उत्तर प्रदेश

प्रयागराज में आस्था का महासंगम,पौष पूर्णिमा स्नान के साथ माघ मेले का भव्य शुभारंभ

Report by : Sakshi Singh

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार को आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला,जब पौष पूर्णिमा स्नान के साथ विश्व प्रसिद्ध माघ मेले की औपचारिक शुरआत हो गई। कड़ाके की ठंड के बावजूद देश-विदेश से लाखो श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचे और गंगा,यमुना व अदृश्य सरस्वती की पावन त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई। ब्रह्म मुहूर्त से ही संगम क्षेत्र में श्रदालुओ की भारी भीड़ उमड़ पड़ी,जिससे पूरा प्रयागराज धर्ममय वातावरण में डूब गया।

हर साल पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक चलने वाला माघ मेला भारतीय संस्कृति,सनातन परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का जीवन प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष भी माघ मेले को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की है। अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे माघ मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम नगरी प्रयागराज पहुंच सकते है।पौष पूर्णिमा मेले का पहला और महत्पूर्ण स्नान पर्व होता हैं,जिसे लेकर श्रदालुओ में विशेष उत्साह देखा गया।

पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम स्नान और दान-पुण्य का विशेष धार्मिक महत्व हैं। मान्यता हैं कि यह तिथि ‘पितरों की पूर्णिमा’ कही जाती हैं और इस दिन किया गया स्नान,दान और जप-तप पितरों को तृप्ति प्रदान करता हैं।श्रद्धालु इस दिन अपने पितरों की आत्मा की शांति और परिवार के कल्याण की कामना लेकर संगम में स्नान करते हैं। माना जाता हैं कि पौष पूर्णिमा पर संगम स्नान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती हैं।

कड़ाके की ठंड और कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नजर नहीं आई। भोर होते ही लोग संगम की ओर बढ़ने लगे। साधु-संत, कल्पवासी, गृहस्थ श्रद्धालु, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा—सभी एक ही उद्देश्य के साथ संगम तट पर दिखाई दिए। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य किया, जरूरतमंदों को वस्त्र और अन्न दान किया तथा गंगा मैया की आरती कर पूजा-अर्चना की।

माघ मेले की विशेष पहचान कल्पवास भी है। पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक हजारों कल्पवासी संगम क्षेत्र में रहकर संयम, तप और साधना का जीवन जीते हैं। कल्पवासी प्रतिदिन गंगा स्नान, सत्संग, प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। माघ मेला केवल स्नान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना का संगम भी है।

माघ मेले की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन गया है। पौष पूर्णिमा स्नान ने यह संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों और ठंड के बावजूद श्रद्धा और आस्था की शक्ति अडिग रहती है। आने वाले दिनों में मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा जैसे प्रमुख स्नान पर्वों पर संगम तट पर और भी अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। माघ मेला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक आस्था का जीवंत उत्सव भी है।

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