उत्तर प्रदेश

UNNAO RAPE CASE ; न्याय की लम्बी लड़ाई और सिस्टम की कठोर परीक्षा

Report by : Sakshi Singh

UNNAO RAPE CASE ; एक बार फिर देश की न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
यह मामला केवल एक जघन्य अपराध तक सीमित नहीं रहा’ बल्कि सत्ता,पुलिस तंत्र और न्याय प्रणाली की भूमिका की कठोर परीक्षा बन गया है।

भारतीय कानून के तहत नाम उजागर न की जा सकने वाली पीडिता ने आरोप लगाया था कि जून 2017 में वह नौकरी की तलाश में ततकालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से मिली थी। इसी दौरान सेंगर और उसके साथियों ने उसका अपहरण कर लगभग एक सप्ताह तक दुष्कर्म किया।

पुलिस कार्रवाई में देरी और आत्मदाह की कोशिश

मामला में पुलिस की निष्क्रियता तब राष्ट्रीय बहस का विषय बनी,जब 2018 में न्याय न मिलने से हताश पीडिता ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह की कोशिश की।इस घटना के बाद मामला मीडिया और जन दवाब में आया। उस समय कुलदीप सिंह सेंगर भारतीय जनता पार्टी का प्रभावशाली नेता था,जिसे बाद में पार्टी से निष्काशित कर दिया गया।

हादसे,धमकियाँ और सदिग्ध मौत

मामला की सुनवाई के दौरान पीडिता और उसके परिवार को लगातार खतरों का सामना करना पड़ा। 2019 में पीडिता एक सदिग्ध सड़क हादसे में बाल-बाल बच गई,लेकिन इस दुर्घटना में उसकी दो चाचियों की मौत हो गई और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हुआ।
परिवार ने आरोप लगाया की पीडिता के पिता के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई,जिसके बाद उनकी जेल में सदिग्ध परीस्थितियो में मौत हो गई।

सज़ा और न्यायिक प्रक्रिया

2019 में अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को रेप के मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई। इसके अलवा 2020 में पीडिता के पिता की मौत से जुड़े मामले में उसे 10 साल की अतिरिक्त सज़ा दी गई।हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सेंगर की सज़ा निलंबीत कर जमानत दिए जाने के फैसले ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया। इस फैसले के खिलाफ CBI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट की रोक

अब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी,जिससे एक बार फिर पीढ़िता और उसके परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।

सिस्टम की सबसे बड़ी परीक्षा

उन्नाव रेप केस केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शता है कि जब आरोपी सत्ता और प्रभाव से लैस हो,तो पीड़ित को न्याय पाने के लिए कितनी लम्बी और कठिन लड़ाई लड़नी पड़ती है।यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली,पुलिस तंत्र और राजनीतिक जवाबदेही की सबसे बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

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