उत्तर प्रदेश

Yogi Adityanath और प्रधानमंत्री पद की चर्चा: Google बाबा के ‘चप्पल न पहनने’ वाले संकल्प के पीछे क्या है असली वजह?

Report by :- Sakshi Singh, National Khabar

  • Yogi Adityanath और प्रधानमंत्री पद की चर्चा
  • Yogi Adityanath को पीएम पद का दावेदार क्यों माना जाता है
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath:- माघ मेले से उठा बयान, जिसने राजनीति को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया

Yogi Adityanath:- प्रयागराज के माघ मेले में अपने अनोखे अंदाज़ और बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले गूगल बाबा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने ऐसा बयान दिया है, जिसने धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक चर्चाओं को भी तेज कर दिया है। गूगल बाबा का कहना है कि जब तक योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं बनेंगे—यह साफ नहीं हो जाता, तब तक वह चप्पल नहीं पहनेंगे।

इस बयान के सामने आते ही सवाल उठने लगे—आखिर गूगल बाबा ने ऐसा संकल्प क्यों लिया? क्या योगी आदित्यनाथ वाकई प्रधानमंत्री बन सकते हैं? और इस पूरे मामले में आस्था, राजनीति और संदेश का क्या संबंध है?

कौन हैं गूगल बाबा और क्यों सुर्खियों में रहते हैं?

गूगल बाबा प्रयागराज और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों में अक्सर नजर आते हैं। वह अपने शरीर पर भारी मात्रा में सोना धारण करने, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर राय रखने के लिए जाने जाते हैं।

राजनीति हो या धर्म, गूगल बाबा के बयान अकसर चर्चा का विषय बन जाते हैं। यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ को लेकर दिया गया उनका यह बयान भी सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तेजी से फैल गया।

Yogi Adityanath:- ‘चप्पल नहीं पहनने’ का संकल्प: आस्था का प्रतीक या राजनीतिक संकेत?

भारतीय संत परंपरा में किसी उद्देश्य के लिए त्याग और संकल्प लेने की परंपरा पुरानी है। गूगल बाबा का कहना है कि उनका यह फैसला किसी पद या सत्ता के लालच से नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास से जुड़ा है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह संकल्प केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है—जिसके जरिए वह योगी आदित्यनाथ के प्रति अपना समर्थन सार्वजनिक रूप से जाहिर कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में क्यों होती है चर्चा?

  1. सख्त प्रशासक की छवि

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, माफिया पर कार्रवाई और प्रशासनिक फैसलों में तेजी—इन सबने उनकी छवि एक कठोर लेकिन निर्णायक नेता की बनाई है। समर्थकों का मानना है कि यही गुण उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य बनाते हैं।

  1. हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मजबूत चेहरा

योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व की राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। एक बड़े वर्ग में उनकी लोकप्रियता है, खासकर उन लोगों के बीच जो मजबूत राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक विचारधारा में विश्वास रखते हैं।
गूगल बाबा जैसे संतों का समर्थन इसी वैचारिक मेल का परिणाम माना जा रहा है।

  1. लंबा राजनीतिक अनुभव

योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक सफर सांसद से लेकर देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री तक रहा है।
उनके समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रीय राजनीति को समझने और उसे दिशा देने का अनुभव उनमें मौजूद है, जो किसी प्रधानमंत्री के लिए जरूरी माना जाता है।

Yogi Adityanath:- भाजपा में प्रधानमंत्री पद को लेकर क्या है स्थिति?

भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री पद को लेकर आधिकारिक तौर पर किसी एक नाम की घोषणा नहीं की जाती। पार्टी का दावा रहा है कि नेतृत्व का फैसला संगठन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए होता है।

हालांकि समय-समय पर योगी आदित्यनाथ का नाम भविष्य के राष्ट्रीय नेताओं की सूची में लिया जाता रहा है। गूगल बाबा का बयान इसी चर्चा को एक बार फिर हवा देता नजर आ रहा है।

Yogi Adityanath:- संत समाज और राजनीति: पुराना रिश्ता, नया रूप

भारत में संतों और राजनीति का संबंध नया नहीं है। इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जब संत समाज ने राजनीतिक नेतृत्व को दिशा देने या समर्थन देने की भूमिका निभाई है।

गूगल बाबा का संकल्प भी इसी परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है, जहां धार्मिक मंच से राजनीतिक संकेत दिए जाते हैं।

आलोचना और सवाल भी कम नहीं

जहां एक वर्ग गूगल बाबा के बयान को आस्था और विश्वास का मामला बता रहा है, वहीं आलोचक इसे प्रचार पाने का तरीका और धार्मिक मंचों के राजनीतिक इस्तेमाल का उदाहरण बता रहे हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में किसी भी नेता का भविष्य जनता तय करती है, न कि किसी संत का संकल्प।

Yogi Adityanath की चुप्पी और रणनीति

अब तक योगी आदित्यनाथ या उनके कार्यालय की ओर से गूगल बाबा के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में चुप्पी साधना अक्सर एक रणनीति होती है, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके और फोकस प्रशासनिक कामकाज पर बना रहे।

Yogi Adityanath:- सोशल मीडिया पर बहस तेज

गूगल बाबा के बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो धड़े साफ नजर आ रहे हैं—
एक पक्ष इसे योगी आदित्यनाथ के बढ़ते कद का संकेत मान रहा है
दूसरा पक्ष इसे अफवाह और अतिशयोक्ति बता रहा है

वीडियो, पोस्ट और बहसों ने इस मुद्दे को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
[18:00, 15/1/2026] Sakshi: योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकते ?

Yogi Adityanath:- राजनीतिक और संगठनात्मक वजहें

योगी आदित्यनाथ को लेकर प्रधानमंत्री पद की चर्चा जरूर होती हैं,लेकिन मौजूदा हालात में उनके इस पद तक पहुंचने की संभावना सीमित मानी जाती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह भाजपा का संगठनात्मक ढांचा हैं,जहां नेतृत्व का फैसला केवल लोकप्रियता से नहीं,बल्कि पार्टी की सामूहिक रणनीति,ससदीय गणित और राष्ट्रीय संतुलन को देखकर लिया जाता हैं। इसके अलावा योगी की सख्त और आक्रामक छवि पूरे देश में समान रूप से स्वीकार्य नहीं मानी जा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button