UGC के नए समानता विनियमों पर देशभर में बवाल

Report by : Sakshi Singh, National Khabar
- UGC के नए समानता विनियमों पर देशभर में बवाल
- लखनऊ यूनिवर्सिटी से दिल्ली तक छात्रों का प्रदर्शन, राजनीतिक और कानूनी लड़ाई तेज

UGC :- लखनऊ यूनिवर्सिटी से दिल्ली तक छात्रों का प्रदर्शन,राजनीतिक और कानूनी लड़ाई तेज
देश में उच्च शिक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया हैं। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा अधिसूचित किए गए ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम,2026’ ने छात्र संगठनों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। समर्थक जहां इसे शिक्षा व्यवस्था में समानता और समावेशन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं,वहीं विरोधी पक्ष इसे भेदभावपूर्ण,दुरूपयोग की आशंका से भरा और सामजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाला नियम करार दे रहा हैं। इसी विवाद के चलते लखनऊ यूनिवर्सिटी,दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं।
क्या हैं UGC के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम,2026

UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनयम,2026′ को नोटिफाई किया। इन नियमों का उदेश्य कैंपस में सभी वर्गों के लिए सामान अवसर सुनिश्चित करनाशिकायतों पर सख्त कार्रवाई और समावेशी माहौल को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। आयोग का दावा है कि ये नियम अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और हाशिए पर मौजूद छात्रों को संरक्षण देंगे और शिक्षा संस्थानों में समानता का वातावरण बनाएंगे।
हालांकि, नियमों की कुछ धाराओं को लेकर छात्रों और विशेषज्ञों के एक वर्ग ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है, जिससे उनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्रों का जोरदार प्रदर्शन
UGC के नए विनियमों के खिलाफ लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्रों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। छात्रों ने इन नियमों को “काला कानून” बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं और इससे कैंपस में झूठे मामलों की संख्या बढ़ सकती है।
छात्रों का कहना है कि नए नियमों के तहत किसी भी आरोप को लेकर छात्रों और शिक्षकों को परेशान किया जा सकता है, जिससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर विरोध

विवाद केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। सवर्ण समुदायों के छात्रों ने 27 जनवरी को UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। छात्रों का कहना है कि समानता के नाम पर बनाए गए ये नियम असंतुलन पैदा करेंगे और एक वर्ग विशेष को निशाना बनाने का जरिया बन सकते हैं।
दिल्ली में छात्र संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए बड़ी संख्या में छात्रों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उनका कहना है कि अगर इन नियमों को समय रहते वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
छात्र संगठनों का ‘यूनिटी कॉल’
बढ़ते विवाद के बीच कई छात्र संगठनों ने यूनिटी का आह्वान किया है। उनका कहना है कि यह मामला किसी एक विश्वविद्यालय या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। छात्र नेताओं ने सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों से अपील की है कि वे नए नियमों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं।
छात्र संगठनों का आरोप है कि UGC ने बिना पर्याप्त परामर्श के ये नियम लागू किए हैं, जिससे छात्रों की आशंकाओं को नजरअंदाज किया गया है।
प्रशासन की चेतावनी और सख्त रुख
जहां एक ओर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। लखनऊ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के कारण परीक्षाएं और शैक्षणिक गतिविधियां बाधित हो रही हैं। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कानून व्यवस्था या शैक्षणिक कार्यों में बाधा पहुंची, तो प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस चेतावनी के बाद छात्रों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति और गहरी होती दिख रही है।
उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी विरोध
विरोध केवल लखनऊ और दिल्ली तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सोमवार को छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गए और आज भी प्रोटेस्ट का आह्वान किया गया है। इसके अलावा अन्य राज्यों से भी असंतोष की आवाजें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर #UGCRegulation2026 और #StudentsProtest जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

विवाद ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। UGC के नए विनियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में 13 जनवरी को नोटिफाई किए गए ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम, 2026’ को चुनौती दी गई है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि ये नियम संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ हैं और इनके जरिए एक वर्ग के साथ भेदभाव हो सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं।
समर्थक बनाम विरोधी: दो ध्रुवों में बंटा देश
UGC के नए नियमों को लेकर देश दो ध्रुवों में बंटता नजर आ रहा है। एक पक्ष का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में भेदभाव एक गंभीर समस्या है और इन नियमों से कमजोर वर्गों को सुरक्षा मिलेगी। वहीं विरोधी पक्ष का दावा है कि नियमों का दायरा बहुत व्यापक है और इसका गलत इस्तेमाल कर निर्दोष लोगों को फंसाया जा सकता है।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी स्थिति साफ कर दी है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।
फ़िलहाल,UGC के ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम,2026’ को लेकर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। छात्र आंदोलन,प्रशासन की सख्ती,राजनीतिक बयानबाज़ी और सुप्रीम कोर्ट में दायर PIL-इन सबने इस मुद्दे को राष्ट्रिय बहस का विषय बना दिया हैं।
अब देखना यह होगा कि UGC छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए नियमों में संशोधन करता हैं या सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई अहम फैसला सुनाता हैं। इतना तय हैं कि उच्च शिक्षा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता हैं।



