धर्म, संयम और सत्य का मार्ग दिखाए, तो यह भी एक प्रकार की साधना है।

चांदी के बर्तनों में भोजन, चांदी के पात्र में जल

गूगल गोल्डन बाबा की दिनचर्या भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बाबा चांदी के बर्तनों में भोजन करते हैं और चांदी के पात्र में ही जल ग्रहण करते हैं।

इसके पीछे वे धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण बताते हैं। उनके अनुसार चांदी शुद्धता की प्रतीक है और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। हालांकि आलोचक इसे आडंबर कहते हैं, लेकिन बाबा का दावा है कि उनका जीवन अनुशासन और नियमों से बंधा है।

नंगे पांव संकल्प: वैभव के बीच त्याग का प्रतीक

सबसे रोचक पहलू यह है कि इतने वैभव के बावजूद गूगल गोल्डन बाबा नंगे पांव चलते हैं।
पहले बाबा करीब पांच लाख रुपये की चांदी की चप्पल पहनते थे, लेकिन बाद में उन्होंने एक संकल्प लिया और चप्पलें त्याग दीं।

बाबा के अनुसार यह संकल्प उनके आत्मिक शुद्धि और तपस्या का हिस्सा है। वे कहते हैं कि
“धरती मां से सीधे जुड़ना, अहंकार को तोड़ने का सबसे सरल मार्ग है।”

नंगे पांव चलकर बाबा यह संदेश देना चाहते हैं कि बाहरी वैभव के बीच भी भीतर का साधु जीवित रहना चाहिए।

संगम की रेती पर आकर्षण का केंद्र

प्रयागराज के संगम तट पर लगे माघ मेले में हजारों संत और लाखों श्रद्धालु मौजूद हैं, लेकिन गूगल गोल्डन बाबा के शिविर पर सबसे अधिक भीड़ देखी जा रही है।
लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचवाना चाहते हैं, उनके विचार सुनना चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आखिर सोने-चांदी से लदे बाबा साधना को कैसे परिभाषित करते हैं।

सोशल मीडिया पर भी बाबा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई है।

आलोचना और समर्थन दोनों

जहां एक ओर बाबा को लेकर भारी उत्सुकता है, वहीं दूसरी ओर आलोचनाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे धर्म के नाम पर दिखावा बताते हैं, तो कुछ इसे मीडिया का खेल मानते हैं।

हालांकि बाबा इन आलोचनाओं से विचलित नहीं होते। उनका कहना है कि “अगर मेरी वजह से कोई व्यक्ति धर्म, साधना या आत्मचिंतन की ओर एक कदम भी बढ़ाता है, तो मेरा उद्देश्य पूरा हो जाता है।”

माघ मेला: परंपरा और आधुनिकता का संगम

माघ मेला सर्दियों से आस्था,तप और त्याग का प्रतिक रहा हैं। यहां कल्पवासी कठिन नियमों का पालन करते हैं,साधु-संत साधना में लीन रहते हैं और श्रद्वालु संगम स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं।

गूगल गोल्डन बाबा इसी परंपरा में आधुनिकता का एक नया रंग जोड़ते नज़र आते हैं। वे दिखाते हैं कि बदलते समय में भी अध्यात्म नए रूप में लोगों तक पहुंच सकता हैं।

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